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क्या आपका लंड भी खड़ा होने लगा नीना की चुदाई की बात सुनकर? या आपकी चूत में भी चुदाने के लिये खुजली होने लगी.मेरी समझ में भी आ गया कि हवस की आग हमेशा आँखें और दिमाग खुले रख आस-पास का मुआयना करने के बाद ही शान्त करने में अकलमन्दी होती है.

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मैंने अपना मुँह उनकी गुलाबी चूत पर रख दिया और कभी उसको चाटता तो कभी अपनी जीभ उनकी चूत में डाल देता.

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मेरी 2 बजे की अपॉयंट्मेंट थी। एक हफ्ते पहले यह अपॉयंट्मेंट पक्की हुई थी, तब से आज तक चैन से नींद नहीं आई है, पहली बार किसी से सेक्स के प्रति अपना डर बताने वाली थी. मैं नीचे गिर गई मगर राणा अंकल ने मेरी गाण्ड को तब तक नहीं छोड़ा जब तक उनके वीर्य का एक एक कतरा मेरी गाण्ड में ना उतर गया. अब क्रिस्टीना ने भी शाल निकाली और ओढ़ कर बैठ गई और मुझसे बोली- अब नींद आ रही है, मैं थोड़ी देर झपकी लूंगी।मैंने जी.

काफ़ी देर की उठा पटकी के बाद आखिरकार मैं थक गई थी, मुझ में बचाव करने की हिम्मत नहीं रही और मुझे चित्त कर वो मेरे ऊपर मेरी टांगों के बीच में आ गया. उसके बाद धीरे धीरे मैंने अपना पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में घुसा दिया और हम दोनों फिर से बिस्तर पर लेट गए. राज अंकल ने कहा- बड़ा मीठा दूध है तेरा!उधर राहुल अंकल बाजी की गांड को सहला रहे थे.

जिस दिन मैंने कोई ब्ल्यू फिल्म देखी हो उस रात मुझे नींद ही नहीं आती, पूरी रात माँ को देखने में ही निकल जाती, कभी उन की नाईटी ऊपर सरक आती और उन की गोरी जांघ दिखाई देती तो कभी उन के स्तनों की झलक मिलती. वैसे तो यह आम सी बात है और बहुतों की जिंदगी आपसी समझ की कमी से कुछ इसी तरह की हो जाती है और अलगाव बढ़ जाता है. ”झंडे बोला,”क्यों, क्या अभी भी कोई कसर बाक़ी है जिसे पूरी करना है…। सारा काम तो कर डाला। देखो, मुँह में तुम्हारे घुसेड़ दिया, पिछले छेद में तुम्हारे घुसेड़ दिया। योनि तुम्हारी फाड़ डाली, अब कौन सी जगह है खाली, मैं जहाँ करूंगा…”दुल्हन झंडे का हाथ पकड़ कर अपनी योनि पर ले गई और बोली,”तुम यहाँ करोगे, हाँ, हाँ ! तुम यहाँ करोगे….

!”भरजाई जी ! तुस्सी चिंता ना करो जी… मैं पता नहीं कितने दिनों से तुम्हारे इस गदराए बदन और मटकती गाण्ड को देख कर मुट्ठ मार रहा था। आज इस नाज़ुक छेद में अपना लण्ड डाल कर तुम्हें भी धन्य कर दूँगा मेरी बिल्लो रानी !”अब उसने मेरी कमर पकड़ ली और एक धक्का लगाया। मशरूम जैसे आकार का सुपारा एक ही घस्से में अंदर चला गया, मेरी चीख निकल गई।अबे… साले…! मादर चोद. मैं नहीं जानता था कि ऐसा मजा भी होता है! मैं तो बस उड़ रहा था और यह शायद उसे भी समझ आ रहा था इसलिये वो बस आराम से बैठी थी.

सोनम से अलग होने के बाद मैं अकेला-अकेला सा रहने लगा, मेरा किसी भी और काम में मन नहीं लगता था.

कैसे हो आप? मैंने अन्तर्वासना की हर कहानी पढ़ रखी है! आज मैं भी अपना एक ख़ुद का अनुभव लिख रहा हूँ, यह जो मैं कहानी सुनाने जा रहा हूँ वो मेरी चाची और मेरी है।मेरा नाम सुशान्त है, कानपुर का रहने वाला हूँ, अभी पढ़ाई कर रहा हूँ। कॉलेज में मैं बहुत लड़कियों को चोद चुका हूँ। मेरी उम्र 23 साल है, कद 5 फीट 9 इंच है, अच्छा खासा व्यक्तित्व है, मेरा लंड 7.

भगवन से दुआ करती- हे भगवन! इसका लंड जल्दी से बड़ा कर दे ताकि मैं अपनी चूत की ज्वाला शांत कर सकूँ!थोड़े दिनों में तो यह हाल हो गया कि मैं जब भी किसी मर्द को देखती तो काफी देर तक उसके लंड की जगह तकती रहती, मुझे लगने लगता कि मेरे देखने से इसका लौड़ा तन रहा है. ‘हिच, मां की लौड़ी, तेरी चूत मारूँ… चिकनी है भाभी…!’ अब उसकी गालियाँ मुझे बहकाने लगी थी. अक्सर वो मेरे नहाने के समय मुझे तौलिया देने आ जाती थी और मुझसे छेड़खानी भी करती थी.

मैंने कहा- क्या?आंटी बोली- तुम्हारे अंकल तो महीने-महीने में आते हैं, क्या तुम मेरे साथ ऐसा हर रोज करोगे?तो मैंने कहा- क्यों नहीं मेरी जान! अब तुम मेरी हो. अब दीदी घोड़ी बन गई और कहा- चल धीरे से लगा !तभी मैंने कोशिश की लेकिन लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था…. ‘म्म युम्मी मम आह्ह्ह’ जैसे शब्द लड़की बोल रही थी।मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगा।इतने में क्या देखता हूँ कि पीछे से मुझे कोई बुला रहा है।मैंने जल्दी जल्दी लंड जींस के अन्दर डाला… और ‘ कौन है ‘ बोलते हुए बाहर गया.

मैं उनका लण्ड बाहर निकालना चाहती थी मगर उन्होंने नहीं निकालने दिया और फिर मुझे भी पता था कि दर्द तो कुछ देर का ही है। वैसा ही हुआ, थोड़ी देर में ही उनका पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में था। दोनों तरफ से लग रहे धक्कों से मेरे मुँह से आह आह की आवाजें निकल रही थी…फिर राठौड़ अंकल ने मेरे सामने आकर अपना तना हुआ लण्ड मेरे मुँह के सामने कर दिया.

!?’मैं उसके चूतड़ सहला रहा था, उन्हें दबा रहा था। फ़िर दोनों चूतड़ों को दो हाथ से फैलाया. ?वह कुछ और ही सुनना चाहती थी …मैंने जारी रखा- तुम्हारे बड़े-बड़े स्तन … तुम्हारे चूतड़ … मैं इन्हें सहलाना चाहता हूँ … इनमें डूब जाना चाहता हूँ. बीच बीच में मैं उसके होंठ अपने चूचों और अपने गालों पर महसूस करती…बीच बीच में वो मुझे प्रेम भरे चुम्बन देता… धीरे धीरे उसके धक्के तेज़ होने लगे … चूत में मुझे खिंचाव महसूस होने लगा… खुद ब खुद मैं उसके धक्कों से ताल से ताल मिला कर… उसका ज्यादा से ज्यादा लण्ड अपने भीतर लेने की कोशिश करने लगी… मेरी कोमल काया, उसके पसीने से भरे बलिष्ठ शरीर के नीचे दबी हुई कसमसा रही थी.

रीटा की प्यासी चूत में अब जैसे असंख्य बुलबुले से फूटते जा रहे थे, रीटा बोली- बहादुर तुम मुझे बहुत पसन्द हो. अब तो बता दो कौन हो तुम ?रोशनदान से देख लो ना ? लोल कहीं के ? अगली बार जब भी मुट्ठ मारो तो खिड़कियों के साथ रोशनदान भी बंद करना मत भूलना. ‘चलो अब, नाश्ता भी कर लो, बहुत हो गया!’‘उह चाची, इतना कुछ कर लिया अब एक बार मेरे नीचे तो आ जाओ!’‘चल हट रे चाची को चोदेगा क्या… पागल!’‘क्या चाची, एक तो आप मेरे लण्ड को रगड़ कर रख देती हो दूसरी और अपने आप को……!’मैं अपने पांव पटकता हुआ बाथरूम में चला गया.

मैंने कहा- ठीक है, मैं बाहर इन्तज़ार कर लेता हूँ!तो वो बोली- बाहर क्यों, यहीं बैठ जाओ, मैं तुम्हारे लिए पानी लाती हूँ!मैं तो यही चाह रहा था ताकि उसको ज्यादा देर तक देख सकूँ तो वहीं सोफे पर बैठ गया.

मुझ से रहा नहीं गया तो मैंने हाथ लगा ही लिया- अरे वाह मनोज! तुम्हारा तो बहुत बड़ा है! मैंने कहा. मेरे लंड में अब तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया था… मैं अपना लावा उसके मुँह के अन्दर ही निकाल दूंगा, ऐसा महसूस हुआ.

स्पेशल बीएफ वीडियो वो तो अभी तक नंगी ही थी, सीधे ही वो बिस्तर पर चढ़ गई और अपने चूतड़ ऊपर करके घोड़ी बन गई. फट गई ! वो चिल्लाई- हाय मोरी अम्मा …मैं मर जाऊंगी …प्लीज़ मत करो…वही बातें जो सभी लौंडिया शुरुआती चुदाई में कहती हैं …पर शायद उसे पता नहीं था कि मर्द का लंड जब तनता…है तब लावा उगल कर ही शहीद होता है.

स्पेशल बीएफ वीडियो ‘छैलू, मुझे एक बार बस, मर्दों वाला आनन्द दे दो…’ उसने कातर शब्द मेरे दिल को चीर गये. अब मुझ से रहा नहीं जा रहा था… मैं बोला- यार, अब चुचियों को भी मुँह में लेने दो…बोली- जानू ! मैंने कब मना किया ! मेरा पूरा शरीर अब तुम्हारा ही तो है ! जैसा चाहो, वैसा करो ! मैं नहीं रोकूँगी…मैंने कहा- अच्छी बात है.

अब मैं सिर्फ़ एक चड्डी में था जिसको मेरा लंड फाड़ के बाहर आने को बेकरार हो रहा था.

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इसको पहले मुँह में लेगी या इससे पहले तेरी सील तोड़ूँ?मोना कुछ भी नहीं बोली और उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया…यह देख अब्बास को बहुत गुस्सा आया और उसने झुक कर मोना के दोनों मम्मों पर अपनी जीभ रगड़ी… इस हमले से मोना के मुँह से मादक कराहें निकलनी शुरू हुई… मोना ने बोला- नहीं… ऐसा … मत…कर !मोना बेचारी तो कुछ बोल भी नहीं पा रही थी …. मैंने कहा – अच्छा ठीक है , आज के बाद तुम उस लड़के से बात नही करोगी और कोई लैटर भी नही लोगी, मेरी हर बात मानोगी. चूत को देखते ही तो मुकेश पर और वहशीपन छा गया, वो कहने लगा- आज रांड तेरा वो हाल करूँगा कि तू और तेरी चूत रोजाना मुझ जैसे का लौड़ा मांगेगी.

मैं दुकान में पहुँचा, दो कोल्ड ड्रिंक मंगाए और पिंकी को लेकर अन्दर के कमरे में चला गया. मेरे से बैठा भी नहीं जा रहा था… उसके बहुत बार कहने के बाद मैंने कुछ निवाले खाए… फिर मुझे अजीब सा कुछ महसूस हुआ. ”और पहले पेटीकोट उतार कर फेंक दिया। अब मेरे ऊपर आकर बैठ गई और अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठाकर हल्के से ही चूत के मुँह पर स्पर्श किया था कि तुरंत अन्दर प्रवेश कर गया। इस बार ज्यादा मज़ा आ रहा था …… अब वो खुद ऊपर नीचे हो रही थीं।” मर गई रे……तू मेरा असली बेटा क्यूँ नहीं हुआ ! वर्ना तुझसे तो रोज़ चुदवाती….

अब मेरा लंड चूत के अन्दर-बाहर होने लगा।मेरा लौड़ा पूरा गर्म हो गया था, मुझे ज़िन्दगी का असली आनंद मिलने लगा था …….

साथ देखने की हिम्मत अभी तक नहीं थी…उसी दौरान उसकी दादी का देहांत हो गया वो तीन दिन तक स्कूल नहीं आया…सभी मुझसे पूछते थे. अब मैं उसको कैसे समझाती कि उस वक्त तो मजा आ रहा था… मेरे मुँह से अपने आप आवाज निकल रही थी और इस वक्त एक तो ना चाहते हुये मजबूरी में बेटे से चुदवाने की ग्लानि और पतले से लण्ड से कैसे मज़े की आवाज निकल सकती है. थोडी देर तक इस पोसिशन में चोदने के बाद उसने कहा – अब तुम नीचे आओ… मैं बेड पे लेट गई.

बस ज़ख्म देख उसे सहला रहा था…अचानक तेज़ी से उसने पानी की बोतल निकाली, मेरे हाथ धुलाए…. नाज़ुक-नाज़ुक नर्म हाथ और पांव, छातियाँ खूबसूरत और जवानी से सरशार जैसे मौसम-ए-बाहर में कोई ताज़ा कली अपना सिर उठाए तन कर ठंडी हवा में झूमती है ऐसे ही मेरी नाज़ुक और हसीन छातियाँ ज़रा सी जिस्मी तहरीक पर जाग उठती और तन कर यूँ खड़ी हो जाती जैसे कह रही हों कि. ”‘इन्तजार कर रहा था…’ बोला नहीं गया। बोलकर स्वीकार करना अपने गर्व के विरुद्ध था।क्या तुम लड़कियों के बारे में कुछ भी कल्पना नहीं कर सकते?” उसने एक क्षण को जैसे रोष में मुझको देखा और दूसरी ओर मुड़ गई।मैं उसे देखता रह गया। लड़कियों के बारे में क्या? क्या माँ बाप के कारण आने का मौका नहीं निकाल पाई? लेकिन यह तो पहले से ही था, फिर कल के लिए वादा कैसे कर गई?समझ में नहीं आ रहा था, कहीं वो अभी….

पर मम्मी का लेक्चर अभी भी चालू था…!!और अगर कभी ज्यादा रिसाव हो तो सावधान रहना कि कपड़े गंदे न होने पाएँ… और खून देख कर घबराना नहीं. हाआआआ देवर र र र र र जी ईईईईई ईईईई!” मज़े में मेरे चूतड़ भी हिलने लगे और फ़क फ़का कर मैं दुबारा झड़ गई.

मुझे याद आया… ‘पुष्पा का पुष्प’।मैंने दाएँ स्तन पर से हाथ हटाकर नीचे टटोला। उसकी पैंटी गीली हो रही थी। उंगलियों पर उसकी गर्म चिपचिपाहट महसूस हुई।उत्सुकतावश ही उंगली को नाक के पास लाया। एक अजीब सी गंध… न अच्छी … न बुरी … बस एक बुलावे से भरी, कोई पुरानी याद दिलाती-सी…।मैं उसकी ओर किसी जानवर सा खिंचने लगा। पेट पर चुंबन अंकित करता, पेड़ू की ओर बढ़ता. जूली- आज कस्टमर के दोनों हाथों में और मुँह में लड्डू है ! एक मौसी और एक सीमा ! साला हमारे हाथ नहीं आता !मौसी- चलो अपने अपने धंधे पर ! अभी वो आ जाएगा !पढ़ते रहिए ! कहानी जारी रहेगी ![emailprotected]2004. और फिर वो उम्र ही ऐसी थी… दूसरे लिंग के प्रति आकर्षण स्वाभाविक था…!!पर लोगों का हमारे बारे में बातें बनाना उसे बुरा लगता था.

मैंने उसे मस्ती दिलाई।अब देर मत करो… प्लीज़ जल्दी डाल दो… चाट चाट कर गांड में खुजली कर दी है तुमने … प्लीज़ डालो ना.

फक मी वेरी हार्ड……शशांक : (पर मैं तो और भी कुछ करना चाह रहा था) रूको मेरी जान…… अभी तो बहुत कुछ करना है……. ”कोमल के और मेरे होंठ आपस में मिल गये… उमर का तकाजा था… मुझे थकान चढ़ गई और मैं सो गया. वो भी क्या करता? बड़े दिनों से सेक्स का भूखा था और इस प्रसंग का पूरी तरह से रस लेना चाहता था… और बेचारी मोना अब्बास क नीचे दबी हुई अभी भी हिम्मत कर रही थी निकलने की… इस बार मोना ने महसूस किया कि अब्बास ने अपनी टांगों की मदद से मोना की दोनों टांगें खोल दी थी….

फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और पंद्रह मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ चूसते रहे. थोड़ी देर के बाद मैं धीरे से उठा और वापस उनके दरवाज़े के पास गया, और जैसे ही मैंने अन्दर झाँका…दोस्तो, अब मैं ये कहानी यहीं रोक रहा हूँ.

जानने के लिए पढ़ेंका अगला भाग शीघ्र ही आपकी अपनी अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर !अपनी बात इस कहानी की लेखिका वृंदा को कहने के लिए[emailprotected]पर मेल करें !. चुदी हुई रीटा अपने चकराते हुऐ सिर को पकड़ जमीन पर बैठ अपनी बेतरतीब सांसों को सम्भालने लगी. उस दिन चुदाई में जितना मजा आया उतना फिर कभी नहीं आया … हमने कई बार साथ चुदाई की ….

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बीस पच्चीस मिनट एक दूसरे की बाहों में लेटे रहने के बाद मैं किचन में दोपहर का खाना बनाने चली आई और देवर गेस्ट-रूम ठीक ठाक कर नहाने के बाद जाने के लिये तैयार हो गया.

धूर्त बहादुर अपने खड़े लौड़े की टोटनी को अंगूठे और उंगली में रगड़ता हाथ को रीटा की नमकीन व चांदी सी चपडगंजी चूत को मुट्ठी में जोर से भींचता बोला- बेबी अब कुछ आराम आया?रीटा अब बोलने वाली हालत में नहीं थी- ओर जोर से बहादुर सीऽऽऽ ऊईऽऽऽ सीऽऽऽऽ. फिर उसका कांपता हुआ हाथ मेरे मम्मे की तरफ बढ़ा और एक ऊँगली से उसने आईसक्रीम उठाई और फिर मेरे मुँह में डाल दी। मैंने उसकी ऊँगली अपने दांतों के नीचे दबा ली और अपनी जुबान से चाटने लगी।उसने खींच कर अपनी ऊँगली बाहर निकल ली तो मैंने कहा- क्यों देवर जी दर्द तो नहीं हुआ. वो चीखती रही पर ये एक शाश्वत सत्य है कि लड़कियाँ पहली बार लंड अन्दर करने के समय जितना रोती-मचलती हैं, और अगर ढंग से पहली चुदाई का मजा दिया जाये तो वो बड़ी चुदासी हो जाती हैं और आगे जीवन में खुल कर चुदाई का मजा लेती और देती हैं.

भाभी के स्तन सच में स्वाति दीदी से भी बड़े थे, प्रिया भाभी के स्तन 36′ से कम नहीं थे. अगली रात चली तो गई लेकिन अँधेरा होने की वजह से किसी और की बाँहों में जा बैठी!या सोचा समझा धोखा था? जो भी था, रहस्य है, दो के साथ? बहुत आया! क्या बहुत आया?जानने के लिए अगली कड़ी ज़रूर पढ़ना![emailprotected]. बंगाली बीपी वीडियोउसके मुँह से हल्की-हल्की आह आह निकाल रही थी।झांटें बनाने के बाद चूत एकदम से चमक गई तो मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया और उसकी चूत का चूमने और चूसने लगा।उसको मज़ा आने लगा और वो आहें भरने लगी तो उसकी आहें सुनकर मेरा जोश बढ़ने लगा तो मैं उसे और जोर जोर से उसकी चूत को चूसने लगा और मैंने अपनी जीभ उसकी चूत मैं डाल दी तो उसकी हालत ख़राब होने लगी.

मामी अब आगे से सर हिला के मुँह को चुदवा रही थी और कमर हिला एक चूत में उंगली ले रही थी. आंटी फिर मेरे ऊपर आकर चुदने लगी, जोर जोर से कूद रही थी, ऐसे लग रहा था जैसे शताब्दी ट्रेन हो!मैं भी नीचे से अपना लण्ड उनकी चूत में दे दनादन मार रहा था.

क्या करूँ? हूँ तो लड़का ही ना सबकी नज़र में!वहाँ बाथरूम में मैंने अपने उतार कर ब्रा और पेंटी पहन ली. पति के वापस लौटने तक उसने मुझे चोद-चोद कर रण्डी बना दिया था, मेरी चूत को इण्डिया-गेट बना दिया था, मेरी गाण्ड को समन्दर बना डाला था. मुख़तारमैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। यह मेरी पहली कहानी जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ जिसे सुन कर झुके हुए लण्ड फिर से खड़े हो जायेंगे और लड़कियों की चूत से नमकीन सा पसीना बाहर आ जायेगा।मैं 22 साल का नौजवान हूँ मेरा कद 5 फीट 6 इंच है और मेरा रंग हल्का सा सांवला है। रोज मैं जिम जाता हूँ जिसके कारण मेरा शरीर एक दम गठीला है। मेरा लौड़ा 7 इंच लम्बा और 2.

मुझे पता था कि यह तुम लोगो का ही काम है। मैंने पिछली बार गांड मराई थी तब तुम्हारे चाची और दादी को बताया था. ’मेरी बात सुनकर राजू ने अपने कपड़े खोलना चालू कर दिया लेकिन दीपू मेरी चूत का दीवाना हो गया था और चूत छोड़ने के लिए राजी नहीं था. मैं उसे चोदता रहा !आप सब यकीन नहीं मानेंगे- उस बार मैंने उसे पूरे 50 मिनट तक चोदा जो कि मेरे लिए भी आश्चर्यजनक था कि इतनी देर चुदाई करने पर भी मैं झड़ा नहीं।यह उस गोली का ही असर लग रहा था!जब बहुत देर हो गई तो फिर से मैंने उसे अपने नीचे लिटा लिया और जोर से चोदने लगा और वो तो बस आःह्ह्ह….

‘अब इसे नीचे झुका लो!’ गोमती ने उसके कड़कते हुये लौड़े को अपनी अंगुली से नीचे दबा दिया.

अब क्रिस्टीना ने भी शाल निकाली और ओढ़ कर बैठ गई और मुझसे बोली- अब नींद आ रही है, मैं थोड़ी देर झपकी लूंगी।मैंने जी. करके चिल्लाने लगी। 10-12 धक्कों के बाद वो भी अपनी गांड ऊपर कर कर के चुदवाने लगी। मैंने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी।वो तो बस चिल्लाये ही जा रही थी उफ़….

मैं बार बार उसके गाऊन में से उसके मम्मे देखने की कोशिश में लगा था। उसका ध्यान भी इस तरफ चला गया और वो मुस्कुराती हुई बोली- क्या बात है पाटिल जी…? आपकी नीयत कुछ गलत लग रही है आज…?मैं भी दारू के नशे में ज़रा बिंदास हो चला था इसलिए बोल पड़ा- अरे यार, तुम चीज़ ही ऐसी हो. कह अपनी एक उंगली मेरे गांड के छेद में घुसाने लगी।मुझे अनायास ही असीम आनंद की अनुभूति होने लगी। एक हाथ से आंटी गांड में उंगली कर रही थी और दूसरे हाथ से वो लौड़े को पकड़ कर जोर जोर से हिला रही थी ……. अगली रात चली तो गई लेकिन अँधेरा होने की वजह से किसी और की बाँहों में जा बैठी!या सोचा समझा धोखा था? जो भी था, रहस्य है, दो के साथ? बहुत आया! क्या बहुत आया?जानने के लिए अगली कड़ी ज़रूर पढ़ना![emailprotected].

‘वाआवऽऽ वाहट ए लवली लौड़ाऽऽ!’ चूत के हमदम का आकार देख कर रीटा की चूत की धड़कन तेज हो गई. मैंने इसे उनकी हाँ समझ कर उनके होंठो पर चुम्बन जड़ दिया, अपना एक हाथ उनकी कमर में डाल कर चारों तरफ से उन्हें जकड़ लिया और उनके शरीर के हर भाग पर चुम्बनों की बारिश कर दी. हम दोनों प्लस टू पास करके वूड्स एक्टिंग स्कूल में जाया करती थी।बहुत दिनों से जूली नहीं आई, मालूम चला कि वो बीमार है तो मैं उसे मिलने चली गई।मैं- जूली, तू कहाँ रहती है यार आजकल? एक्टिंग स्कूल भी नहीं आ रही?जूली- कुछ नहीं यार! बस अब नहीं जाना, वहाँ अच्छे लोग नहीं हैं!मैं- क्यूँ? अब क्या हुआ … पिछले बार की तरह अब किसी ने तुम्हें छेड़ दिया?जूली- इस बार तो उससे भी बुरा हुआ.

स्पेशल बीएफ वीडियो प्रेषक : रिन्कू गुप्ताप्रिय पाठको,मेरा नाम रिंकू है जैसा कि आप लोग पहले से ही जानते हैं. आज रात सेक्स का प्रोग्राम था फ्लैट में !मैं ड्राईवर सीट पर काले रंग की मिनी स्कर्ट पहने गाड़ी चला रही थी और वो मेरी गोरी गोरी जांघों को सहला रहा था। उसकी ऊँगली मेरी पैंटी के अन्दर घुस चुकी थी…रात भर चुदवाने का मन था.

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मैं एक दोस्त से विश्वासघात करने का दोषी था…कुछ साल बाद एक अच्छा रिश्ता देखके कशिश के घरवालों ने उसकी शादी कर दी…उसके पति का तबादला हो के वो लोग अब हमारे शहर में ही रह रहे हैं. जैसे ही मैंने उसके नंगी टांगों को चाटना शुरू किया तो वो ऐसे तड़पने लगी जैसे बिना पानी के मछली !फिर उसकी पैंटी को उतार कर उसको नंगा कर दिया और उसको देखने लगा- क्या लग रही थी- बिल्कुल मक्खन जैसा बदन ! जिसके नाम की ना जाने कितने सालों से मुट्ठ मार रहा था आज वो हुस्न की मल्लिका मेरे सामने नंगी लेटी थी।उसने पूछा- ऐसे क्या देख रहे हो. तब चित्रा ने स्थिति को संभालते हुए कहा- मैंने कहा था! हम आगे से ऐसा कुछ दोबारा नहीं करेंगे.

वह अब्बास को बालों से पकड़ कर टॉर्चर-रूम के दरवाजे तक खींचती हुई ले गई … अब्बास बुरी तरह हुई पिटाई के कारण अभी भी बेहोश था … मोना ने टॉर्चर-रूम का दरवाजा खुलवाया और अब्बास को एक अलग जेल में रखने का बोला हवलदार को …फिर दो हवलदार उसको घसीटते हुए वहाँ से ले गये. मैंने माँ से पूछा- अगर मेरा वीर्य चूत में चला गया तो क्या होगा?माँ ने हँसते हुए कहा कि उन का ऑपरेशन हो चुका है और वो अब गर्भवती नहीं हो सकती. বাংলা বৌদি বফঁएक रात को एक बजे मेरे मोबाइल पर अमित अंकल का कॉल आया- क्या कर रही हो?मैंने कहा- सो रही थी!तो बोले- मनमीत, हमारी नींद उड़ाकर तुम सो रही हो?इसके बाद रोज़ रात को हम लोगों की बातचीत शुरू हो गई.

मैंने भी अपने दिमाग में सोचा कि भाभी भी जयपुर में हैं, उनसे भी मिल आऊँगा और क्या पता इस बार उन्हें फिर से चोदने का मौका ही मिल जाए.

रीटा ने भी बहादुर को कस कर बांहो में भींच कर अपनी सैन्डल की हील बहादुर के चूतड़ों में गाड़ दी और अपनी बुंड को हवा में बुलंद कर दी ताकि बहादुर का घीया जड़ तक अंदर ले सके. मैंने आव देखा न ताव, अपना लंड दीदी के मुँह में रख दिया और फिर दीदी उसे लोलीपॉप की तरह चूसने लगी और हम 69 की अवस्था में आ गए.

मेरा लण्ड भी एकदम खड़ा हो गया था, अब शायद आंटी को भी अंदाजा लग गया था कि मैं झूठ मूठ सो रहा हूँ. शर्तिया किसी लड़की का था। ऊपर आकर फिर वही शोर-शराबा और इतने चेहरे कि समझ में न आये कि ये हरकत है किसकी। मैं बहुत अच्छा तैराक या गोताखोर नहीं हूँ इसलिये ज़्यादा देर तक साँस रोक नहीं सकता फिर भी मैंने सोचा इस बार तो जान कर ही रहूँगा कि उस्ताद के साथ उस्तादी कर कौन रहा है।मैंने फेफ़ड़ों में हवा भरा…गोता लगाया…और आँखे पानी के अंदर भी खोल के रखा…एक लहराते बालों वाला साया मेरे पास आया…. आधे घण्टे तक चली होगी यह चुदाई और अकेले अमित ही मेरी नीना की चूत गर्मी शान्त करता रहा.

वो मेरे पड़ोस में रहने वाली 18 साल की लड़की है जो कक्षा 11 या 12 में पढ़ती है और शाम में कॉलोनी के बाकी बच्चों के साथ छुपा छुपी खेलते समय अक्सर मेरे घर में या आस-पास आकर छुप जाती है.

इससे मेरी हिम्मत बढ़ी तो मैं धीरे से अपना पजामा नीचे करके सिर्फ़ लौड़े के बालों तक करके लंड ऊपर से ही दबाने लगा. मैंने अपनी पैंट खोली और अपना लंड ले जाकर ज्योति के मुँह के पास ले गया तो ज्योति ने खुद ही उसे पकड़ा और चूसने लगी क्योंकि वो इस खेल में काफी माहिर खिलाड़ी थी तो वो सब कुछ जानती थी और काफी देर तक मेरा लण्ड चूसती रही. एक दिन मेरे कार में बैठते ही अमित अंकल ने पूछा- दस पन्द्रह मिनट देर हो जाए तो कोई परेशानी तो नहीं है ना?मैंने कहा- नहीं अंकल, कोई परेशानी नहीं है!अमित अंकल ने कार एक रेस्तरां के बाहर रोकते हुए कहा- इसका डोसा बहुत टेस्टी है!पापा के साथ इस रेस्तरां में आने के बारे तो मैं सोच भी नहीं सकती थी, वो एक नंबर के कंजूस आदमी हैं.

पंजाबी फिल्म ब्लूमैं एक दोस्त से विश्वासघात करने का दोषी था…कुछ साल बाद एक अच्छा रिश्ता देखके कशिश के घरवालों ने उसकी शादी कर दी…उसके पति का तबादला हो के वो लोग अब हमारे शहर में ही रह रहे हैं. तो चाँदनी बोली- यह क्या करेगा अब?मैंने कहा- मेरी जान, सेक्स में इतनी ज़्यादा वेराइटी है कि अगर हम लोग अलग अलग स्टाइल से करें तो दिन भर चुदाई की जा सकती है.

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उसने मुझे कसम दे दी कि उस घर में जा रहा हूँ, वहाँ कोई नहीं है, तुझे आना होगा!पहले वो धीरे से निकला, फिर मैं!मैंने ऊपर जाकर सब अपनी सहेलियों को बताया. दोनों में आसानी से बुला सकता हूँ !!” (फिर नाटकीय ढंग से उसका नाम एक बार प्यार से और एक बार गुस्से से लेकर दिखाओ। वह ज़रूर हँस पड़ेगी)तुम हँसती हुई ज्यादा अच्छी लगती हो …. योगी भी पीछे-पीछे आ गया, मैंने उसका सूट उतार दिया और फिर उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और फिर मैंने चित्रा की पेंटी भी निकाल दी और उसकी चूत चाटने लगा.

और तेज……”हम दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे। सर्दियों की इतनी ठण्डी रात में भी हम बिना कपड़ों के पसीने से भीगे थे। मैं पूरी गति से लगा हुआ था। मेरी सांसें उखड़ रही थी। मैं उन पर काबू नहीं कर पा रहा था।ओह आंटी, अब मैं काबू नहीं कर पा रहा हूँ! प्लीज़ कुछ कीजिये !”बस अब तेज तेज धक्के मार……आह …… ओह… मेरे राजा…… मेरा तो हो गया…… अब मैं जाने वाली हूँ…… जल्दी कर… तेज तेज धक्के मार……. मैं तेज़ क़दमों से टेंट के पास गया तो मैंने देखा कि ज़ाहिरा ने बड़े तम्बू में एक पर्दा लगा कर अपने लिए अलग कमरा सा बना लिया था और एक मोमबत्ती उसके कमरे में जल रही थी. मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था और मजा भी! मैं भी देखना चाहता था कि बाजी की कैसी पिलाई होती है.

मेरा बाइक चलाना नामुमकिन सा हो गया था तो मैंने बाइक एक तरफ खड़ी कर दी और एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए. प्रवीण, मेरे पति एक सीधे साधे इन्सान थे, मृदु, और सरल स्वभाव के, सदा मुस्कराते रहने वाले व्यक्ति थे. मैं अपनी टांगों को बार बार फ़ैला कर अपने आप को व्यवस्थित कर रही थी, पर दर्द कम नहीं हो रहा था.

ऑन कर लूँ क्या?वो बोली- कर लो!मैं बिस्तर से उतरकर अपनी शर्ट और जींस को जल्दी से उतार और ए. और कपड़े डाल कर चल दी।मैडम ने रोका, रेस्ट रूम ले गई ! लेटाया और हॉट वाटर बैग मेरी चूत पर रखा !आराम मिला, मैडम ने पेन किल्लर दिया !मैं थोड़े देर में चुपचाप वहाँ से चल दी।मुझे पता था मैडम मुझे नौकरी से निकाल देंगी।मैं दुबारा नहीं गई …हाँ ! घर पर महीने के अंत तक सेलरी पहुँच गई थी …अब अपनी श्रेया को इजाजत दीजिये !.

लेखिका : श्रेया अहूजामैं आपकी चहेती लेखिका इस बार एक लड़की की आपबीती लेकर आपके सामने आई हूँ ! आजकल मैं एक ऍन.

हड़बड़ाहट में भाग कर मैंने बाहर जा कर बरामदे का दरवाजा खोला तो सामने बबलू को देख कर मैं दंग रह गई. नंगी वीडियो देखने वालीमुकेश का लौड़ा चूसते चूसते मेरा हलक सूखने लगा था लेकिन मेरी चूत तरबतर हो गई थी और शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना भर गई थी, मैंने मुकेश से कहा- मेरा हलक सूख रहा है!मुकेश ने कुछ सोचा और फिर मेरे मुँह को कसकर पकड़ लिया और उसमे पेशाब की धार छोड़ दी. बीपी ब्लू मूवीकोमल… हाय निकल गया मेरा माल तो…”पापा… निकाल दो प्लीज… पूरा निकाल दो…फिर से जमेंगे… निकाल दो…” कोमल ने मुझे प्यार से सहारा दिया. मैंने इसे उनकी हाँ समझ कर उनके होंठो पर चुम्बन जड़ दिया, अपना एक हाथ उनकी कमर में डाल कर चारों तरफ से उन्हें जकड़ लिया और उनके शरीर के हर भाग पर चुम्बनों की बारिश कर दी.

फ़िर जिन्दगी में ये अवसर कभी नहीं आयेगा भाभी, मैं दस मिनट तुम्हारे साथ इसी बिस्तर पर लेटना चाहता हूं… इन्कार मत करना भाभी…मैं भी एक बार और मजा लूटना चाहती थी लेकिन वक्त बहुत हो गया था… बबलू के उठने का डर भी था सो मैंने देवर से कहा- अगर मुझ पर इतना ही प्यार आ रहा है तो फ़िर कल दिन तक एक बार और मज़े लेकर शाम तक निकल जाना.

फिर उसने फिर से मेरी चूत में अपनी जीभ घुमा घुमा कर पागल कर दिया मुझे! मैंने भी उसके लौड़े को कस के पकड़ लिया और अपनी ओर खींचने लगी. जो नंबर उसने दिए थे मैंने उन लड़कियों को भी फ़ोन किया और उनको भी सेक्स का मजा दिया. कोमल ही एक स्त्री के रूप में मेरे सामने थी, वही धीरे धीरे मेरे मन में छाने लगी थी.

रीटा को लण्ड की पिटाई से रीटा की ठरक सातवें आसमान पर पहुँच गई, कभी कभी रीटा बहादुर के लण्ड को लपक कर मुँह में लेकर चुमलाने में सफल हो जाती, कभी हिसंक हुई रीटा बहादुर के लण्ड में दांत गड़ा देती तो बहादुर रीटा को बालों से पकड़ कर उसके चुच्चे को मरोड़ देता तो रीटा चीख कर उसका लण्ड छोड़ने पर मज़बूर हो जाती. उसने चित्रा को बाहों में लेकर उसे बिस्तर पर लिटा दिया तो चित्रा बोली- अभी मैं थक गई हूँ!मगर योगी ने उसकी एक नहीं सुनी और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया तो वो दर्द के मारे चिल्ला उठी. आंटी बोली- रुको मुझे मूतना है !तो मूतिये आंटी जी ! यह तो मेरे लिए प्रसाद है, चूतामृत यानि बुर का अमृत !”आंटी खड़ी हो कर मूतने लगी, मैं झुक कर उनका मूत पीने लगा। मूत से मेरा चेहरा भीग गया था। उसके बाद आंटी की आज्ञा से मैंने उनकी योनि का स्वाद चखा। उनकी चिकनी चूत को पहले चाटने लगा और फिर जीभ से अंदर का नमकीन पानी पीने लगा.

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मैंने लण्ड को बाहर निकाले बिना चाची को अपनी बाँहों में लिया और मैं सीधा लेट गया और चाची को मेरे ऊपर लिटा लिया।चाची पूरी तरह से थक चुकी थी और वो लगभग सो गई थी लेकिन मैं नहीं सोया था…. लगभग शाम के 4 बजे तक हम लोग जयपुर पहुँच गए, मैं प्रिय भाभी को बिल्कुल भूल चुका था और मेरे दिमाग में सिर्फ और सिर्फ सोनम का वो मासूम सा चेहरे घूम रहा था. तभी राहुल अंकल ने अपना काला लौड़ा बाजी के मुँह से निकाल कर कहा- अब ज़रा मेरी गोली को भी चूस! तुझे और भी मजा आएगा!बाजी झट से दोनों गोलियों को मुँह में लेकर चूसने लगी.

लेकर बाबूलाल को देते हुए कहा- टाइम का ध्यान रखना! ठीक 10 बजे!बाबूलाल चला गया, ऑफिस का टाइम खत्म हो चुका था, मैं घर चली आई, घर आकर मैं खूब रगड़ रगड़ कर नहाई, कोई दस बार अपनी चूत को साबुन से धोया, आदत के अनुसार साड़ी के नीचे पेन्टी नहीं पहनी।घर में मैंने कह दिया कि जिमी के साथ शादी में जा रही हूँ।ठीक 9.

‘ रोहित… मत मार मुझे… बहन चोद… कुत्ते… अपनी माँ को मारना घर जा कर उसकी गांड की छिताई करना मैं गलियाँदेती हुई घोड़ी बन गई। उसने मेरे चूतड की दोनों फांकों को चीरते हुए… अपने लंड की सुपारी गांड के छेद में टिका दी…‘ले कुतिया… अब तेरी गांड की माँ चोद दूंगा.

’‘और गोमती, दिन में दो बार भी चुद गई!’‘देर से ही मानो, पर हमने इतना सब्र तो किया ना, मिला ना फ़ल!’‘हाँ री, मिला क्या, लगता है अब तो रोज ही मिलेगा यह फ़ल!’‘दीदी, एक बार चारों से एक साथ चुदवा कर मजा ले!’‘साली मर जायेगी…’‘अरे दीदी, अभी तो मौका है… जाने फिर ऐसा समय आये, ना आये?’दोनों ने अपनी निंदासी आँखें खोली और अपनी आँखें एक दूसरे की आँखों से लड़ा दी. और शायद सुन भी नहीं रहा था…मैंने उसका ध्यान बटाने की एक बार फिर कोशिश की…मैं : देखो वेदांत खड़े होकर ! बहुत मज़ा आ रहा है… तुम भी झूलो ना आकर … वेदान्त…. देसी सेक्स जंगल मेंबहादुर ने रीटा को सामने पड़ी चारपाई पर उल्टा लिटा कर रीटा की जांघों को डरते डरते सहलाते बोला- बेबी, कुछ आराम आया?सेक्सी कहानी बाकी है अभी![emailprotected].

‘बहुत जोर मार रहा है ना, ला मैं इसका रस निकाल दूँ!’कह कर भाभी लपक कर मेरे ऊपर गाण्ड को मेरी तरफ़ करके चढ़ गई और मेरे लण्ड को जोर जोर से मुठ मारने लगी, फिर उसे अपने मुख में ले लिया. ?”झंडे ने खुशामद भरे अंदाज में कहा,”चाची प्लीज, मना मत करना, तुम्हें मेरी कसम…”अच्छा जा, वह भी चलेगा। चल जगा दे उसे भी…. बात तब की है जब मैं अपने दोस्त की शादी में उत्तर प्रदेश गया था, गाँव ही था एक तरह से वो.

मैं नाइटी तो उतार दूँ ?”मैंने अपनी नाइटी निकाल फैंकी। वह तो पहले से ही नंग-धड़ंग था, उसने झट से मुझे अपनी बाहों में भर लिया। वो मेरे मम्मों को चूसने लगा और अपना एक हाथ मेरी लाडो पर फिराने लगा। मैं अभी उसका लण्ड अपनी लाडो में लेने के मूड में नहीं थी।आप हैरान हो रहे हैं ना ?कहानी अगले भागों में जारी रहेगी।आपकी नीरू बेन (प्रेम गुरु की मैना). ‘अब समझे राजू, बस जो कुछ करना है, बाहर ही बाहर से करो, मुझे चोदने की कोशिश नहीं करना!’‘चाची ऐसा क्या है जो मुझे कुछ भी नहीं करने देती हो?’‘मेरा तन-मन सब कुछ राजेश का है, तेरे चाचू का भी नहीं है, बस जवानी कटती नहीं है, सो तुझ पर मन आ गया.

उस व्यक्ति को मैं पहचान गया वो उसके कॉलेज टाईम का दोस्त था और उसी के स्कूल में टीचर था.

जब तेरी क्लास होगी तो तू मेरा कवर उतारकर नीचे कर देना और मेरी होगी तो मैं तेरा कवर उतार कर नीचे कर दूंगी इस तरह कक्षा में दोनों का कार्य भी होता रहेगा. पर खिड़की और दरवाजे तो बंद हैं ?इसका मतलब मैं ठीक सोच और बोल रही हूँ न ? तुम वाकई मुट्ठ ही मार रहे थे ना ?आप हद पार कर रही हैं !तुम हद पार कहाँ करने दे रहे हो ?मतलब ?अच्छा चलो एक बात बताओ !क्या ?ये मैना कहाँ गई हुई है ?मैना…. मुकेश जब मेरी गांड को अच्छी तरह से चाट चुका, उसके बाद वो मेरे चूतड़ों को चूसने लगा, कई बार वो अपने दांत भी लगा देता.

வீடியோ ஆன்ட்டி मुझे ऐसा लग रहा था की राहुल मुझे नहीं मैं राहुल को चोद रही हूँ… मैंने हिलना तेज किया… वो भी नीचे से अपनी गांड उछाल उछाल कर मुझे चोद रहा था. दो चार दिन में ही उनकी बातें सुन सुनकर मुझे यह एहसास हो गया कि मैं कितने पिछड़े क़िस्म के स्कूल से पढ़ कर आई हूँ.

फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और पंद्रह मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ चूसते रहे. मैं हूँ बाबू, उम्र 43 साल, अविवाहित पर सेक्स का मजा लेने में खूब उस्ताद। मेरी इस कहानी में जो लड़की है उसका नाम है- सानिया खान।वो मेरे एक दोस्त प्रोफ़ेसर जमील अहमद खान की बेटी है।सानिया के पिता और मैं दोनों कॉलेज के दिनों से दोस्त हैं। उनकी शादी एम. !और उसके चूतड़ों को कस कर सहलाने लगा, लंड का सुपारा ही अन्दर था !मैंने मोबाइल की रोशनी में देखा- उसकी गांड का भूरा छेद खुल कर लंड के चारों ओर तना हुआ था !मैंने चूतड़ों को दोनों हाथों से जकड़ कर जोर का एक धक्का लगाया.

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किचन में मक्खन लगा कर, डायनिंग टेबल पर टमेटो केचअप लगा कर, गैराज में कार के बोनट पर ग्रीस लगा कर, शावर के नीचे और टब बाथ में तेल लगा कर, छत पर रात को चान्दनी के नीचे थूक लगा कर, लैदर के सोफे पर जूतों की पालिश लगा कर, घास पर झाड़ियों के पीछे क्रीम से और ना जाने कहाँ कहाँ भौंसड़ी की रीटा चुदती रहती थी. [emailprotected]और मेरी जान राज को भी जरूर बताना की यह कहानी आप सभी को कैसी लगी[emailprotected]1815. क्या करने आई थी इतनी रात को…?मैं कुछ नहीं बोली… बस लेटी रही… मुझे पता था कि आज मेरी चूत में यह अपना लौड़ा घुसा कर ही छोड़ेगा…वो प्यार से मेरे बदन को चूमने लगा… अब तक मेरा दिल जो जोर जोर से धड़क रहा था, शांत हो रहा था और डर भी कम हो गया था.

फिर मैंने दीदी से कहा- मुझे तुम्हारी गांड मारनी है!तो दीदी ने कहा- अभी नहीं! सुबह हो चुकी है, कोई भी आ सकता है. वो कहानी बाद में!फिर तो मैं बहुत दिनों तक आंटी की गाण्ड और चूत मारता रहा!तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी मोना आंटी आप लोगों को?मुझे मेल जरूर करिएगा.

कि तभी दो सिपाही आए और मेरे जिस्म से मेरे हाथों को अलग कर अलग अलग दिशा में थाम लिया।मैं नंगी खड़ी जमीन में गड़े जा रही थी!सब मंत्री खड़े होकर मुझ पर थूकने लगे और ठहाके लगा कर हंसने लगे.

उसने डरते डरते मेरे गाउन के अन्दर हाथ डाला और टिकेट पकड़ कर बाहर खीचने की कोशिश करने लगा. अब रीता और साहिल की सिस्कारियां बढती जा रही थी, जो राहुल और कामिनी के शरीर में आग भरने का काम कर रही थी. मन ही मन मैं भी उसकी बहुत इज्जत करने लगा था क्योंकि उसने मुझ पर भरोसा रखा और मेरे घर आई.

मैंने भी धक्के तेज़ कर दिए और जब मैंने सांस लेने के लिए अपने होंठ उसके होंठों से अलग किये तो उसने मुझे गाली दी और बोली- माँ के लोड़े ! तेरे में दम नहीं है?… फाड़ ड़ाल आज मेरी चूत को… माँ के यार आअह्ह चोद दे आज इस…लड़की को… मेरी जान निकाल दे. मेरा वीर्य और उसका रस उसकी चूत में समां नहीं पा रहा था, वो उसकी चूत से होता हुआ बिस्तर पर टप टप गिरने लगा. अब दीदी मुझे तरह-तरह के कारण देने लगी मगर मैंने बिना कुछ कहे चाभी उठाई और बाहर आ गया और दीदी के कैबिन में जाकर बैठ गया.

सब अपने काम में लगे हैं !मैंने पूछा- आखिर क्या हुआ?तो बोली- तुम्हारे भैया तो हमेशा बाहर रहते हैं… मेरे अरमानों को कौन समझेगा.

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साथ देखने की हिम्मत अभी तक नहीं थी…उसी दौरान उसकी दादी का देहांत हो गया वो तीन दिन तक स्कूल नहीं आया…सभी मुझसे पूछते थे. केले के तने जैसी।मुझे उसके होंठ अब रसीले नज़र आने लगे थे। मैं जब भी उसको निहारता वो नज़रें झुका लेती थी… मेरी आँखों मे शायद कुछ और नज़र आने लगा था। मैं सोचता था जैसे शशि और स्मिता अपने आप आकर मेरी झोली में गिरी थीं नेहा भी गिरेगी. ”इसमें कौन सी बुराइ है दीदी, आखिर वो भी मर्द है, उसका भी मन करता होगा!”हाँ यह तो सही बात है!” दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा- लेकिन एक बात बता, ये किताब पढ़कर तो सारे बदन में हलचल मच जाती है, फिर तुम लोग क्या करते हो? कहीं तुम दोनों आपस में ही तो…??”अनीता दीदी की आवाज़ में एक अजीब सा उतावलापन था.

[emailprotected][emailprotected]सोने के पिंजरे में बंद एक मैना- निर्मला बेन पटेल[emailprotected].

वो उसके ऊपर से मेरे बूब्स को दबा रहा था… उसके हाथों में भी पूरा रस लग चुका था।वो मेरे चूचुक मसल रहा था… फिर उसने एक ही झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया और चोदने लगा…. भैया के जाते ही मैं रक्षिता से लिपट गया…और उसे बहुत लम्बा किस दिया… और गांड पकड़ कर उसे अपने हाथों से उठा लिया…थोड़ी देर बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया. तभी मैं कुछ समझती उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरा चेहरा थाम लिया और मेरे लबों की ओर झुक गये.