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थोड़ी देर बाद महेश ने मुझे सीधा किया और मेरे पैरों को मोड़ कर बीच में बैठ गया.अगले दिन मैंने ठान लिया था कि आज चाहे जो भी हो, मैं उससे माफी लेकर ही रहूँगा.

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दोनों ने एक दूसरे को रगड़ रगड़ के साफ किया और बेड पे आकर एक दूसरे से चिपक कर बातें करने लगे.लड़की के बारे में बता दूँ… वो दिखने में तो कुछ खास नहीं थी, बस ठीक ठाक थी.

दोनों चुदाई के बाद फ्रेश हो कर बाहर आए तो कौमुदी और कुणाल बाहर एक दूसरे आगोश में दिखे. बीएफ बीपी बीपी बीपी आओ ना…” प्रिया की गुहार सुन कर मैं बेखुदी के आलम से वापिस पलटा। मैंने बहुत ही नाज़ुकता से प्रिया को अपनी गोदी में बिठा कर आगे-पीछे हिलना शुरू कर दिया.

मैंने उसे लिटा दिया और उसकी ओढ़नी से उसके हाथों को बेड से बाँध दिया और उसकी बुर में उंगली करनी चालू कर दिया.

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मेरे फोन में मेरी एक जुगाड़ की फोटो थी, वो बहुत सेक्सी चालू खाऊ पीऊ माल थी, मेरे दिमाग में एक आइडिया आया. इसके बाद वो नताशा के गले में पड़े गुलाबी रंग के मखमली स्कार्फ को पकड़ कर उसके गर्भाशय में अपने लंड को घुमाने लगा, और दोबारा अपना अंगूठा उसके मुंह में घुसेड़ दिया. चूंकि निर्मला को डॉगी स्टाइल पसंद था तो उनकी चूत पर पीछे से लंड सैट करके डाला, तो आराम से अन्दर घुस गया.

तो उसने भी कहा कि वो कल सुबह आएगा।मुझे लगा कि मैं टैक्सी बुला कर घर चला जाऊँ. मैं भी अपनी सारी हदें तोड़ने के लिए बेकरार था, बस उस तौलिया की सरहद मुझे उनसे दूर किए हुए थी. मैं धीरे धीरे अपने कूल्हे हिला कर कविता की चुत चुदाई करने लगा, मुझे दर्द के४ साथ मजा आ रहा था, मेरे मन में खुशी का कोई पारावार नहीं था क्योंक इमें पहली बार चुत चुदाई कर रहा था और वो भी शायद एक कमसिन कुंवारी चुत की…कविता भी दर्द के कारण कराह रही थी, मैं उसे धीरे धीरे चोद रहा था.

रात में सारे सीनियर लड़कों ने हम लोगों को बुलाया और इंट्रो लेना स्टार्ट किया. तभी मेरे बेटे के क़दमों की आहट सुनाई दी, वो मेरा बैग वगैरह ले के आ रहा था. शर्म के मारे भाभी एक हाथ से अपना चेहरा और एक हाथ से अपने उभारों को ढकने की नाकाम कोशिश करने लगीं.

सो मैंने अपने लंड को पूरा बाहर निकाला और निशाना लगाते हुए पूरे जोर से उसकी चूत में घुसा दिया. तब तक उसने मेरा लंड ऊपर से ही सहलाया, फिर उसने मेरी पैंट निकाल दी और उसके बाद मेरी शर्ट निकाली।जैसे ही उसने मेरा कच्छा निकाला, उसने झट से मेरा लंड मुँह में भर लिया और पागलों की तरह चूसने लगी.

फिर मैंने उसे गोद में उठाया और बेड पर लिटाकर पहले उसके माथे पे किस किया, फिर होंठों पर.

पांच दस मिनट किस कर कर मैंने उसे कहा- अब तुम्हारी बारी, मुझे किस करो…वो भी मुझे किस करने लगी.

तो वो कहने लगीं- बस अब क्या मुझे मार ही डालोगे?मैं बोला- मेरी मलिका. मैंने अपने दोस्त की बाइक ली और उसके कॉलेज के सामने जाकर उसको कॉल किया, वो कॉलेज के बाहर आकर बाइक पर बैठ गई. दीदी ने पंजाबी सूट पहना हुआ था जो बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि दीदी का जिस्म भी शोभा दीदी की तरह भरा हुआ था, मोटी नहीं थी लेकिन स्लिम भी नहीं थी, बूब्स और गान्ड भी एकदममस्त थी, जैसे कोई 20-22 साल की पंजाबी लड़की होती है, एकदम गोरी चिट्टी और भरे हुए जिस्म की मालकिन!साला दिल किया कि अभी यही चोदना शुरू कर दूं.

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कमी है तो प्यार की, जो अब सिर्फ तुम दे सकते हो और मैं तुम्हारे इस एहसान का बदला कभी नहीं उतार पाऊँगी।मैं वहाँ से आ गया।उसके बाद जब भी मौका मिलता.

जब मैंने अन्तर्वासना पर इतनी सारी कहानियाँ पढ़ीं, तो मेरा भी मन किया कि मैं भी कुछ इन सब कहानियों से अनुभव लेकर अपनी कहानी भी लिखूँ. मैंने उसे टेबल से तेल लाकर दिया।मैंने अपनी गाण्ड को हाथों से खोला उसने काफी सारा तेल अन्दर तक डाल दिया, फिर लण्ड को छेद पर रखा. तो मेरा रक्तचाप बढ़ गया। उसने अपने मिनी शॉर्ट्स को पकड़ा और अपनी चिकनी टांगों से नीचे खींच दिया।नजारा देख कर मानो मेरा कलेजा हलक में आ गया। उसने शॉर्ट्स के नीचे पैंटी नहीं पहनी हुई थी। एकदम नंगी मधु मेरे सामने पीठ किए हुए खड़ी थी और मेरा लवड़ा फटा जा रहा था।तभी उसने अपनी गाण्ड को खुजाया और फिर सर झटकाते हुए बाथरूम में चली गई।मैं बेसुध सा खड़ा था.

मैंने फ़ौरन पीछे मुड़ कर देखा, पर मैं फिर लेट हो गई थी, संजय वहां नहीं था. रीना अभी भी रो रही थी पर मैं नहीं रुका और चुदाई करता रहा और कुछ मिनट बाद हम दोनों झड़ गए. थोड़ी देर तक चूची चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ उसके पेट में घुमानी चालू कर दी, जिससे उसे गुदगुदी होने लगी.

वे मोटर साईकिल पर थे, बोले- उधर कितनी देर रूकोगे?वह बोला- बस घूम कर आते हैं.

मेरी चाची ने खुद को काफ़ी मेंटेन किया हुआ है, उनका मस्त बदन की क्या बताऊं आपको. लड़के का नाम सुनील था, वो दिखने में बहुत कमज़ोर और काले रंग का था, उसका कद होगा कोई पांच फीट चार इंच… और लड़की का नाम मानवी था, वो दिखने में एकदम पटाखा माल थी.

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मैं अन्दर गई तो दिव्या कमेंट करने लगी- और मेरी छन्नो रानी मिल आईं अपने हमदम से.

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मार डाला तुम कमसिन उम्र के नए गांडू गांड मराने के इतने उस्ताद खिलाड़ी कैसे बन गए. उसके सामने ही खोला तो उसमें एक लेटेस्ट ब्रान्डेड वाच थी, मुझे भी घड़ियों का काफी शौक है, इसलिए मुझे काफी पसंद आई. और दूसरी मेल में उसने अपने बारे में बताया था कि मेरा नाम आरती (बदला हुआ नाम) है, मैं ग़ाज़ियाबाद से हूँ और मैं शादीशुदा महिला हूँ.

मैं सिर्फ सुबह जाकर काम करके घूमने निकलता और सैंडी के घर में जा बैठता. फिगर का नाप कितना है, वो तो मैंने कभी टेप लेकर मापा नहीं है, पर ले देकर कहा जाए तो वो बहुत खूबसूरत है. अब तो आलम ये हो गया था कि ममता हो न हो, मैं उसका नाम लेकर मुठ मारने लगा.

मैंने कहा- बेटा, तुम ही निकाल दो!रोहण ने मेरी पैंटी निकाल दी और फिर उसने अपना एक हाथ मेरी चूत पर रखा मेरी तो मुख से आह निकल गयी.

कुणाल ने मेरी माँ से कह दिया कि आंटी आज रवि दोपहर को घर खाना खाने नहीं आएगा, हो सका तो हम कल सुबह घर वापिस आएंगे. तभी मेरी नज़र दूल्हे पे गई और उसके साथ खड़ी एक लेडी पर मेरी नजर टिक गई. नाभि में जीभ घुमाते हुए मैं अपने हाथ उनकी कमर पर बंधी साड़ी की गांठ पर ले आया और ज़ोर से उनकी साड़ी की गांठ को पकड़ कर खींचा तो साड़ी एक झटके के खुलकर नीचे गिर गई.

मुझे शरारत सूझी तो मैंने अपने बाल सही किए, अपने कपड़े सही किए और अपने टॉप के बटन को खोल दिया. विवेक ने कामिनी को ऊपर खींच लिया और उसको पूरे बदन में किस करने लगा, मम्मे बुरी तरह से मसलने लगा. तो मेरे मन में आया कि क्यों ना वीडियो बना लूं… तो मैं मोबाइल निकाल कर माँ की वीडियो बनाने लगा.

[emailprotected]कहानी का तीसरा भाग :सेक्स कहानी प्यार में दगाबाजी की-3. कॉलेज में जब किसी कपल को साथ घूमते देखता था, तब तो मेरे जिस्म में एक आग जैसी लग जाती थी.

ये देख कर अंकित का जोश दुगना हो गया और अंकित नीचे से धक्के लगाने लगा. सुमित चहकते हुए बोला- अमित सर ने कहा है कि पेंटी में खुद उतारूं, नहीं तो वो आपकी पेंटी नहीं लेंगे. मैं भी घर से पूरा रेडी होकर निकल गया और होटल पहुंच कर रूम नंबर 5 का दरवाज़ा खटखटाया.

तो मम्मी ने मुझ से कहा- तू चला जा इसके साथ!मैं तो यहीं चाहता था पर मैंने कहा- मुझे मेरे थोड़ा सा काम है, आप ही जाओ.

कभी कभी गालों पर हाथ फेर देते, कभी पीठ पर हल्के से हाथ फेरते, कभी चूतड़ सहलाते. बाद में मेरे बिज़नेस की वजह से मैंने नया मकान लिया और हम दोनों वहीं शिफ्ट हो गए. दीदी की नज़र मेरे मूसल पर पड़ी तो वो फटी आँखों से मेरे मूसल को घूरने लगी, मैंने दीदी की अपने पास आने का इशारा किया पर वो मेरे लंड को ही घूरती रही, मैं खुद ही चल कर दीदी के पास चला गया.

अब तक उसकी कामुकता अपने पूर्ण चरम पर आ चुकी थी, वो अपने कूल्हे उचका उचका कर अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ने की कोशिश कर रही थी. वो भी मुझे अपने छोटे भाई की तरह मानने लगे और मैं भी उनको भैया कहकर संबोधित करने लगा.

यह मेरी पहली कहानी है, यह इंडियन सेक्स स्टोरी आपको पसंद आयी या नहीं, मुझे अपनी राय जरूर भेजें!मेरी ईमल आई डी है-[emailprotected]. मैं उसके होंठों और मम्मों को किस करने लगा ताकि उसका दर्द कुछ कम हो जाए. मैं कमल के धक्के बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, मेरे मुँह लगातार मादक सिसकारियां और आवाजें आ रही थीं ‘आआअहह.

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वो उठ कर घोड़ी बन गईं और मैंने भाभी की चूत पर अपना लंड रख कर जैसे ही धक्का दिया, मेरा लंड बड़े आराम से अन्दर चला गया.

उन्हें ऐसे देख कर मैं तो शरम के मारे इधर उधर देखने लगा, तो वो बोलीं- अब क्यों शर्मा रहा है, देख ले मुझे. मैं भी डर के मारे दूर हो गई तो अवी ने कहा- डियर देखता हूँ मैं… तुम यहीं रहो, जब मैं कहूँ तब बाहर आना. मैंने सोचा इस बार बोल देता हूँ और हिम्मत करके कुछ करने की सोच ही रहा था कि फ़रवरी महीना स्टार्ट हो गया.

मैंने भी उसको दिखाने के लिए और जोर जोर से अपने लंड को सहलाने लगा और उसका नाम लेकर मुठ मारना जारी रखा. चाह कर भी उन गुंडों जैसे आदमियों को देख कुछ भी कर पाने की हिम्मत अपने में नहीं जुटा पा रहा था. तेलगू सेक्सी ऑंटीकिसी सड़क छाप बाजारू रंडी की तरह चुदवाने का पूरा पूरा आनद मिल रहा था मुझे।कुछ ही देर में मेरे नीचे वाले के धक्के तेज हो गए, उसने फटाक से मेरा एक निप्पल अपनी दांतों में पकड़ा और वहशी बन कर चूसने लगा.

जैसे ही चाची के कंधे से मैंने हाथ हटाया, दूसरे हाथ से मैंने अपना तौलिया गिरा दिया. तभी वह चिल्लाई- मैं झड़ने वाली हूँ!मैं बोला- हां झड़ जा… पर मेरा बाकी है.

कुछ देर बाद मैंने सोचा कि अब मेरी बहन चुदाई के लिए पूरी तरह तैयार है तो मैं अपना लोअर निकालने लगा. कहानी का पहला भाग :सेक्स कहानी प्यार में दगाबाजी की-1आपने अब तक पहा कि मेरा बॉयफ्रेंड मुझे अपने रूम में ले आया, उसके दोस्तों को भी इस बारे में पता था, वे भी हामरी जासूसी कर रहे थे और रूम के बाहर खिड़की से हम पर नजर रख रहे थे. अभी कुछ देर पहले जिस लड़की ने खुले आँगन में अपने प्रेमी को चुम्बन दिया था, अब अपने उसी प्रेमी से शरमा रही थी क्योंकि अब वो जानती थी कि आगे क्या होने वाला है.

फिर वो अपने लंड को मेरी चूत पर रगड़ने लगे और मेरे होंठों को अपने होंठों पर लेकर चूसने लगे।तभी मामा जी ने नीचे मेरी चूत पर अपने चूतड़ उछाल कर लंड से एक जोर का धक्का लगाया तो उनका आधा लंड मेरी बेचारी मासूम सी चूत की फांकों को अलग करता हुआ खून खराबे के साथ अन्दर जा चुका था. जब मुझको लगा कि उसका दर्द कुछ कम हुआ है, तो मैंने बहुत धीरे धीरे अपना लंड हिलाना शुरू किया ताकि उसकी चूत मेरा लंड खाने लायक चौड़ी हो जाए. बहूरानी ने बर्थ से उतर कर कूपे की लाइट जला दी; रोशनी में उसका किसी चुदासी औरत जैसा रूप लिए उसका हुस्न दमक उठा… कन्धों पर बिखरे बाल… गुलाबी प्यासी आँखें… तनी हुई चूचियाँ… चूचियों की घुन्डियाँ फूल कर अंगूर जैसी हो रहीं थीं और उसकी चूत से बहता रस जांघों को भिगोता हुआ घुटनों तक बह रहा था.

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मोहन लाल के इस राज का किसी को यहाँ पता नहीं था, क्योंकि उसकी पत्नी और ससुर पहले ही गुजर चुके थे. तो मुझे अपनी ओर देखते पाया। वो थोड़ी सी मुस्कराई और शर्म से आँखें झुका लीं।प्यासी जवानी की इस अदा ने मानो मुझ पर बिजली गिरा दी। मैंने उसे सीधा लिटा और गालों को चूमने लगा। मधु मुझे दूर करते हुए बोली- अब बस भी करो राज।मैं बोला- जान तुमसे अलग होने का दिल ही नहीं कर रहा।मधु ने मुझे अपनी बांहों ले लिया और बोली- मन तो मेरा भी नहीं कर रहा। लेकिन नीचे माँ जी इन्तजार कर रही होंगी। अब मुझे छोड़ो.

मैंने अपना एक पैर आगे बढ़ाया और अंगूठे से उसकी पैंटी अलग करके चूत को कुरेदने लगा. अब उसने मेरी ओर देखा और धीरे से उसके चेहरे को चादर के अन्दर ले लिया. मेरा तो मन कर रहा था कि काश इस समय वो मेरे सामने होती तो अपना पूरा लंड उसकी चूत में उतार देता और सारी रात उसकी चूत की गर्माहट महसूस करता.

दीदी ने आगे बढ़ कर कूलर को तेज़ कर दिया और बेड पर आकर लेट गई और मुझसे बोलीं- ऊपर बिस्तर पर आ जा. फिर वो मोना की जांघों को प्यार से चूम कर वापिस उसकी योनि के पास आ गया. लेकिन मैं आज आपको थैंक्यू कहने आई हूँ, क्योंकि आपने मेरी चूत फाड़ दी और आज मुझे अपनी मटर की लुल्ली दिख रही है.

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आओ अन्दर बैठो, अच्छी लग रही हो यार…अवी मस्त लग रहा था, मैंने भी कहा- तुम भी अच्छे लग रहे हो. उस वक्त फरवरी का महीना था, जब मैं यहां आया तब यहाँ पर कोई मेरे जान पहचान का नहीं था. यह मेरी इस साईट की पहली सेक्स स्टोरी है अगर कोई गलती हो जाए तो माफ़ी चाहता हूं.

कुछ देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी तो मैंने उसका हाथ छोड़ दिया और अपनी उंगली को ममता के बालों में फंसा कर उसके बालों को सहलाने लगा. अब मैं उसकी चूत में अपनी दो उंगली डाल के आगे पीछे कर रहा था, बार बार उसके दाने को मसल रहा था, वो उत्तेजना से सिसकारी ले रही थी. पंजाबी सेक्सी भोजपुरी वीडियोअमित- अगर मुझे माफ़ कर दिया है तो आज 4 बजे मेरे घर आ जाना और अपनी पार्टी ले लेना.

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उसके बाद से वो जब कॉलेज आती तो मैं उसे देखता रहता, उसने भी ये नोटिस किया। कॉलेज में अब मैं उससे थोड़ी बात भी करने लगा था। फिर मुझे लगा वो भी मुझे कुछ देखने लगी है. !भाभी- हां मेरे राजा, आज के बाद तू ही मुझे चोदेगा और मेरी प्यास बुझाएगा.

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जैसे ही भाभी झुकीं, मेरी नजर उनके मदमस्त कर देने वाले चूचों पर टिक गई.

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दोस्तो मैं बता नहीं सकता कि मधुर मिलन की कल्पना से ही मेरा रोम रोम रोमांचित हो रहा था और सच कहूँ तो मेरी फट भी रही थी क्योंकि किसी लड़की के घर जाकर उसे चोदना, ऐसा मेरे साथ पहली बार होने वाला था, पर मैं पूरे विश्वास से लबरेज था कि जो होगा सही होगा, कुछ दारू भी हिम्मत बढ़ा रही थी. मैंने उन्हें सीधा किया और उनकी ब्रा और पेंटी को पूरी तरह से हटाते हुए फेंक दिया, मैं बोला- डार्लिंग असली सरप्राइज़ तो तुम्हें मैं अब दूँगा. रवि क्या करना चाहते हो?मैं बोला- आधा खाना खिलाना ठीक है क्या?चल निकाल.

मेरे दिल में हलचल सी मची थी कि अब बरसों की प्यास कब बुझेगी और कब तन मन का मिलन पूरा होगा. मेरा लंड अपनी पूरी औकात में आ गया था यानि 6 इंच लंबा और खूब मोटा हो गया था. तुम अपने विश्वास के दोस्तों का ग्रुप बना लो। हमारी जैसी प्यासी औरतों की कमी नहीं है।मैंने सोचा ‘यार, ये काम भी ठीक है.

चुत की सम्भावना में तलाश जारी रहती और धीरे धीरे आराम से हर जगह अपनी सैटिंग कर ही लेता. हुआ यूं था की मेरे बेटे और बहू ने भी चुदाई का प्रोग्राम बनाया था और छत पर इसी कमरे में मिलने का बनाया था. उन्होंने लाल कलर की नाईटी पहनी थी और शायद उन्होंने नाईटी के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी.

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बहूरानी के जिस्म की सिहरन मुझे स्पष्ट महसूस हुई और उसकी बांहें मेरी गर्दन में कस के लिपट गयीं और उसने मुझे कस के अपने से लिपटा लिया. मैंने सोचा कल इसे मेरी वजह से डांट पड़ी है तो क्यों ना आज इसे बाहर कुछ अच्छा सा खिला कर खुश कर दिया जाए. चाची मेरे लंड का सारा माल पी गईं और उन्होंने मेरे लंड को चाटकर पूरा साफ कर दिया.

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अब 8 बजे बाद पायल का मैसेज आता है कि अब तुम आ सकते हो… घर का दरवाजा खुला है. कुछ देर बाद मैं रीना को कोठड़े में छोड़ बाजार से खाने का सामान लाने चला गया. मैंने बोला- भाभी मुझे कहाँ सोना है?तब उन्होंने बोला- इसी रूम में सो जाओ क्योंकि ए सी केवल बेडरूम में ही है और मुझे भी अकेले में डर लगता है.

निर्मला ने किस के बाद ही बोला- थैंक्स अतुल, बहुत अच्छा लगा मुझे!फिर मैं उनके मम्मों को चूसने लगा और वो मेरे लंड से खेलने लगीं.

मैं जैसे ही पलटा आंटी ने पैन्ट के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ लिया और ऊपर से ही हिलाने लगीं.

भयंकर धक्के लगाने की वजह से किड थोड़ी देर में थक कर निढाल हो सोफे पर जा बैठा जबकि उसकी जगह फ़ौरन ओमार ने ले ली. कुछ देर बातें करने के बाद हम दोबारा शुरू हो गए और अब हम 69 के पोज़ में आ गए. क्शक्शक्शक्शमैं वैसे लेट गई तो उसने दूसरी क्रीम निकाली और मेरी जाँघों से लेकर दोनों चूतड़ों में लगा दी और चूतड़ों को दबा दबा कर मालिश करने लगा.

ब्रायन मेरे मम्मों को चूस लो, निकाल दो मेरा जूस, मेरा दूध!”ला साली भोसड़ी की रांड, ला तेरी बेटी को चोदूँ, साली कुतिया यह देख तेरी मासूम बेटी कैसे मेरा लंड चूस रही है. फिर मैंने उनके लंड को पकड़ कर अपनी चूत छेद के बाहर टिकाया और दोनों पैर को फंसाते हुए चूतड़ उठाते हुए जोर से धक्का लगा दिया. इतने में ही अदिति भी चाय लेकर आ गई और हम तीनों ने हल्की फुल्की यहाँ वहाँ की बातें करते हुए चाय खत्म की.

जब मेरा दोस्त सुमन से मिलने जाता तो उसके साथ एक लड़की आती थी, जिसका नाम रिया (बदला हुआ नाम) था. उसी रात गांव में चोर आ गये, बड़ा हल्ला गुल्ला हुआ और दीक्षा अकेली थी तो वो डर गई.

मैं क्या कर सकती थी, मेरे प्यार ने मुझे उसकी कसम दी थी,मैं दर्द सहती गई, मेरे आंसू बहते रहे पर दो बरसों से चूत का भूखा वो अंकल धक्के मारता, मेरे पैर ऊँचे हो जाते, लंड मेरे पेट में आंतों को छूता.

तो उन्होंने कहा कि मेरे हाथ में दर्द बहुत है, मैं कपड़े नहीं पहन पाऊँगी, मैं तौलिया लपेट लेती हूँ. फिर कुछ दिन बाद घर के सभी लोग शादी के लिए बाहर गए, मैं इसलिए नहीं गया क्योंकि मेरे पैर में अभी भी थोड़ा सा घाव बाकी था और ज्यादा देर तक खड़ा नहीं रह सकता था. मैं समझ तो गया था कि दीदी ऐसा क्यों बोल रही हैं, तो मैंने भी बोल दिया- ये सब आपके साथ नहाने की वजह से हुआ है.

इंडिया का सेक्सी पिक्चर जब वो घर जाने लगा तो मेरे पास आया और बोला- जो हुआ सो भूल जाना और अपनी स्टडी पर ध्यान देना. वहाँ पहले मैंने उस पर पानी डाला फिर उस पर साबुन लगा कर लंड को रगड़ने लगी और पानी से लंड धो दिया.

यह सब कुछ क्षण भर में, सब घर वालों के सामने ही हुआ और किसी को भनक तक नहीं लगी. मैंने भी उनके दोनों हाथ पकड़कर दीवार से सटा दिए और फिर से अपनी जीभ उनकी नाभि में घुसेड़ कर ज़ोर जोर से घुमाने लगा. अब तो धक्के मार कर अपनी चाची की चूत दोबारा ढीली कर दे!तो बस धकापेल चुदाई का मंजर शुरू हो गया.

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फिर भाभी आगे बढ़ीं और मुझे किस करने लगीं, उन्होंने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने चूचों पे रख दिया; मैं भाभी के मम्मों को मस्ती से दबाने लगा; फिर मैं उनकी गर्दन पर किस करने लगा. चाची बहुत गर्म हो गई थीं, अब उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था, वो बोलीं- चलो बेडरूम में चलते हैं. पहले तो राज को देख कर बहुत ज्यादा गुस्सा आया मुझे… पर उन दोनों को देख कर मेरी चुत भी गीली होने लगी.

उससे ये पता चला कि उनकी शादी हुए 4 साल हुए हैं और उनके पति का रियल स्टेट का बिजनेस हैं. कुछ समय बाद जब उसकी सिसकारियां तेज़ होने लगीं, तब मैं अपना हाथ उसकी लैगीज में घुसा कर उसके पेंटी के ऊपर से ही उसकी बुर को रगड़ने लगा.

मेरी इस सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा था कि मेरी दोस्ती अवी नाम के लड़के से हो गई थी और आज मैं उसके साथ पहली बार मॉल में जा रही थी.

अंजलि भी मेरे पीछे पीछे ऊपर आ गई और मुझसे पूछने लगी- अंकित यार, तुम बाजार गए थे, कन्डोम तो ले आये होंगे?मैं बोला- शिट यार… मैं भूल गया, अभी लाता हूँ. मैं झट से उठ गया और पूछा कि तुम यह क्या कर रही हो?उसने मुझसे कहा- आज मुझे तेरा लंड चूसना है. क्योंकि जब मुझे खाने के बुलाने आई थीं, तब सलवार-कमीज में थीं और अब एक पतली सी नाईटी में गजब ढा रही थीं.

वो कहने लगा- बेबी, अगली बार जब हम बाहर जाएंगे तो पहले से प्लानिंग करके चलेंगे. मैं अन्दर गई तो दिव्या कमेंट करने लगी- और मेरी छन्नो रानी मिल आईं अपने हमदम से. आजा उन्होंने ब्यूटी ट्रीट्मेन्ट ली थी, वो उनके मेकअप से पता चल रहा था, साथ ही उन्होंने बाल भी स्टाइलिश तरीके से बनाए हुए थे.

फिर बहूरानी शीशे के सामने जा खड़ी हुयी, कुछ पलों के लिये उसने खुद को शीशे में निहारा, फिर झुक गयीं और सामान रखने वाले काउंटर का सहारा लेकर डॉगी बन गयी.

बीएफ बीपी बीपी बीपी: ”मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने कहा- किधर लोगी?तो चाची बोलीं- मेरे मुँह में निकालो. मुझे लड़कों में बहुत पहले से ही इंटरेस्ट है लेकिन इस घटना से पहले मैंने किसी से भी गांड नहीं मराई थी.

मैं अपनी बहूरानी के इस आत्मीय और संतुलित व्यवहार से हमेशा ही अचंभित, अवाक्, खुश रहा हूँ. मैं बोला- हां ये सही है मैं आपको चोदना चाहता था पर डायरेक्टली नहीं पूछ पा रहा था इसलिए दोस्त का नाम लेकर बात की थी. फिर वो लड़का मेरी चूत पर आ गया और उसने मेरी पैंटी उतार दी, फिर मेरी नंगी चूत पर किस किया, फिर उसने मेरी चूत चाटी।इस सारे खेल में आधा घंटा बीत गया और इस दौरान मैं भी पूरे जोश में आ गयी और उसे चूमने लगी, चाटने लगी।फिर मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किए और उसके सारे कपड़े निकाल दिए.

शायद उन्हें भी पता था कि मेरा ध्यान उन्हीं पर है, इसलिए वो जानबूझ कर ऐसी हरकतें करती थीं, जिससे मेरा ध्यान उन पर जाए.

सर ने मुझसे डांस करने को बोला तो मैंने डांस किया, जो कि मैं अच्छा कर लेता हूँ. धीरे धीरे जैसे जैसे शादी की रस्में होने लगी, हम दोनों में बातें हुई, दोस्ती हो गई और दोस्ती कब प्यार में बदल गई, पता ही नहीं चला. फिर आनन्द ने दूसरा धक्का दिया और पूरा लिंग चला गया योनि कि जड़ में उतर गया.