बीएफ मां की चुदाई

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हम दोनों ही अलग हो गए और अपना-अपना काम करने लगे।तभी वैशाली बाहर आई और बृजेश नहाने चला गया।उसने जाते-जाते कहा- मैं अभी फ्रेश हो कर आता हूँ. फिर भी उसकी चूत में धीरे-धीरे लौड़ा डालना शुरू किया।जैसे-जैसे उसकी चूत में मेरा लण्ड सरकने लगा. बस मुझे इतना ही पता था कि जो भी हो रहा है, बड़ा अजीब लग रहा है।फ़िर मैं नीचे जाकर सो गया।अगले दिन सुबह मामा ने मुझ पर कामों का बहुत बड़ा ढेर सौंप दिया। ये करो.

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उसको भी पता चले कि उसकी बहन कैसे रंडीबाजी कर रही है।‘साली औकात में रह.

जहाँ बैठ कर आपी हमारा शो देखा करती थीं।फरहान ने आपी के बदन को अपने बाजुओं में भरा और उनके होंठों को जंगली अंदाज़ में चूसने लगा।यह पहली बार था कि फरहान आपी के साथ अकले में कुछ कर रहा था. एकदम परी जैसी।इस बार तो मैंने उसे आगे बढ़ कर अपनी बाँहों में भर लिया और उसको बिस्तर पर लिटा कर सीधा किस करने लगा।वो बोली- आराम से. अब जल्दी करो नहीं तो नानी आ जाएंगी।मैंने फिर थोड़ा ज़ोर से धक्का मारा.

जिसके परिणाम स्वरूप उसकी चूत के रस से मेरा लण्ड भी चिकना हो गया।फिर मैं लण्ड को उसकी चूत के भगनासे से रगड़ कर उसे बेचैन करने लगा क्योंकि मुझे मालूम था कि वो जितना अधिक बेचैन होगी. लेकिन इसके बाद मुझे उसे चोदने का ख़याल आने लगा।मैं सोचने लगा अगर मौका मिल जाए तो मैं उसकी चुदाई कर लूँ।इस बीच डिनर का टाइम हो गया. लेकिन उसकी चोदने की गति कम नहीं हुई।मेरे शरीर का तूफ़ान अब ज़ोर मारने लगा था, आनन्द की लहरें योनि की दीवारों से उठ कर दिमाग को झनझना रही थीं। मेरा तन अकड़ने लगा।दिमाग में वैसे ही हल्के-हल्के विस्फ़ोट होने लगे.

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इसलिए मैं भी तुम से जुदा नहीं होना चाहती हूँ।मैंने आपी से कहा- आपी आप परेशान ना हों. उनके सीने के उभारों और पेट पर मेरे लंड से निकले जूस ने आड़ी तिरछी लकीरें सी बना डाली थीं।आपी ने अपने जिस्म पर नज़र डाली और मेरे लंड को छोड़ कर अपनी उंगली से अपने खूबसूरत निप्पल्स पर लगे मेरे लंड के जूस को साफ किया और काफ़ी सारी मिक़दर अपनी उंगली पर उठा कर उंगली अपने मुँह में डाल ली।मैं आपी को देख तो रहा था. तो काम कैसे बनेगा? हर औरत को पहली-पहली बार दर्द होता है और उसे उस दर्द को बर्दाश्त करना पड़ता है।मौसी ने दर्द भरी आवाज में कहा- साले तेरा लण्ड तो घोड़े जैसा है.

फिर उन्होंने अपना लण्ड मुझे चूसने को कहा।मुझे बहुत खराब लग रहा था, मैंने नहीं किया तो उन्होंने जबरदस्ती अपना लम्बा लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया।मुझे उसका स्वाद बहुत खराब लग रहा था लेकिन उन्होंने मेरे मुँह की चुदाई शुरू कर दी।कुछ देर बाद उनका लण्ड खड़ा हो गया था और अब वो बहुत बड़ा और मोटा दिख रहा था।मेरी डर के मारे कुछ देर के लिए साँस ही रुक गई, मैंने कहा- ये बहुत बड़ा है. मैं आपी के साथ ही किचन की तरफ चल पड़ा और कहा- मैं तो पहले ही कह रहा था कि इधर कोई आ जाएगा. मगर मेरा बिस्तर नहीं था।मेरी भाभी से बात करने कि हिम्मत तो नहीं हो रही थी.

लेकिन उनके दाँत मेरे कंधे में गड़े थे और नाख़ून कमर में घुस से गए थे.

मैं आपी की बात सुन कर उनको ‘ओके’ बोल कर वहाँ से चला गया।मैंने अपने कमरे में जाकर में फौरन कपड़े उतारे और वॉशरूम में घुस गया। कुछ लम्हे बाद मैं फ्रेश होकर बिस्तर पर लेट गया और आपी का इन्तजार करने लगा।करीब दस मिनट बाद आपी कमरे में आईं तो मैं खुशी से आपी की तरफ बढ़ा और उनको गले से लगा लिया। मैंने उनके होंठों पर एक किस की. बहुत देर तक मैं उसकी चूत को चाटता रहा, उसकी सीत्कारें बढ़ती ही जा रही थीं।इधर मेरा लण्ड फिर से रॉड की तरह टाइट हो चुका था, वो गर्म होती जा रही थी और उसके साथ मैं भी गर्म होता जा रहा था।अब निहारिका से रहा नहीं जा रहा था, वो बोली- आआआहह. कभी पार्किंग में मेरे शरीर को घूर-घूर कर देखना। क्या तुझे मैं इतनी अच्छी लगती हूँ?अब मैं सब समझ गया था कि वो सब जानती है, तो मैं भी चालू हो गया.

उन्होंने मुझसे वहाँ अन्दर जाकर बैठने को बोला।मैं फिर थोड़ा सा डर गई. मुझे देर हो रही है।मैंने जल्दी से भाभी को नीचे घुटने के बल बैठा दिया और लण्ड को नेहा को चूसने को कहा. मेरा लण्ड टेबल तोड़ने को कर रहा था।वो धीरे-धीरे मेरी जाँघों के बीच में तेल लगाए जा रही थी और मैं कामोत्तेजना से तड़प रहा था।पैरों की मालिश के बाद अब पीठ की बारी थी.

बनवा लेगा कल जाकर!अब्बू ने अपना रुख़ अम्मी की तरफ फेरा और बोले- अरे नायक बख़्त. जिसको उन वर्कर्स ने भी बहुत खुशदिली से क़बूल किया।अगले 3 दिन तक हम पेपर वर्क और दूसरे तमाम मामलात में मसरूफ़ रहे। मैं सुबह जल्दी कॉलेज जाता था और कॉलेज से ही सीधे शॉप पर पहुँच जाता.

तो ये करके देखने में हर्ज ही क्या है और अगर तुम्हारा कोई बिज़नेस में फायदा होता है. वहाँ वो हगने के लिए जा रही थी।मैं रुका और उसको देखने लगा।उसने भी मुझे एक बार देखा और कटीली मुस्कान देते हुए कहा- तुम मुझे क्यों घूर रहे हो?मैं उसकी तरफ धीरे-धीरे बढ़ने लगा।वो जान चुकी थी कि आज वो चुदने वाली है।मैंने पेड़ से एक मीठा आम भी तोड़ लिया था। जैसे ही मैं उसके पास पहुँचा. किसी माहिर और अनुभवी चुसक्कड़ की तरह।फरहान ने मुझसे मिन्नतें करते हुए दो बार और कहा.

ले ले ना एक बार अंदर!‘नहीं, मुझे जाने दो प्लीज़!’मैं ज़ोर जबरदस्ती करके उठ गया और अपनी पैंट ऊपर कर ली.

लाइट जला दी।मैंने पानी पिया और बोतल उसको पकड़ा दी और खुद बिस्तर पर उल्टा लेट गया, तकिया मेरे सीने के नीचे था।सामने सोफे पर वो बैठी थी, बोली- बड़ी जल्दी सो जाता है यार तू?मैंने कहा- यार कोई है नहीं घर में. मखमली जाँघों को देखते ही अपना कंट्रोल खोने लगा।क्या मस्त दिख रही थीं वो उस समय. फिर वापस घूमीं और आहिस्ता आवाज़ में बोलीं- सगीर मैं आज रात को तुम्हारे कमरे में नहीं आऊँगी.

इसे देखो ज़रा विन्डोस की इन्स्टालेशन वगैरह कर देना।अब्बू ने पैकेट से लैपटॉप निकाला और मेरी तरफ बढ़ा दिया।मैंने लैपटॉप को बड़े गौर से देखते हुए कहा- ये कितने तक का मिला है अब्बू?‘वो इहतिशाम ने दुबई से ला दिया है. पर मैंने उसे नहीं बताया।मेरे कुछ दोस्त मुझे बहुत अच्छे से जानते हैं.

यार तुम इतना नेगेटिव क्यों सोचती हो?तो वो बोली- बस ऐसे ही।मैंने फिर से उसकी बातों पर ज़ोर दिया और बोला- शायद अभी तक मैं तुम्हारा इतना अच्छा दोस्त नहीं बन सका कि तुम मुझसे अपनी बातें शेयर करो।दोस्तो. लण्ड से वीर्य की धार छोड़ कर झड़ने लगा।हम दोनों एक-दूसरे को बाँहों में लिए काफी देर तक पड़े रहे।आप लोग अपनी राय मुझे मेल करें तो मुझे अच्छा लगेगा।[emailprotected]. मैं तुम्हारी रग-रग से वाक़िफ़ हूँ। मैं जानती हूँ तुम्हारे खबीस दिमाग में क्या चल रहा है।मैंने झेंपते हुए अपने सिर को खुज़ाया और नज़र झुका कर मुस्कुरा दिया। फिर फ़ौरन ही नज़र उठाई और आपी से बोला- आपी यह तो इत्तिफ़ाक़न ही बहुत अच्छा मौका बन गया है, किसी तरह राज़ी कर लो हनी को भी.

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और इसको एक्सपर्ट बना कर तुम्हारे हवाले कर देती हूँ।उसके बाद मैं और फ़रज़ाना बिस्तर पर आ गए।फ्रेंड्स, इसके बाद तो वही सब हुआ जो आप अन्य कहानियों में पढ़ते हो।[emailprotected].

पर फ़िर आंटी से बाथरूम के बारे में पूछा।उन्होंने बताया और मैं उठ कर बाथरूम में चला गया।मैंने जानबूझ कर बाथरूम का दरवाजा पूरा नहीं बन्द किया और मुठ मारने लगा।मुझे पता था कि आंटी मेरे पीछे खड़ी हैं और देख रही हैं।मैं मुठ मारता-मारता जानबूझ कर आंटी की तरफ़ घूमा और ऐसे नाटक करने लगा. अब ये चूत तुम्हारी ही है। इसे जब चाहे जैसे चाहे चोदते रहना। बस हमेशा मुझे चोदते ही रहना. इसलिए मना नहीं कर पाईं और झुक गईं।मैंने फटाफट अपना लिंग उनकी चूत की गहराइयों में उतार दिया व दोनों हाथों से उनकी चूचियाँ मसलने लगा और धक्के लगाने लगा।भाभी को भी मजा आ रहा था, वो मेरा पूरा साथ दे रही थीं।मैं पूरी स्पीड से उन्हें चोद रहा था और वो कामुक आवाजें निकाल रही थीं। थोड़ी ही देर में उनका झरना बह निकला।भाभी- राज अब बस.

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मगर प्रवेश द्वार से दूर था और मुझे तो पता भी नहीं था कि योनि में प्रवेश द्वार कहाँ पर होता है. जो दीवार की साइड पर छुप कर खड़ी हुई थीं।आपी ने इस वक़्त सफ़ेद चिकन की फ्रॉक और सफ़ेद रेशमी चूड़ीदार पजामा पहना हुआ था. तो मैंने नज़र उठा कर आपी के चेहरे की तरफ देखा तो वो खिलखिला कर हँस पड़ीं, उनकी आँखों में इस वक़्त शदीद शरारत नाच रही थी।आपी को हँसता देख कर मैंने कुछ कहने के लिए मुँह खोला ही था कि आपी हँसी को ज़बरदस्ती रोकते हो बोलीं- अच्छा अच्छा सॉरी.

’ कहते हुए उन्होंने कप थोड़ा एक तरफ झुकाया और चम्मच भरके मेरी मुँह की तरफ कर दिया।उन्होंने भी मेरी चूत का रस पिया था. मेरी तरफ क्या देख रहे हो।मैं आपी की बात सुन कर एक बार फिर हँसा और कहा- अच्छा मेरी तरफ देखो तो सही ना. जो मैंने दोबारा अन्दर डाल दिया है।आपी की चूत में मेरा लण्ड दो इंच चला गया था, मैं कोशिश कर रहा था कि डिल्डो वाला रिदम कायम रखते हुए ही अपना लण्ड अन्दर-बाहर करता रहूँ।बहुत अजीब सी सिचुयेशन थी.

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तुम्हारी आपी की चूत के जूस के चंद क़तरे हाज़िर हैं।आपी के इस अंदाज़ ने मेरे मूड की सारी खराबी को गायब कर दिया और बेसाख्ता ही मुझे हँसी आ गई।मैंने आपी को अपनी तरफ खींच कर उनको सीने से लगाया और अपने बाजुओं में भींचते हुए कहा- आई लव यू आपी. कमाल की आइटम थी वो।लिफ्ट में उससे मेरी कोई बातचीत नहीं हुई।मैं अपने काम से चला गया।फिर जब मैं वापस फ्लैट पर आया तो देखा वही औरत अपने पति के साथ कहीं जा रही थी। उन दोनों की बातों से लग रहा था कि वो पति-पत्नी हैं।उस औरत ने फिर मुझे देखा।मैं बहुत खुश हुआ कि यह औरत मेरे बगल के फ्लैट की ही है।फिर कुछ दिन यूं ही बीत गए और एक दिन किसी ने फ्लैट पर दस्तक दी.

पर वो जो भी था, बस टॉयलेट जाने आया था। थोड़ी देर बाद वो चला गया और हमने फ़िर से अपनी मस्ती शुरू कर दी।हम दोनों फ़िर से एक हो गए और एक-दूसरे को बहुत लिप-किस करने लगे।अभी भी बहुत तेज़ बारिश हो रही थी।तभी उसे प्यास लगी. मैं एक चुम्मा उछालती हुई और गुप्ता को आँख मारती हुई चली गई।जब आई तो सिर्फ पैंटी में थी और हाथ में एक ट्रे थी. मुझे ये जॉब नहीं चाहिए।मुझे अंदाजा नहीं था कि अर्श का जवाब यह होगा।जॉब तो मैंने उसकी योग्यता के आधार पर ही दी थी परन्तु उसका यह जवाब सुन कर एक बार मुझे झटका सा लगा क्योंकि मैं कोई ऐसा-वैसा आदमी तो नहीं हूँ.

तो मैंने कुछ कंप्यूटर कोर्स करने का सोचा।मैंने अपने घर के पास एक इंस्टिट्यूट का नाम सुना था. क्योंकि मैं जानता था वाइग्रा खाई हुई लड़की को संतुष्ट करना एक साधारण लण्ड के बस की बात नहीं होती है।हम दोनों अब एक-दूसरे के अंगों से खेल रहे थे।फिर मैंने देर ने करते उसे पीठ के बल लिटा कर उसकी दोनों टांगों को चौड़ाई में फैला दिया।मेरी आँखों के सामने दो घाटियों के मध्य का रमणीय स्थल था. नहा रहा हूँ थोड़ा टाइम तो लगेगा ही ना।मैंने फरहान की बात का कोई जवाब नहीं दिया और नीचे कामन बाथरूम के लिए चल दिया।मैं बाथरूम के पास पहुँचा ही था कि आपी के कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला देखकर रुक गया और अन्दर देखा तो आपी चादर.

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इस बात के लिए मत परेशान हो कि तुम मेरे साथ अकेली हो और मैं तुम्हारे साथ कुछ कर दूँगा। तुम मेरी जिम्मेदारी हो और मैं उसको बखूबी निभाऊँगा।मेरी इस बात का असर तुरंत हुआ, वो हल्के से मुस्कराई और मेरी तरफ देख कर बोली- मैं जानती हूँ।जहाँ तक मेरा मन था. तो थोड़ा सा धक्का लग गया।इतना सुनते ही वह बोली- अच्छा तो यह बात तो ठीक है कि भीड़ की वजह से धक्का लग जाता है. तो उनको मालूम नहीं था कि मेरा हाथ कहाँ है।मैंने धीरे-धीरे उनके चूचे को सहलाना चालू किया। थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि वो नींद से जाग गई हैं.

हम सब आगे बस स्टॉप पर उतर जायेंगे और तेरे भैया को बता देना कि गलती से उतर गई. ’ मेरे मुँह से निकल गया।वो भी आवाज़ करते-करते मेरा लण्ड चूस रही थी, मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था।फ़िर मैंने उसको खड़ा किया और उसके नंगे चूचों को चूसने लगा और मैं हल्के से उनको काट भी रहा था। उसे यह बहुत अच्छा लग रहा था- और ज़ोर से चूस मेरे राजा और ज़ोर से काट निप्पल को. नवरत्न कूपन रिजल्टमगर फिर भी मौका लगते ही वो जबरदस्ती मेरे साथ सम्बन्ध बना ही लेते थे और मैं कुछ भी नहीं कर पाती।करीब दो महीने बाद महेश जी को कम्पनी की तरफ से घर मिल गया और वो अपने बीवी-बच्चों के साथ उस घर में रहने लगे.

जिसमें से रास्ते पर आने-जाने वाले लोग दिखते थे, मैंने दीदी को वह खिड़की पकड़ कर झुका दिया। अब उनकी मोटी गांड ठीक मेरे सामने थी।मैं लंड डालने ही वाला था कि वो पीछे मुड़ीं और बोलीं- ला तेरे लंड पर थूक लगाती हूँ.

तो कहाँ तक जा सकती हूँ।फिर मुझे आँख मार कर मेरा दायाँ हाथ पकड़ा और अपने सीने के उभार से उठा कर नीचे की तरफ़ ले गईं और अपनी चूत के दाने पर रखती हुई बोलीं- खैर छोड़ो बातें. उसके लण्ड को मैं अपने हाथ से ही सहला रही थी।वो बोला- मुँह में ले लो न!मैंने मना किया.

इसलिए आंटी ने जिम पहुंचते ही मुझे तिरछी नजर से देखते हुए स्माईल दी और अन्दर चली गईं।मुझे आंटी से बात करनी थी. फिर अगले दिन मैंने खुद को अच्छे से तैयार किया और अपने को पूरा साफ किया। आप लोग ‘साफ करना’ मतलब तो समझ ही गए होंगे. देखो हमारी-तुम्हारी जोड़ी कितनी अच्छी लग रही है।पायल ने धीरे से नशीली आँखों को खोल कर देखा और शर्माते हुए घूम कर मेरे सीने में अपना सर छुपा लिया.

पूरे टॉयलेट में सिर्फ़ हमारे चुदने की ही आवाज़ गूंज रही थी।मैं- अब मैं कंट्रोल नहीं कर सकता आईशा.

मैंने उसके गले पर किस किया और फिर उसके होंठों को अपने होंठ का स्पर्श किया।मैं कुछ आगे करता. और लौड़ा उसकी चूत में डाल कर दस शॉट में उसकी चूत को अपने पानी से भर दिया और उसके ऊपर ढेर हो गया।मैंने उससे कहा- मुझे इस बात का हमेशा दुःख रहेगा कि तुम मेरी बीवी नहीं हो. कंधों पर और सीने पर चूमते रहे।मेरा यार वैशाली के स्तनों को सहलाता और दबाता रहा, फिर वो धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ता गया, उसके पेट और नाभि पर चूमने लगा, उसकी जांघों के बीच अपना मुँह डाल कर चूमने लगा।फिर वैशाली ने अपने दोनों पैर फैला दिए.

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जो दीवार की साइड पर छुप कर खड़ी हुई थीं।आपी ने इस वक़्त सफ़ेद चिकन की फ्रॉक और सफ़ेद रेशमी चूड़ीदार पजामा पहना हुआ था. अब सीत्कार करने की बारी उसकी थी।इस तरह पहले हम दोनों एक-दूसरे के साथ खूब खेले।थोड़ी देर बार उसने मुझे अपने नीचे ले लिया और मेरी चूत में धीरे-धीरे लण्ड डालना शुरू कर दिया।मैंने पहले बहुत बार चुदाई की थी और बहुत दिन से प्यासी भी थी, मैंने अपनी गाण्ड उठा कर उसे जल्दी-जल्दी चुदाई करने का इशारा किया. उसके घर में मैं टीवी देखने जाया करता हूँ।दोस्त की शादी के अभी दो साल ही हुए थे, उसकी बीवी बहुत मस्त है.

तुमने क्यों देखा और ‘वेट’ क्यों लिखा। वो भी मैं सबको बताऊँगा।इतना कहते ही वो फटाक से नीचे चली गई।मैं नहीं जा पाया. लेकिन कुछ बोलती नहीं थीं।इसी तरह हम दोनों के बीच की दूरियाँ थोड़ी कम हो गई थीं। एक दिन मैंने उनके कमरे में एक कन्डोम का पैकेट देखा. मैंने भी आपी की कही पहले की बात का कोई जवाब नहीं दिया और उनकी चूत के दाने को अपनी उंगली से सहलाता हुआ अपना लण्ड उनकी रानों में रगड़ने लगा।आपी की रानें बहुत चिकनी थीं।मेरे लण्ड का ऊपरी हिस्सा.

नहीं तो मैं तेरी गाण्ड मार दूँगी।यह बोलती हुई अर्श बहुत ज्यादा जोर-जोर से आहें भर रही थी।मुझे इतनी उम्मीद नहीं थी अर्श से. पता ही नहीं चला और हम दोनों मजे से चुम्बन का मजा लेने लगे।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मैंने उसको कसके पकड़ लिया. और लेफ्ट साइड पर गाड़ी खड़ी करने के लिए गैरज है। गैरज के अन्दर वाले सिरे पर ही मोटर लगी हुई है और गैरज के बाहर वाले सिरे पर तो ज़ाहिर है हमारे घर का मेन गेट ही है।मैं मोटर का बटन ऑन करके मुड़ा ही था कि आपी ने मेरा हाथ पकड़ कर झटका दिया और अपने दोनों हाथ अपनी कमर पर रख कर बोलीं- ये क्या ड्रामा है सगीर.

आज आपको मेरी कैसे याद आ गई? आज आपकी सेक्रेटरी कहाँ चली गई?मैं कुछ नहीं बोला और फिर लण्ड को धीरे से एक और झटका मारा. अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार।मेरा नाम अमित है, मैं बिहार का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 22 साल है.

?अब्बू ने अपना चश्मा उतार कर टेबल पर रखा और मेरी तरफ घूम कर बोले- हाँ वो ही.

तो चार बज रहे थे, मैंने देखा कि रोहन आलोक के साथ सोया हुआ था।थोड़ी देर बाद मेरी बेटी अन्नू भी स्कूल से आ गई, मैंने सबके लिए चाय बनाई और हम सबने चाय पी।अन्नू उठकर अपने रूम में चली गई।मुझे ऐसा लग रहा था कि आज इस सूट के कारण आलोक के साथ रोहन भी मुझे ताड़ रहा था. औरत की डिलीवरीऐसा तो तेरा दोस्त भी नहीं करता है।उसे और मुझे भी बहुत मजा आ रहा था क्योंकि मैंने चूत पहली बार देखी थी।वो पूरी नंगी थी।पहली बार ऐसी नंगी लड़की को देख कर मेरा लंड जो सो रहा था. सेक्सी वीडियो अंग्रेजी कीआज मैं तुम्हें एक लड़की से औरत बना दूँगा। अब ले मेरा लौड़ा अपनी नरम चूत में।आईशा- हाँ दो मेरे राजा. लेकिन वो मादरचोद नहीं समझा।मैंने बोला- माँ के लौड़े देख नहीं रहे हो.

कि आज तक इस दुनिया के साइन्सदान इस दर्जे की लचक किसी चीज़ में नहीं पैदा कर सके हैं।कुछ ही देर में आपी का जिस्म अकड़ना शुरू हो गया और आपी के हाथ की हरकत फरहान के लण्ड पर बहुत तेज हो गई।मुझे अंदाज़ा हो गया था कि आपी की चूत अपना रस बहाने को तैयार है।मैंने आपी की चूत के दाने को अपने दाँतों में पकड़ा और उंगलियों को तेज-तेज अन्दर-बाहर करने लगा.

दोस्तो, आज मैं आप लोगों को ये बताऊँगा कि कैसे मैंने अपनी सेक्सी नौकरानी को चोद दिया।बात उस समय की है. पहले देख तो लेने दे कैसा होता है ये।थोड़ी देर में उसने फिर हँसना शुरू कर दिया। फिर मेरे कुछ पूछने से पहले ही बोली- यार ये तो तेरा तीन रंग का है. ’ आपी ने ये कहते हुए मेरे बाल छोड़े और हँसते हुए सोफे पर बैठने के लिए जैसे ही उन्होंने पीठ मेरी तरफ की.

वो आएंगी तो मैं उन्हें दे दूँगी।मैंने उसे पैसे दे दिए, वो फिर मुस्कुराकर अन्दर चली गई।उस दिन उसका चेहरा बार-बार मेरे दिमाग में आ रहा था।एक शाम को जब मैं छत पर गया. मगर फ़िर भी मैं पूछने के लिए भाभी के पास किचन में चला गया।भाभी ने बताया- इतना सामान कमरे में नहीं आएगा. ’यह कह कर मैंने मौसी की चूत के रस में सना हुआ लण्ड पूरा बाहर खींच लिया और उनकी मोटी-मोटी चूचियाँ पकड़ कर एक बहुत ही ज़ोर का धक्का लगा दिया। इस बार मेरा मूसल लाली मौसी की चूत को बड़ी बेरहमी से चीरता हुआ पूरा जड़ तक अन्दर समा गया।मेरे सांड जैसे बड़े-बड़े टट्टे मौसी के ऊपर की ओर उठे हुए विशाल चूतड़ों से चिपक गए और गाण्ड के छेद में गुदगुदी करने लगे।‘आआईयईईईईई.

भगवान की सेक्सी फोटो

तो सिर्फ इतना जो नंगी घूमते देखो तो हिलता हुआ पता चलता था।चूतड़ भी सेक्सी मॉडल्स जैसे उभरे नहीं थे. दोस्तो, मेरा नाम आदित्य है। मैं यूपी का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र बाइस वर्ष है। मैं पेशे से अध्यापक हूँ। मैं छः साल से अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मैं अपनी आपबीती पहली कहानी के रूप में लिख रहा हूँ।मैं देखने में तो औसत हूँ. तो एक नया हुस्न उभर आया है।आपी ने भी आगे बढ़ कर मेरे गाल को चूमा और नाराज़ से अंदाज़ में बोलीं- तुम्हारे ही लिए लगाया था काजल.

आपी को मैंने एक बार गाली देते हुए ‘बहनचोद’ कहा था और आपी ने आज मुझे बहनचोद बना कर अपना बदला ले लिया था।अब आगे.

जिनके निप्पल साफ उठे हुए दिख रहे थे।उसने मेरी तरफ देख कर स्माइल की.

लेकिन ऐसा मज़ा कहीं नहीं है।फिर मैंने उसे मेरा लंड चूसने को बोला लेकिन उसने मना कर दिया, मैंने भी फोर्स नहीं किया।मैंने सोचा अब तो मौका हाथ में आ ही गया है. लेकिन अपनी स्पीड को बढ़ने ना दिया।मेरा लण्ड जब बाहर निकालता तो आपी अपने जिस्म को ज़रा ढील देतीं और जब मैं वापस लण्ड अन्दर पेलता तो उनके जिस्म में मामूली सा तनाव पैदा होता, आपी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ जाती. सेकसी बिहारइसलिए मैंने फ़िर सब कुछ बंद कर दिया और अपने हाथ वापिस ले लिए।वो मेरे और करीब आई और मेरी आँखों में आँखें डाल कर देखने लगी.

मैं आज भी अपनी मामी से उतना ही प्यार करता हूँ और आज उनका एक बच्चा भी है. उसका लंड मेरी गांड के छेद के पर आकर अटक जा रहा था क्योंकि मैंने अपनी गांड बहुत टाईट कर ली थी।लेकिन वो जोर लगाए जा रहा और लंड अपना रास्ता बनाने ही वाला था कि मैंने जोर-जोर से उससे मिन्नत करना शुरु कर दिया- छोड़ दो मुझे. रामपाल एक रईस आदमी है।छाया गुस्से से बोली- तो तुम कर लो उससे शादी!‘हा हा हा…’छाया बहुत गुस्से में बोली- मुझे उस बुड्डे से शादी नहीं करना है.

उनको ज्यादा जरूरत होगी। आज कल वैसे भी आपी थीसिस लिख रही हैं।‘अरे हाँ भाई रूही. मैंने अपने फौलादी लण्ड का सुपारा मौसी की खुली हुई चूत के मुँह पर टिका दिया और धीरे-धीरे दोनों फांकों के बीच में रगड़ने लगा। मौसी से अब और सहन नहीं हो रहा था।‘इसस्स्स्स्स्.

लेकिन अगले ही पल उसने अपनी मज़बूत बाँहों में शब्बो को जकड़ लिया और रश्मि की ओर देखते हुए अपने चोदने की रफ़्तार बढ़ा दी।पगलाई शब्बो भी अपने नितम्ब उछाल-उछाल कर राजू का साथ दे रही थी। उसकी सिसकारियाँ अब मिन्नतों में बदल रही थीं- आऽऽऽह.

’ की आवाज के साथ एक-दूसरे के साथ कंप्लीट भी हो जाते। इस फोन सेक्स के कारण मैं अपने पूरे कमरे में अपने वीर्य का छिड़काव कर चुका हूँ।यह थी मेरी पहली सेक्स स्टोरी. फिर आपी मुझसे अलग हुईं और दीवार से क़मर लगा कर अपनी फ्रॉक का दामन सामने से उठाया और कहा- चलो अब अपना इनाम ले लो।मैंने हँस कर आपी को देखा और नीचे बैठ कर उनके पजामे के ऊपर से टाँगों के दरमियान अपना मुँह दबा लिया।आपी की चूत की खुशबू को अपने अंग-अंग में बसने के बाद मैंने मुँह पीछे किया और आपी के पजामे को उतारने के लिए हाथ फँसाए ही थे कि आपी ने मेरे हाथों को पकड़ लिया और कहा- आहहनन्न. तो क्यों नहीं आऊंगा।मैंने शिकायत करते हुए कहा।मंजू- अच्छा तो ऐसी बात है.

इंडियन सेक्सी पिक्चर ओपन ’ जैसी आवाजें निकाल रही थी।यह सुन कर भाई को और जोश चढ़ गया, भाई ने अपना आधा लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाला और फिर एक जोरदार धक्के से अपना पूरा लण्ड फिर से मेरी चूत में पेल दिया।मैं इतने जोरदार धक्के के लिए तैयार नहीं थी।जब भैया का लण्ड मेरी चूत की जड़ तक गया. पर मुझे याद है आपको चूत पर झाँटें पसंद हैं।फिर मैं उसके ऊपर लेट कर उसके निप्पलों के साथ खेलने लगा, अब मुझे भी काफी तज़ुर्बा हो गया था।जब उसने मेरा लण्ड पकड़ा.

मेरा बायाँ गाल आपी के सीने के दोनों उभारों के दरमियान में था।आपी ने अपनी टाँगों को अभी भी उसी तरह मेरी कमर पर क्रॉस कर रखा था. आपी ने सलवार पहन ली थी और अब अपनी क़मीज़ में अपने दोनों हाथ डाले और उसे अपने सिर से गुजार कर गर्दन पर लाते हुए बोलीं- उस दिन रात को भी जब मैं कमरे में गई. तो आपी अपनी सलवार पहन चुकी थीं और अब क़मीज़ पहन रही थीं।मैंने आपी को देख कर कहा- आपी वो कार्पेट पर खून के धब्बे हैं यार वो.

பாவனா செஸ் வீடியோ

मेरे सो जाने के बाद आपने आपी के साथ क्या-क्या किया था?मैंने जान छुड़ाने के लिए फरहान से कहा- यार छोड़. वो इतना गरम हो गई थीं कि उन्होंने मेरा लण्ड कसके पकड़ लिया और आगे-पीछे करने लगीं।मेरा लण्ड भी एकदम टाइट हो गया था। मैंने भी साथ-साथ उनकी चूचियों के दानों को मसलना चालू कर दिया और ज़ोर से उनकी चूचियाँ चूसने लगा।उनकी चूचियाँ एकदम टाइट हो गई थीं और उनके निप्पल तन गए थे।तभी वो एक झटके से उठीं और उन्होंने मेरा लण्ड चूसना चालू कर दिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं।मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था. तुमसे मिले बिना कभी नहीं जाऊंगा।उसने मुझे चूम लिया।मैंने उससे पूछा- पूजा बताओ सबसे अच्छा क्या लगा?तो वो बोली- सब बहुत मजेदार था।मैंने कहा- सबसे ज्यादा मज़ा किसमें आया।वो कहने लगी- जब आपने मेरी चूत और मेरा दाना चूसा तब.

मैंने पीछे से उसकी चूत में लण्ड घुसाया और उसकी पतली कमर पकड़ कर धक्के लगाने लगा।वो मज़े लेते हुए अनाप-शनाप बोल रही थी- आह्ह. उनके चेहरे पर मेरे लिए गहरे सुकून और शदीद मुहब्बत के आसार थे।आपी ने फ़िक्र मंदी से कहा- सगीर क्या हालत हो जाती है तुम्हारी.

’ आपी के संजीदा लहजे में कोई फ़र्क़ नहीं आया था।मैंने कहा- आपी ठीक है कि आप मेरी बहन हो.

नहीं तो दो महीने कॉलेज ना जाने पर उसकी पढ़ाई खराब हो जाएगी।इस पर पापा ने भी सहमति दे दी।मेरा अकेले जाने का दिल तो नहीं कर रहा था. ना ही मेरा ऐसा कभी मन हुआ। मगर बाबा जी का व्यवहार मुझे डरा रहा था।पहले तो मैंने कुछ चम्म्च बिना ज्यादा देर मुँह मेरे रखे निगल लिए. पर मैं सिर्फ भाभी से ही बात कर रहा था।थोड़ी देर में आरती बोली- मुझे भी नींद आ रही है.

मेरे रोने से पूरा कमरा गूंज उठा था। लेकिन मैं चुदना भी चाह रही थी।बाबा जी गुस्से से बोले- चुप कर माँ की लौड़ी. पीरियड निकलते हैं यहाँ से।मैंने कहा- तो?फिर वो कुछ न बोली और भाई जो इस बार चाटी तो कामना सिसकारियों पर सिसकारियाँ भरती रही।मैंने कहा- यार तू अपनी कमर के नीचे तकिया रख ले. मैं कुछ बोलता तभी किसी ने उसके घर की घंटी बजाई और मैं जल्दी से अपने कमरे में चला गया।थोड़ी देर बाद मैंने बहुत कोशिश की.

गरदन और छाती के ऊपर भी चूमने लगा था।वैशाली भी उसे इसी तरह चूम रही थी और चाट रही थी और उसके सीने पर हल्के से अपने दाँतों से काट भी रही थी, उसकी सिसकारियों की आवाजें और भी उत्तेजना जगा रही थीं।तभी बृजेश वैशाली के स्तनों को दबा कर उसकी ब्रा खोलने लगा.

बीएफ मां की चुदाई: पर मैं अभी भी अपने घुटनों पर खड़ी हुई थी और आलोक मुझसे किसी सांप की तरह लिपटा हुआ था।मैंने रोते हुए आलोक से बोला- तूने तो मुझे मार ही डाला।पर मेरे इतना बोलते ही उसने एक बहुत जोरदार धक्के के साथ अपने पूरे लण्ड को मेरी गाण्ड में उतार दिया। मैं उससे भागने के लिए इधर-उधर हाथ-पैर मारने लगी. वो मजे करने के बाद सारी बातें उड़ा देते हैं।मैं- मैं ऐसा नहीं हूँ। मैं हर बात को गुप्त रखता हूँ.

फिर जल्दी ही मैंने दो उंगलियाँ डाल दीं।नेहा की मस्त आहें निकलने लगीं- ओओह्ह्ह. मैं भी तेज-तेज झटके मारने लगा, भाभी का पानी निकलने को हो गया था।तभी मैं भी बोला- मेरा भी निकलने वाला है।वो बोलीं- मेरे राजा मेरी चूत में ही छोड़ देना. ’ करने लगी, उसने मेरे हाथ पर पानी छोड़ दिया।अब मैं भी पागल हुए जा रहा था।मैंने देर न करते हुए उसे सीधा लिटा कर उसकी गांड के नीचे तकिया लगा कर जो अपना लण्ड उसकी चूत में डाला.

मैं आपके लिए पानी लाती हूँ।मैंने उन्हें छोड़ दिया और वो रसोई में चली गईं।जब वो आईं.

तुम पागल हो क्या? अगर कहीं किसी ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी।सिमरन- कोई नहीं देखेगा. मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ तुम्हें बहुत चाहता हूँ। मैं यह भी जानता हूँ कि तुम मेरी चाहत से अन्जान नहीं हो। मैं तुम्हारा दीवाना हो चुका हूँ। मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ. तुम्हारी चूत ने तो पूरा लण्ड खा लिया है!‘तुमने इतनी बेरहमी से अन्दर जो पेल दिया.