भोपाल की बीएफ

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सेक्सी चुदाई कथा: भोपाल की बीएफ, धीरे धीरे मैं उसकी चुत को पैंटी से ऊपर से ही चाटने लगा और बाईट कर रहा था.

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वो अंदर आये और मेरे कपड़ों को देखा, फिर फाइल देखने लगे और फाइल लेकर चले गए. गुड मॉर्निंग गूगल कैसे होसाले को चुदाई के बीच फोन करने की क्या जरूरत थी?मैं रूका और बोला- उस बेचारे को क्या मालूम कि तुम चुद रही हो, फोन उठा लो.

घर जा कर अर्चना को याद कर के मैंने रात में तीन बार मुट्ठ मारी क्योंकि उसकी उठी हुई गांड और तने हुए बूब्स मेरी आंखों के सामने सपने जैसे चल रहे थे. बिरयानी कैसे बनता हैउसने दांत भींच लिए। मैंने अब उसके कंधों पर किस करते हुए अपने जैकेट से उसकी पैंटी निकाली और होंठों पे उंगलियाँ फेरते हुए पैंटी उसके मुँह में ठूंस दी.

मैंने भी मजा लेते हुए कहा- बस दोस्ती ही बढ़ानी है या और भी आगे जाना है?वो मुस्कराते हुए बोली- वो तो वक्त बताएगा.भोपाल की बीएफ: मैंने अपनी बड़ी भाभी को अठारह साल की उम्र में चोदा था, तब से अभी तक बहुत औरतों को चोद चुका हूँ.

मेरी चूची बहुत बड़ी हैं तो उनको मेरी चूची को दबाने में मजा आ रहा था.उनकी पिचकारी किसी चाबुक की तरह चुत में अन्दर तक गरमागरम वार कर रही थी.

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मैंने पूर्ण सावधानी बरतते हुए लहंगा वसुन्धरा के कटिप्रदेश तक पंहुचाया.उसी समय मैंने गांड को कुछ और खोलने की कोशिश की और छेद की कसमसाहट से वो समझ गए कि मुझे क्या चाहिए.

मैं उसको अपनी तरफ घुमा कर उसके चुच्चे को मुँह में लेकर चूसने लगा और एक हाथ से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया. भोपाल की बीएफ मेरी चूत में गजब की सुरसुरी मच रही थी मुझे लग रहा था कि मैं बस अब आई कि अब आई.

मैं उसके ऊपरी होंठ चूस रहा था और वो मेरे नीचे के होंठ चूसे जा रही थी.

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लंड अंदर जाने के बाद मोनी अपना मुंह कस कर भींचा हुआ था मगर फिर भी उसके मुंह से एक ऊह्ह् की सी हल्की कराह निकल गई. सोच रही थी कि लंड बस अब घुसने ही वाला है मगर वो बार-बार इधर-उधर फिसल जा रहा था. फिर मैंने उसे सहारा देकर खड़ा किया और वाशरूम में ले गया और उसे पट्टे पर बैठा कर उसकी जांघें दायें बाएं खोल दीं फिर गीजर के गुनगुने पानी से उसकी चूत को आहिस्ता आहिस्ता धो दिया और कुछ देर गर्म पानी से सिकाई भी कर दी जिससे उसे काफी आराम मिल गया.

मैंने एक साइड में, मंजू मेरे साथ और मंजू के दूसरी तरफ उसका भाई बैठा था. मेरा जिम जाने का समय सुबह 6 बजे से रहता है और उस वक़्त बहुत भीड़ रहती है. कुछ 10-12 धक्के लगाने के बाद नम्रता नीचे उतरी और झुकते हुए उसने अपनी चूत का मुँह मेरे लंड की ओर कर दिया.

मैं सामाजिक टाइप का आदमी हूँ और लोक लाज के चलते इच्छा होते हुए भी किसी को जल्दी लाइन नहीं मार पाता हूँ, लेकिन किसी लड़की या आंटी को भोगने की इच्छा हमेशा मेरे मन में मचलती रहती है. ”अंशु और मैं बैठ के शराब पीने लगे और उपिंदर ने मम्मी को बिस्तर पे दबोच लिया, उसके ऊपर लेट के होंठों को खूब चूसा। ब्रा उतार दी। चुचियाँ को तबियत से दबाया। फिर पेटीकोट और चड्डी भी उतार दी, अपने से चिपका के मम्मी के उभारों को मसलता रहा।अंशु ने मेरे पल्लू के अंदर हाथ डाला और मेरे उभार दबाए।ये क्या कर रही हो?”ये तो मेरा हक है. मेरे ऐसा करने से वो पागल सी होने लगी और जोर जोर से आवाजें करती हुई कामुक सिसकारियाँ लेने लगी- आह … करो … अब रुके क्यों हो … प्रिंस चोद दो मेरी चूत को … उफ्फ.

मैं रेखा की पीठ सहलाते हुए उसके गालों को चूमने लगा और रेखा मेरे गालों को चूमने लगी. फिर अगले दिन फिर से सुबह के ग्यारह बजे हम लोग प्रशिक्षण केंद्र में मिले.

एक तो नशीले बदन की नशीली जांघें और ऊपर से उस पर लगी हुई नशीले अमृत की बूदें … आअह आआह बहनचोद क्या कहने !!!तभी बाली रानी कूद के मेरे पास नीचे आ गई और लिपट के मेरे मुंह पर चुम्मियों की झड़ी लगा दी.

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धीरे धीरे सब मैनेज करने के बाद मैंने सारे रुके हुए बिलों का पैसा निकलवा लिया … जोकि करोड़ों में थी. ठीक है, तुम थोड़ा सो लो, तुम्हें अच्छा लगेगा … तब तक मैं नीतू को बेडरूम में ले जाता हूं … तुम्हें चलेगा ना?” शर्मा सर ने नितिन को जानबूझ कर ये सवाल पूछा. ” मैं मुंह से तो कह रही थी लेकिन अंदर से मैं भी रवि से चुदने के मूड में थी.

मैंने फोन में मेसेज और फोटो देखी तो …अब आगे की कॉलेज गर्ल सेक्सी कहानी:मैं बंगलुरु ट्रेनिंग के प्रोग्राम के बारे में सोचने लगा। साली यह किस्मत भी अजीब है जिन्दगी झंड हो गई है। एक बेचारा दिल और चार राहें। अजीब इत्तेफाक है चारों दिल फरेब हसीनाएं सामने खड़ी MPK(मुझे प्यार करो) बोल कर जैसे ललचा रही हैं।मैं अभी अपने ख्यालों में खोया हुआ ही था कि मोबाइल की घंटी बजी. मन करता कि उसको पटक-पटक चोद दूं लेकिन मैं नीचे लेटा हुआ था और जूली को अपने मन की हसरत पूरी करने का पूरा मौका दे रहा था. मेरी सेक्सी साली की जवानी की चुदाई स्टोरी मजेदार है या नहीं? मुझे मेल करके और कमेंट्स में बताएं.

उसके ख़िलाफ़ जो बातें थीं वे ये थी कि एक तो वह दो जवान बच्चों की माँ थी.

जब से आपके हथियार को हाथ में लेकर देखा है तब से ही नीचे जैसे भट्टी जल रही है. ”बड़ी मुश्किल से चुदाई के नशे में धुत्त मैंने कपड़े पहने, रानी से पापा के लिए लिखा पत्र लिया और रानी को गुड़ नाईट कह कर साइकिल उठाकर घर चला गया. ऐसे मोनू भी झड़ गया।अब हम सभी झड़ चुके थे।हम सभी अब बैड पर आकर बैठ गये.

तभी रेखा ने अपने पैरों को और अच्छे से फैला दिया ताकि मेरे हाथ उसकी चूत को और अच्छे से सहला सकें. मैं समझ गयी कि आज मेरी चूत को एक लंड मिल जाएगा, जिसकी मुझे भी जरूरत है. मैंने बाएं हाथ से वसुन्धरा को अपने साथ सटा लिया और अपने बाएं कंधे पर उसका सर टिका कर पीछे से अपना दायां हाथ उसके सर पर फेरने लगा.

मैंने पूछा- फिर क्या हुआ?दीदी- फिर वो मेरी ब्रा में हाथ डाल कर बड़ी जोर से मेरी दोनों चुचियों को मसलने लगा … और मेरे गालों और गर्दन को चूसने लगा था.

उसकी लाल-लाल गहराई में उसकी चॉकलेटी रंग की पत्तियां छुपी हुई थी। मैंने एक बार प्रशंसा भरी नज़र से जूली को देखा और फिर बिना उसके उत्तर का इंतजार किये ही मेरे होंठ उस मदहोश कर देने वाली चूत से टच हो गये।शुरू में तो मैं उसकी कोमल चॉकलेटी चूत को बस चूमने के इरादे से ही छू रहा था. आखिर चाल बिगड़ती भी क्यों नहीं, जिस बुर में कभी उंगली तक नहीं गयी थी, आज उसमें वो पूरा का पूरा लंड लेकर बैठी थी.

भोपाल की बीएफ आह-आह करते हुए पतिदेव बोले- कैसा लगा मेरा माल?नम्रता- बहुत टेस्टी है. फिर चुपचाप वापिस बिना किसी की नजर में आए घर आ गए और तुरन्त कपड़े उतारकर एक दूसरे से चिपक गए.

भोपाल की बीएफ उसकी चुत को चाटने का मन तो बहुत था, पर टाइम की कमी थी … इसलिए बस एक बार उसकी चुत पे मुँह लगाकर चुत की घुंडी को अच्छे से चूस लिया. दिशा चहकती हुई मेरे पास आकर घुटने के बल बैठ गई और अपने हाथ में लंड लेकर चूसने लगी.

फिर कुछ देर तक वो मेरी पीठ और बालो को सहलाते रहे और मैं उनकी पीठ और चूतड़ को सहलाती रही.

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स्कूल के प्रिंसीपल एक 6 फीट लम्बे और तगड़े बदन वाले हट्टे कट्टे मर्द थे. मैं अमित की बांहों से उतरी और अलमारी से अमित के लिए कपड़े और अपने लिए अपने सहेली का नाइट सूट लाई. मैंने अपने हाथ से बेडशीट को कसके पकड़ा, तो भैया ने समझ लिया कि मैं रसधार देने के लिए तैयार हूँ.

मेरे सिर में साली जी अपनी अँगुलियों से कंघी सी कर रहीं थीं और मैं लंड को पूरे वेग से उनकी चूत में से बाहर तक निकाल निकाल का फिर पूरे दम से घुसा घुसा कर अन्दर बाहर कर रहा था. मैं भी उसका साथ दे रही थी और हम दोनों लोग एक दूसरे को किस कर रहे थे. मेरा मन तो कर रहा था कि अभी भाभी की चुत में गोते लगा लूँ, पर भैया कभी भी आ सकते थे, तो मैंने मन मार कर भाभी को छोड़ दिया.

लेकिन जब जमीन पर बैठे-बैठे उसके पैर दर्द करने लगे, तो वो खड़ी हुई और पंलग पर बैठ गयी.

जब मैं बाहर आया तो साना भी शावर लेने के लिए बाहर मेरा इंतजार कर रही थी. अब सिसकारने की बारी मेरी थी। शुभ्रा भी अब बिना किसी झिझक के मेरे लंड को अपने मुंह में भर रही थी और सुपारे को लॉलीपॉप समझ कर चूस रही थी। वो यहीं नहीं रुकी. रायपुर पहुंचने के बाद मैंने मोनी के घर जाने से पहले ही कॉन्डोम का पैकेट ले लिया था और रात को जब सोने का समय हुआ तो …अब आगे:मोनी ने सोते समय लाईट बन्द नहीं की थी। पता नहीं वो भूल गयी थी या उसने जान बूझकर लाईट बन्द नहीं की थी.

माणिक मुझसे पूछने लगा कि तुम्हारी सहेली का कोई ब्वॉयफ्रेंड है और उसके बाद वो मेरे बारे में भी पूछने लगा कि मेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड है. फिर ऐसे ही फूल बोला तो वह अपना बायाँ चूतड़ उठाने लगी और मैंने पूरा लंड निकाल कर बायीं ओर धक्का मारा. मैंने भाभी की गांड को अपनी तरफ घुमा लिया और मैं भाभी की चूत को चाटने लगा.

ऐसा तो होना ही था और मुझे इस बात का पूरा पूरा इमकान भी था कि मेरा पाला किसी छुई-मुई से न पड़ कर एक बला की खूंखार शेरनी से पड़ने वाला था, जिस ने मेरे साथ इन पलों को साकार करने के लिए चौदह साल इंतज़ार किया था. मैं एक पल के लिए असमंजस में थी कि अब थॉमस का लंड मुँह में लूं या ना लूं … क्योंकि अगर रोहन ये देखते, तो उन्हें यह लगता कि मैं यह सब अपनी ख़ुशी से कर रही हूँ.

[emailprotected]कहानी का अगला भाग:पड़ोस की भाभी की गर्म चूत में मेरा लंड-2. चूँकि हमारे सामने के गेट अलग थे इसलिए कोई यह अंदाजा नहीं लगा सकता था कि पिछली बालकॉनी में जन्नत के दो दरवाजे खुले रहते थे. मैंने देर नहीं की और पोजीशन बना कर उसकी चूत में लंड डालना शुरू कर दिया.

जब मुझे लगा कि मेरा माल निकल जाएगा, मैंने हल्के से नम्रता के गाल पर एक चपत लगायी.

मेरी गर्लफ्रेंड बुरी तरह से हिल रही थी और उसका रो रो कर बुरा हाल था क्योंकि मेरा झटका बड़े जोर से लग रहा थे पूरा बेड चरमरा रहा था।कुछ देर में उसे भी मजा आने लगा वो भी मेरा खुल कर साथ देने लेगी।पर कुछ ही देर में उसने पानी छोड़ दिया. खाना खाते समय मैंने खाने की तारीफ की, तो वो बहुत खुश हुई और बोली- थैंक्स सर. अगले दिन सुबह जब मैं स्कूल जा रहा था तो वह लड़की मुझे फिर से दिखाई पड़ गई.

कहीं कुछ उल्टा सीधा हो गया तो … और मुझे अभी तक उस पर विश्वास भी नहीं हो पाया है. उसके बाद मैंने साना को नीचे लेटा दिया और उसकी चूत पर लंड को रख कर रगड़ने लगा.

फिर वो फ्रेश होकर बाहर आई और मुझे बोली- तू भी फ्रेश होकर और झांट निकाल कर आना. जब वो मेरी चूत चाटने के लिए लंड बाहर निकालता, तो मैं भी उसका लंड चूस लेती थी. शाम को तब जागा, जब मेरे हॉस्टल के फ्रेंड ने घंटी बजा कर मुझे जगाया.

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उसके तीन चार बार लगातार मेरे होंठों को चूसने से मुझे सेक्स का पूरा नशा चढ़ चुका था और मेरे बूब्स अब ऊपर नीचे होने लगे थे.

फ़ोन काट कर मैं जैसे ही उसके रूम में गई, उसने कैंडल सारे रूम में जला रखी थीं और बेड गुलाब के फूलों से सजा रखा था. मैंने भी अपनी बांहों में उसके जिस्म को जकड़ लिया और उसे कस कर हग करते हुए उसको ‘आई लव यू’ कह दिया. ऐसा लगा मानो किसी में चाकू को चूत में डाल दिया हो!राज मेरे ऊपर ही पड़ा रहा.

6 इंच का लौड़ा बिल्कुल खड़ा हो चुका था और लोवर के नीचे उसका उभार साफ नजर आ रहा था. वो बोला- कौन सा गिफ्ट जान?मैंने आंख दबा कर उसका लंड हिला दिया- ये वाला गिफ्ट … जो आज मुझे दिया है. इंग्लिश सेक्सी वीडियो ब्लूदीपिका ने फोन उठाया और स्पीकर ऑन करके बोली- हाँ संजना, कैसी हो?संजना- तुम बताओ, सब सेटिंग हो गई?दीपिका- हाँ, सब हो गई.

अपनी साली दिशा का इतना हॉट फिगर देखकर एक बात तो पक्की थी कि आज मैं दिशा को पूरी रात चोदने वाला था. बिमारी की गंभीरता को देखते हुए उनको हॉस्पिटल में भर्ती करवाना पड़ा.

हालांकि राजेश हूं हूं कर रहे थे, लेकिन मैं अन्जान सी बनी हुई उनके लंड को चूसे जा रही थी और उनका जिस्म अकड़ता ही जा रहा था. अब मैं एक हाथ से उसकी योनि सहला रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूचियां दबा रहा था जिससे वह मदहोश होने लगी।वह मेरी लोअर के ऊपर से मेरे लिंग को पकड़ कर तेजी के साथ सहला रही थी. उन्होंने वहीं मुझे फिर से घोड़ी बना दिया और मेरी गांड की छेद में देखने लगे.

मेरा और उसका कमरा साथ-साथ हैं और मैंने उसके कमरे में देखने के लिए बीच में एक मोरी भी कर ली. चुदाई ख़त्म करके मैंने उसको गाड़ी की रिपेयर करने को कहा तो वो बोला- गाड़ी तो ठीक है. उन्होंने ने पीछे से मेरी चूत पर अपना लंड लगा दिया और मुझे घोड़ी बनाकर चोदने लगे.

खैर मैंने शुभ्रा की टांगें पकड़ीं और लंड को बहन की चूत के मुहाने से लगाकर अन्दर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा। तभी दो बातें एक साथ हुईं.

न किसी ने बताई, न किसी चुदाई वाली कहानी में पढ़ी और न ही किसी ब्लू फिल्म में देखी. बगल में सोये दूसरे लोगों के उठने का भी डर था क्योंकि मां तो सुबह में जल्दी ही उठ जाती थी.

हॉल में देखा तो जीजू वहां पर सो रहे थे और उनके खर्राटों की आवाज जोर से सुनाई दे रही थी. हमेशा की तरह यह कहानी भी महान महारानी, मेरी बेगम जान, मेरी मल्लिका ए आलिया को समर्पित है. फिर वो बोली- हाँ बहुत मज़ा आ रहा है … हाईईई म्म्म्मम!कुछ देर के बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। अब वो पूरी मस्ती में थी और मस्ती में सिसकार कर रही थी- अआह्ह्ह आाआइईई और करो, बहुत मजा आ रहा है।अब वो इतनी मस्ती में थी कि पूरा पूरा शब्द भी नहीं बोल पा रही थी।हम दोनों के चूतड़ बिस्तर से ऊपर उठ गए, केवल पैर बेड पर हमें रोके हुए थे.

आह्ह … होह … अह्ह … मेरी सांस फूल रही थी और वीर्य की पिचकारियां चाची की चूत में लग रही थीं. इस दौरान मैं चूत का दाना सहलाती रही थी जिस वजह से मैं 3 बार झड़ चुकी थी. वो किस्सा भी लिखूंगा जब उसके भाई और मैंने मिल कर अमीषी की एक साथ ली और उसकी गांड भी मारी.

भोपाल की बीएफ उसने शर्ट को बड़े मादक अंदाज से मेरी आंखों में देखते हुए बेड के नीचे गिरा दिया. मन कर रहा था उसकी योनि को अपने लिंग से ऐसे ही भेदते हुए दिन-रात उसका चोदन करता रहूं.

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हम काम के बहाने से एक दूसरे की तारीफ़ कर देते थे और मुस्करा देते थे. वो बस यही कहती रही- प्लीज मुझे छोड़ दो! बहुत दर्द हो रहा है!‘आहह हह ईइइ इइ ऊइइ इइइ ऊइइ मां मोरे जाबो रे उरी मां गो आहह हहह ईइइ इइ ऊइइ इइइइ छेरे दाव!’ उसने बहुत मिन्नतें की लेकिन मैंने जरा भी रहम नहीं किया. एक दिन जब मैं क्रिकेट खेलने के लिए जा रहा था तो रास्ते में मुझे एक लड़की दिखाई दी.

मैं कितना भी छुपाने की कोशिश करूं लेकिन मेरे बड़े-बड़े चीनी जैसे मीठे दूध मर्दों की नजर में आ ही जाते हैं और उनके मोटे-मोटे लंडो को खड़ा कर देते हैं. वैसे तो मैं समझ गया था लेकिन मैंने अनजान बनते हुए भाभी से पूछा- भाभी, मैं कैसे रोक सकता हूँ?भाभी- राज, मैं इनकी माँ हूँ. बूब्स सोरे प्रेग्नेंटसरिता- क्या कहा अंकल … 100 रुपये?मैं- हां पूरे 100 रुपये, पर इस बार शर्त भी बहुत कठिन होगी.

इधर आज की मदभरी मुलाक़ात में निखिल और मीरा भी सीनियर और जूनियर होने के बावजूद भी काफ़ी घुल मिल गए थे.

जैसे ही चाची की चूत से रस निकला मैंने उनकी चूत के रस की एक एक बूंद को चाट चाट कर अंदर पी लिया. उस कमरे के सामने हमने लाइट की, तो देखा वहां पर बेड और उसके ऊपर एक पतला सा गद्दा पड़ा था.

उन्होंने गुर्रा कर बोला- रंडी साली अभी तो आधा लंड घुसा है … अभी से तेरी चीख़ें निकल रही हैं … ले भैन की लौड़ी पूरा लंड ले. ‘मैं जल्दी ही चुदने वाली हूं!’ ऐसा सोच कर मुझे खुद से शर्म आती कभी डर लगता कि कहीं ऐसा न हो जाय वैसा न हो जाय, चूत की सील टूटेगी तो सुना था कि भयंकर दर्द सहना पड़ता है वगैरा वगैरा …पर मैंने मन पक्का कर लिया कि जब ओखली में सिर दे ही चुकी हूं तो अब डर कैसा … जो भी होगा उसे हिम्मत के साथ झेलूंगी. ओके सर!” मैं धीमी आवाज में बोली और रवि सर के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी.

मैं कुछ नहीं बोला, फिर मैं पता नहीं क्या सोच कर वहां से उठकर अपने घर आ गया.

मैं गुस्से में बोली- आप लोग क्या सामान बेचते हैं, इतने मंहगे सामान देते हैं और घटिया क्वालिटी का सामान बेचते हैं. थोड़ी देर बाद भार्गव ने मेरे दोनों पैर ऊपर किए और अपना लंड मेरी चूत में धीरे से सरका दिया. ये बात उसने मुझे खुद बताई थी कि उसका गुजरात में 4 लड़कों के साथ चक्कर था जिन्होंने उसे खूब चोदा था.

ब्लू फिल्म दीजियेपर उसको सेक्स किए बहुत दिन हो गए थी तो लंड घुसते ही मानसी दर्द के मारे चिल्ला पड़ी. मुझे वसुन्धरा के पैरों तक झुक कर जमीन से लहंगे का नाड़े वाला हिस्सा ऊपर की ओर लाना था.

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मैंने हल्की सी सिसकारी ली, तो उसको पता चल गया कि मैं भी गर्म हो गयी हूँ और मैं भी मजा ले रही हूँ. मैं तो कब से इसी संकेत के इंतजार में था कि कब मौका मिले और आज जब ये मौका मिला है तो मैं चूकता कैसे?अब मैंने अपनी मुट्ठी में मौसी के चुचे को पूरा भर लिया. जब विक्रम ने अपने बड़े भाई को बताया कि उनकी पत्नी रीना ही विक्रम की गर्लफ्रेंड रह चुकी है तो राजवीर चौंक पड़ा.

कोई बात है क्या?वह रूककर बोली- आपका बिस्तर गन्दा नहीं होगा?मैंने कहा- एक दिन में गन्दा थोड़े होता है. ” कहते हुए वह फिर हंसने लगी।थैंक यू ! वैसे आप भी 25-26 की ही लगती हैं। आपने तो अपनी फिगर बहुत अच्छे से मेन्टेन किया हुआ है। ऐसा लगता है जैसे कॉलेज गर्ल हों. पंद्रह मिनट तक उसकी चूत की ठुकाई की और उसके बाद हम दोनों ही साथ में झड़ गये.

मैंने गोद में उठाये हुए ही उसको होंठों पर हल्का सा चुम्बन किया। उसने भी आँख बंद करके मेरा वेलकम किया। फिर बाथरूम में जाकर हम साथ में नहाये. होंठों के चुम्बन में हमारी जीभें एक दूसरे की जीभों से खेल खेल रही थीं. मैं भी नीचे से कमर हिलाकर उनको साथ देने लगी और उनके सीने को दाँतों से काटने लगी.

वो बोली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… बहुत दर्द हो रहा है प्रिंस, एक बार निकाल लो प्लीज. कंडोम के बावजूद भी मुझे उसकी चूत की गर्मी बहुत अच्छे से महसूस हो रही थी.

वसुन्धरा ‘न’ नहीं कहेगी, ऐसा मुझे पता था लेकिन यही तो मेरे सब्र, मेरी शराफत, मेरे सदाचार की सबसे बड़ी परीक्षा थी जिसमें मैंने सफल हो कर दिखाना ही था.

रितेश ने भी मीरा के नजदीक आकर लंड को सैट करके एक जोरदार धक्का दिया और सोफे पर चुदाई के इस आसन का दौर शुरू हो गया. जैकलीन की सेक्सीमम्मी बोलीं- वो ब्यूटीपार्लर में पार्ट टाइम काम करने लगी हैं, शायद वहीं गई होंगी. लेडी डॉक्टरजगह बनाकर जैसे ही मैं फ्री हुआ, तुरंत मौसी से लिपट गया और मौसी को किस करने लगा, थोड़ी ही देर बाद मौसी मुझे दूर करते हुए कहने लगीं- इतना टाइम नहीं है, जो करना है जल्दी करो और अपनी जगह पर पहुँचो. हम दोनों को एक दूसरे के उत्तेजक अंगों से खेलते हुए काफी देर हो चुकी थी.

करीब 10-12 मिनट बाद मौसी आईं और बिना कुछ बोले ही मेरी बगल में लेट गईं.

सिर्फ तन से नहीं मन से भी और रूह से भी!मैंने कहा- तुम्हारी चाहत लाजिमी है. मैं हेतल दीदी की पसंद को मान गया था जब पहली बार मैंने जीजू को देखा था. कुछ ही देर बाद मेरा लंड भी वीरगति को प्राप्त हुआ तो चूत ने सिकुड़ कर उसे बाहर धकेल दिया.

सुधा ने झट से लहंगा उठाया और मैं उसकी चूत में लंड पेल कर उसे चोदने लगा. लेकिन उसके अलावा और कोई ख्वाहिश हो तो बताओ, जैसे बियर या दारू … वाईन. मैंने नम्रता को पलंग पर बैठाया और उसकी एड़ी को उसके कूल्हे से सटाते हुए उसकी टांगों को फैला दिया.

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मैं उससे थोड़ी गुस्से में बोली कि अब तुम यहां से बाहर जाओ, नहीं तो मैं मधु को बुलाती हूँ. सीमा की कामुक सिसकारियों की आवाज से कमरा जल्दी ही गूंजने लग गया।सीमा की चूत को मैंने लगभग 25 मिनट तक अपने खीरे जैसे लंड से रगड़ा. जब वो मेरी चूत चाटने के लिए लंड बाहर निकालता, तो मैं भी उसका लंड चूस लेती थी.

मेरी बात पर हीना ने कहा- तो क्या हुआ सर … आप मेरे अन्दर ही समा जाइए न … बाकी मैं संभाल लूंगी.

उसको देख कर मन करता था कि दिल की बात कह दूं लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि शुरूआत कैसे और कहाँ से करूं.

उसने अपना लंड मेरे मुँह में देना चाहा, लेकिन मैंने मना कर दिया तो उसने कोई जबरदस्ती भी नहीं की. उसने अपने घुटनों को सीधा करके एक बार तो अपनी चूत को पीछे से भी मेरे चंगुल से छुड़ाने की कोशिश की मगर जैसे उसने अपने पैरों को आगे की तरफ से सीधा किया वैसे ही मैंने आगे की तरफ से उसकी चूत पर हाथ रख दिया. सास और दामादमैं थॉमस से अपनी चुत को कुछ मिनट तक चटवाने के बाद अब बस झड़ने वाली थी.

रात को नींद लेने के बाद अब सेक्स करने के लिए फिर से नई ताकत आ गयी थी. आज सीमा जी बैंक की जरूरी मीटिंग में शहर से बाहर गई थीं, तो पिंकी पूरी तरह से चुदने का मन बना कर आई थी. मैंने भी बिना समय गंवाए उस लपलापाती हुई जीभ को अपने होंठों के बीच दबा लिया.

रीना के सारे कपड़े उतार कर मैंने उसे पूर्ण रूप से नग्न कर दिया। यह करते हुए मुझे पिछली बार का हाफ स्वैपिंग वाला किस्सा याद आ गया, जिसमें उस दिन उसे शर्म आ रही थी. मैं उस पर मुठ मारने वाले को रंगे हाथ पकड़ना चाहती थी कि कौन है, जो ऐसा कर रहा है.

मैंने लंड पेलने के बाद जैसे ही उसका मुँह खोला, वो रोने लगी- अंकल नहीं, निकाल लो इसे, मैं नहीं सह पाऊंगी.

लेकिन चाची की मदमस्त चूचियों को चूसने और दबाने से मेरा वो दर्द एक मतवाली लज्जत में बदल गया था. न्यूड लेडी हॉट सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपने चोदू अफ्रीकी यार के साथ पति के सामने बेडरूम में गयी. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था, इसीलिए मैं दिशा को खड़े करके पीछे से उसके दोनों मम्मे दबाए, जिससे दिशा गरम और कामुक सीत्कार करने लगी थी- आह आह ओह जीजू … अह आह ओ ओह … अब नहीं रहा जाता जीजू.

म्यूजिक सेक्सी पिक्चर उसके ज़ोर ज़ोर से धक्का देने से मेरी चूत में दर्द के साथ साथ मज़ा भी आ रहा था … और मेरी ‘आआहह …’ निकलना बंद ही नहीं हो रही थी. मीरा ने भी कहा कि वो भी यही चाहती है, लेकिन रोज रोज नींद की गोली वो निखिल और रीमा को नहीं दे सकती.

उसके हाथ पीछे ले गया और उसकी ब्रा से बांध दिया। मैंने पट्टा उसके गले में पहनाया और उसे चलने का इशारा किया. भार्गव का लंड मेरे मुँह में था … और मैं ज़ोर ज़ोर से उसका लंड मेरे मुँह में हिला रही थी. जीजा जी मेरे साथ ही लेटे हुए थे और देखते ही देखते उनके लंड में जो थोड़ी बहुत कसावट थी वो भी चली गई.

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नम्रता- वो कैसी दिखती उन कपड़ों में?मैं- दिखती तो वैसे भी वो बहुत सेक्सी है, लेकिन अगर बिकनी या टू-पीस पहन ले तो और सेक्सी माल दिखती है. मैं- क्या तुमको सुबह की बात को लेकर कुछ कहना है?मीता- सॉरी वो बहुत ज़िद कर रहा था तो क्लास बंक करके मैं उसके साथ चली गई थी. उस पर लड़कियों की नंगी तस्वीरों वाली छोटी मैगजीन भी साथ में देखने को मिल जाती थी।बस एक दिन ऐसा ही हो गया.

मेरे लंड को सीमा ने अपने मुंह में लेकर चुसना शुरू कर दिया ताकि वो खड़ा होकर गांड में जाने के लिए रेडी हो जाए. मेरी कमसिन जवानी और उनकी अनुभवी वासना हर बार हमें एक नए शिखर पर ले जाती थी.

मैंने तो सोचा था कि यहां पर मुझे ज्यादा से ज्यादा श्लोक से अदला बदली करनी होगी लेकिन वह क्या खेल खेल रहा होता है केवल उसे ही पता होता है। क्या प्रिया भी आई है? और क्या राजवीर प्रिया के कमरे में गया है?रणविजय- हां, वो प्रिया के कमरे में है.

नम्रता- हां मेरे राजा, मेरी गांड चूत सब तुम्हारी ही तो है, जो सूंघना चाहो सूंघ लो. उसमें एक लड़की का नाम लिखा था अनिता राय और उसके नीचे उसका मोबाइल नंबर भी दिया था. जब भी मैं उसके आधे से ज्यादा स्तन को अपने मुँह में भर कर गांड उठाता था … तो वो मजे से और भी ज्यादा सिहर उठती थी.

यह एक अनोखे किस्म का सेक्स था जो मैंने पहले दो तीन रानियों के साथ किया तो था मगर बॉडी वाश के कारण फिसल फिसला के नहीं. थोड़ी ही देर में मौसी के निप्पल कड़क हो गए, तब लगा कि यही मौसी की वासना जगाने का सही वक्त है. मैंने अपने सर को ज़रा सा झुकाया और अपने बाएं बाज़ू को हल्की सी ऊपर को जुम्बिश दे कर वसुन्धरा के होठों को अपने और करीब कर लिया और अपने जलते-तपते होंठ वसुन्धरा के गुलाब की बंद कलियों जैसे नम और रसभरे होंठों पर रख दिए.

इतना कह कर मैंने उसके मम्मी की नाइटी पहन ली और उसके पापा के बेडरूम में चली गई.

भोपाल की बीएफ: मैंने एक टेबल बुक कर ली थी। वहां से मैं उसे सीधे उस रेस्टोरेंट में ले गया जहाँ हमारी डेट थी. अचानक उन्होंने उंगली चुत से बाहर निकाली, तो मैं व्याकुल हो गयी और नाराजगी से उनकी ओर देखा.

अभी भी उसके हाथ में कटोरी थी, एक हाथ में कटोरी लेकर अपने मम्मे के नीचे लगाया और अपने मम्मे को दबाने लगी, मैं कौतूहल पूर्वक उसको इस तरह से करते हुए देखकर उठ कर बैठ गया और नजरें वहीं गड़ा दीं. धीरे धीरे करके बसंती ने मेरे पूरे लंड को जैसे अपने मुंह की गहराई में उतार लिया. अचानक चाची ज़ोर से मेरे लंड को दबाती हुई बोलीं- राहुल और तेज़ कर …मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.

”क्यों अंकल?”आखिरी चैप्टर शुरू करना है ना!”मैं नीचे खिसकी और पैर नीचे छोड़ दिए, अब मैं सिर से कमर तक बेड पर लेटी थी और पैर घुटनों से फोल्ड करके जमीन पर रखे हुए थे.

मैंने सोचा कि अभी इन्हें रोक दूँ कि ‘पिताजी आप ये क्या कर रहे हो? ये आपकी बेटी है. उसकी बात पर मैं हँस पड़ा और मैंने अपने आप को सूंघने की कोशिश की तो दीपिका ने अपना मुँह और नाक मेरी बालों से भरी छाती में लगा दिया और बोली- दिल करता है बस तुम्हारे यहाँ अपना मुँह रखे रहूँ. मैंने भी उसकी हंसी में साथ दिया और उसको शिमला चलने के लिए हामी भर दी.