कोलकाता का बीएफ दिखाइए

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सेक्स टेबलेट फॉर मेन: कोलकाता का बीएफ दिखाइए, कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मेरी (विशाल की) दीदी प्रीति के ब्वॉयफ्रेंड ने उसको ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था.

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परमीत हमेशा ही गीत की बहुत तारीफ करती रहती है और उससे ज्यादा तारीफ आपकी करती है. राजस्थानी सेक्स वीडियो चुदाईमैं- अच्छा जी और औरतों ने?भाभी- बस मेरी मामा की लड़की ने ही मेरे साथ लेस्बो किया था.

मेरे लंड का साइज़ औसत है, जो किसी भी लड़की या औरत को संतुष्ट करने के लिए काफी है. सेक्स गर्लफ्रेंडमेरे बदन पर सिर्फ अंडरवियर रह गया था और उनके तन पर ब्रा और पेंटी रह गई थी.

मैं जूठे बर्तनों की आखिरी ख़ेप सिंक में रख कर, खड़ी वसुंधरा के पीछे से … अपने दोनों हाथों से वसुंधरा के दोनों कन्धों और गर्दन की मांसपेशियों की जैसे मसाज़ करने लगा.कोलकाता का बीएफ दिखाइए: मैंने मनु को दस बजे कॉलेज के बाहर मिलने को कहा था, पर कमीनी अभी तक नहीं आई थी.

मैंने सोचा क्यों ना मैं भी अपने जीवन की असली घटना को आप लोगों के साथ शेयर करूं.तभी संजय मेरे कान में बोला- आई लव यू!मैंने उसकी तरफ देखा और संजय ने फिर मुझे बेड पर लिटा लिया.

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उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया और चूस चूस कर लंड का सारा पानी अपने मुँह से गटक गई.वो शेल्फ से नीचे उतरी और मेरे सामने नीचे बैठ कर मेरा लंड पकड़ कर बोली- अब करो.

अब मामी का दर्द कम हो गया और वो नीचे से गांड उठा कर सहयोग देने लगीं. कोलकाता का बीएफ दिखाइए मैंने उसकी अंडरवियर उतार दी और मैं उसका लंड देख कर थोड़ा थोड़ा डर गई.

उसकी पैंटी से आ रही उसके प्रिकम की खुशबू मेरी सांसों में घुलने लगी.

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इस बात को कमीनी परमीत ने दूसरे तरीके से लिया और दोहराते हुए कहा- अच्छा जो भी करेंगे!इस पर दीदी हंस पड़ीं और मनु शरमा गई. अब उसको क्या बताऊं कि जो बिमारी उसको हुई है उसको प्रेम रोग नहीं ‘चुत का भूत’ कहते हैं. मैंने अपने मोबाइल में एक सेक्सी ब्लू फिल्म को चला दिया और उसको टीवी पर चला दिया ताकि माहौल गरमा जाए.

फिर वो बोले- लेकिन मम्मी आज सुबह ही बंध्या ने उन दो सेठों से मिलने से ऐेतराज कर दिया था. संदीप आदमजात नग्नावस्था में था और मैं अभी भी ब्रा पैंटी की कैद में बंधी हुई थी. असल में प्रकाश की बीवी भी इन्शयोरेन्स कम्पनी में थी और वो नहीं जाना चाहती थी प्रकाश के साथ.

मेरी हथेली को देख कर बिक्कू ने ऐसे मुझे देखा कि जैसे उसके मुंह से रोटी का निवाला छीन लिया हो मैंने. इससे स्नेहा भाभी की सिसकारियां निकलने लगीं- ओओह … ह्ह्ह्ह्हा …क्या बताऊँ दोस्तो, मैं इस बार इतनी सेक्सी भाभी की चुदाई कर रहा था कि लंड को तृप्ति मिल गई थी. उसने अब स्कूटी की रफ्तार धीमी कर दी थी और वह चूत पर मेरी उंगलियों की छुअन को महसूस कर मजा लेने लगी थी.

संदीप के भाई ने एक मेमने का जिक्र किया, वो उसके साथ खेल कर बहुत खुश रहता था. फिर मैं लेट गया और उसे अपना लंड चूसने को कहा। वो मेरा लंड चूसने लगी। कभी पूरा लंड मुँह में ले जाती तो कभी ऊपर से नीचे तक जीभ फिराने लगी।कुछ ही देर में मेरा लंड दोबारा खड़ा हो गया.

भाभी की गर्म चूत पर जब मेरी जीभ लग रही तो भाभी के मुंह से सिसकारी निकल जाती थी.

मनु ने दरवाजा खोला और दीदी ने अन्दर आकर सामान रखते हुए मेरे और परमीत के बारे में पूछा.

तभी दीदी जीजा जी के पास आकर उनके लंड को सहलाते हुए उन्हें किस करने लगीं. उसमें उसकी चूचियों के निप्पल कड़क हो रहे थे जो कि साफ नजर आ रहे थे। उसकी चूचियों को नंगी करके मैंने कसकर भींच दिया तो उसकी सिसकारी निकल गयी. फिर वो मजाक के लिए माफी मांगने लगा, तो मैंने कहा- छोड़ो सारी बात और ये बताओ कि तुमने मुझे क्यों रोका है?तो संदीप ने एक गहरी सांस ली और कहा- मुझे पता है तुम्हारा बर्थडे अगले महीने की दस तारीख को आएगा, पर मेरा बर्थडे तो कल ही है.

मेरा खड़ा लंड देख कर वो खुश हो गई और अपने हाथों को लंड पर फेरने लगी. पूरा लौड़ा चुत में पेलने के बाद मैं थोड़ी देर के लिए यूं ही रुक गया और चुत की गर्मी का अहसास करने लगा. जब मैं बाहर आया, तो श्वेता दीदी ने मुझसे पूछा- क्या हुआ अर्णव … तू अभी तक सोया नहीं.

उसके मुँह से चीख नहीं निकली बस मेरे मुँह में ‘गुउन गुउन’ ही करती रही.

पर मेरे को जल्दी थी, तो मैंने उसकी शर्ट को फाड़ दिया और निधि के मम्मे सामने आ गए. मनीषा ने हैरान होते हुए पूछा- इस समय?तो रेखा ने कहा- चाचा जी को खुश करने का यही सही समय है. सपना बोली- क्यों कोई लड़की पहली बार देखी है क्या … और कभी किसी से मिले नहीं … कभी किसी से बात नहीं की?मैं- मिला हूँ, देखा भी है और बात भी की है … पर इस तरह अकेले कभी नहीं मिला.

पर शायद दीदी को रफ्तार ना काफी लगा … तभी तो दीदी खुद ही डिल्डो की ओर कमर उछालने लगी थीं. ”कैसे हो जायेगा? कोई हंसी खेल है क्या?”तुम उसे बुलाओ तो सही, हंसी हंसी में ही हो जायेगा. दो कॉफ़ी के बड़े-बड़े मग्गों में उबलती-उफ़नती कॉफ़ी डाल कर और दोनों मग्गों को एक ट्रे में रखकर आगे-आगे वसुंधरा और पीछे-पीछे मैं … बैडरूम में पहुँचे.

बेटा शैली, तुम मेरी सेक्स की जरूरतें पूरी तो नहीं कर सकती लेकिन कम जरूर कर सकती हो.

मैंने मजाक करते हुए कहा- क्यों तुम्हारे भाई ने तुमको अच्छे से नहीं चोदा?आलिया- शटअप … वैसे तो तुम चारों जेन्टलमैन लगते हो … लेकिन रात को एकदम हरामजादे बन जाते हो. ये बात मैं विस्तार से इसलिए बता रही हूँ क्योंकि अगर हम सबके पास पर्सनल नम्बर होते, तो ऐसी बातों को भी फोन पर ही खुल कर बतिया लेते और मन शांत हो जाता.

कोलकाता का बीएफ दिखाइए अगले दिन मैं फिर से जल्दी तैयार हुआ लेकिन फिर वो उसी किरायेदार से लिफ़्ट लेकर चली गयी. विवेक ने जोर से तीन-चार जोर के धक्के लगाये और उसका गर्म गर्म लावा मेरी गांड में गिरने लगा.

कोलकाता का बीएफ दिखाइए उनके आने की जान कर मैं तो मन ही मन अपनी सलहज का दीदार करने को बेताब हो गया था. चाची भी कहने में लगी थीं- आह पेल दे … मेरी चुत ने ऐसा लंड पहली बार चखा है … आह ऐसे लंड का टेस्ट बड़ा मस्त है … आह साले आज फाड़ डाल अपनी चाची की चुत को.

फिर भाभी लंगड़ाती हुई उठीं और बाथरूम में जाकर खुद को साफ़ करके बच्चों का नाश्ता तैयार करने चली गईं.

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मैंने प्रीति को कहा- प्रीति, कभी इस चुदाई को भूल नहीं पाऊँगा मैं!प्रीति मेरे सामने बिना कपड़ों में मेरी गोदी में बैठी थी. दो मिनट के चूतफाड़ धक्कों के बाद मेरे लंड ने मेरी नातिन की टाइट चूत में थूकना शुरू कर दिया. सारा थूक मॉम के मुंह से गिरता हुआ उनकी मस्त मुलायम चूचियों पर गिर रहा था। यह चीज शर्मा अंकल भी देख रहे थे और फिर वो मॉम की गर्दन को अपनी जीभ से चाटते हुए मॉम की चूचियों पर पहुँच गए.

उसकी रेशम सी मुलायम त्वचा को छूने का मजा ही कुछ और था, हाथ जैसे रुई पर घूम रहे थे. उसने इतनी जोर से मेरे दूधों को भींचा कि मेरे मुंह से चीख निकलने को हो गई मगर क्योंकि मेरे मुंह से विवेक का मुंह जुड़ा हुआ था इसलिए वो चीख बाहर नहीं आ पाई. अब दोनों मर्दों को पता था कि मैं गर्म हो चुकी हूँ और दोनों से मजा ले रही हूँ.

राजन की आँख रात दो बजे खुली, उसने धीरे से शोभा को उठाया और ड्राइंग रूम में ले जाकर सोफे पर शुरू हो गए.

मैं भी बिल्कुल आंटी की तरह पीछे से उन पर झपट पड़ा और उनकी गांड को मसलने लगा. फिर श्वेता दीदी ने मेरी दीदी को इशारा करते हुए कहा- इसे यहां से भेजो. दीदी खड़ी होकर अपने कपड़े लेकर अपने कमरे में चली गईंमेरी आंख लग गई और मैं सो गया.

मेरे डिस्चार्ज होने का समय आया तो मैंने उसके मुंह से निकालकर लण्ड को अपनी लुंगी में लपेट लिया और शैली के हाथ में दे दिया. मैंने उस दिन साड़ी नहीं पहनी क्योंकि मैं डर रही थी कि अगर वहां कुछ गड़बड़ हुई, तो साड़ी पहनने में ज्यादा टाइम लगेगा. मैंने बाहर निकाल कर फिर से क्रीम लगाकर पेला और जोर से झटका मारा तो पूरा लण्ड अन्दर चला गया.

धीरे-धीरे उसके पेट पर चूमते हुए मैंने उसकी चूचियों को मुंह में भर लिया. मैंने कभी नहीं सोचा था कि कोई लड़की भी इतनी जोर से तमाचा मार सकती है.

ऐसे ही 15 मिनट की ताबड़तोड़ गांड चुदाई में मैं बेहद थक चुकी थी और आगे चुत में उंगली चलाने से भी 2 बार झड़ चुकी थी. उसने खुद ही अपनी टांगें मेरे सामने फैला दीं और मैंने उसकी फैली हुई टांगों के बीच में उसकी फूली हुई चूत में उंगली करना शुरू कर दिया. दोस्तो, मैं आप सबके सामने अपनी पिछली कहानीकमसिन कुंवारी चूत को उसके घर में चोदा-1का अगला भाग लेकर हाजिर हूं.

जब बिक्कू ने मेरा ध्यान दरवाजे की तरफ दिलाया तो मैं कहने लगी- अभी रहने दे बिक्कू, थोड़ी ही देर में मेरा भाई और मेरी मां आने वाले हैं.

उधर दीदी जीजा जी की गोद में जा कर बैठ गईं … और जीजा जी के हाथ से सिगरेट लेकर धुंआ उड़ाने लगीं. अब शाम को जल्दी आ जाना, मैं कंट्रोल नहीं कर पा रही हूँ बहुत दिन हो गए हैं. कुछ दिन बाद परीक्षा नज़दीक होने के कारण मेरे पिताजी ने हमारी घर की टीवी केबल निकलवा दी … तो मैं दुखी हो गया.

वो अंकल के लंड से चुद जरूर रही थीं पर उनको मजा की जगह दर्द हो रहा था. इसी बीच मैंने पूरा का पूरा पेटीकोट उनकी कमर तक ऊपर कर डाला और मालकिन की गोरी गोरी बड़ी मादक गांड पूरी तरह से नंगी हो गई.

अगर कामकाजी होता तो नौकरी कर रहा होता या फिर पूरी फैमली होती तो फिर अपने में कंट्रोल करता. अब मैंने धाम रखे आंसुओं को बह जाने दिया और कहा- धोखा कैसा संदीप? तुम कहना क्या चाहते हो?इस पर संदीप की आंखें भी छलक आई थीं. मैंने अपनी आंखें बंद कर ली क्योंकि यह प्यार मुझे मेरे हस्बैंड से नहीं मिलता था.

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उन्होंने मेरी ओर कातिल मुस्कान से देखा और फिर दोबारा से अपनी आंखें बंद करके सोने का नाटक करने लगी.

परमीत बिंदास लड़की थी, पर उसका इतना खुलापन हमारी समझ में नहीं आ रहा था. आज हमारा इस तरह से मिलने का पहला अवसर था … लेकिन हम दोनों अच्छे से जानते थे कि आज हमारे प्यार की मंजिल को पाना है. मैं भी पूरी नंगी उन दोनों के बीच में मचल रही थी।अब मेरे दूध के निप्पल को कस कस कर अभय ने नोचना शुरू कर दिया.

मैंने देखा कि वो अपने कपड़े ठीक करते हुए अपने रास्ते की तरफ बढ़ रहे थे. उसके बाद में जब भी मौका मिल जाता था, हम दोनों खूब सेक्स का मजा ले लेते, पर अब भईया का ट्रांसफर दूसरे शहर में हो गया है. एक्स डबल एक्सउनकी उंगलियों को मुँह में लेने लगा और उनके मम्मों को बेतहाशा दबाना चालू कर दिया.

आप कहो तो मैं अभी आ जाऊं दिल्ली!वो मुझसे मना कर दिया करती थीं कि आप अभी रहने दो, मैं खुद ही आ जाऊंगी. दोस्तों क्या गांड थी, पीछे से चुदाई करने में इतना मज़ा आ रहा था कि बस मन कर रहा था कि इसको जीवन भर ऐसे ही चोदूं … कभी अलग ना होऊं.

अभी जॉब की तालाश में हूँ।मैं दिखने में खुद को हैंडसम तो नहीं बोलूंगा लेकिन हां, मैं एवरेज लुक्स वाला हूं और देखने में ठीक-ठाक दिखता हूं।यह मेरी पहली कहानी है सड़क पर गर्लफ्रेंड की चुदाई की. मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और लन्ड को चूत के अंदर प्रवेश देने लगा. काफी बड़ा घर था जिसके आधे हिस्से पर मेरा कब्जा था और बाकी आधा बड़े भैय्या का था.

इसलिए मैं पोर्न देख कर मुठ मार लिया करता हूँ और अपनी जवानी की आग को शांत कर लेता हूं. फव्वारे के छूटने का समय आया तो लण्ड का सुपारा फूलकर संतरे के साइज का हो गया, अन्दर जाकर ठोकर मारता तो ममता उम्म्ह… अहह… हय… याह… करने लगती जिससे मेरा जोश और बढ़ जाता. मेरे फेसबुक स्टेटस हिंदी में ही होते थे और वो उन पर अक्सर अपना कमेंट किया करती थी.

जैसे ही इस बात का एहसास हुआ, मैंने खुद का चेहरा अपने ही हाथों से छुपा लिया और अपनी दोनों टांगों को एक दूसरे से चिपका दिया.

फिर मैंने हैंड टॉवल लिया और उसको गर्म पानी में भिगो कर उसकी चूत पर रख दिया. मनु सायकिल से उतर कर पास आई और मेरे हाथों को पकड़ कर मुझे मेरी ही घड़ी दिखाकर बोली- जरा ढंग से देख कुतिया … अभी दस ही बज रहे हैं और मैं समय से पहले ही तेरे पास आ गई हूँ.

जैसे ही उसने जोर लगा कर मेरी ब्रा को खींचा तो उसकी इलास्टिक टूट गई. मैंने लंड को हल्का सा बाहर खींचा तो उसके मुंह से उम्म्ह… अहह… हय… याह… करके दर्द भरी सिसकारी सी निकल गयी. डिनर-टेबल की मास्टर्स चेयर पर बैठी वसुंधरा अपने बायें हाँथ की कोहनी टेबल पर टिका कर अपनी बायीं हथेली से अपनी ठुड्डी को सहारा दिये अपलक मेरी ओर देख रही थी.

तो उन्होंने मेरा डर कम करने की कोशिश की- पूरा नहीं, जितना ले सकता है उतना ही ले, ज़्यादा ज़बरदस्ती नहीं है।मैंने उनके आंड से लंड तक अपनी जीभ को बाहर निकाल कर चाटा और उनको मज़े आने लगे। मैंने उनका लंड मुँह में लिया जो मुश्किल से आधा ही मेरे मुँह के अंदर गया।भैया ने थोड़ा सा धक्का दिया तो थोड़ा सा और अंदर चला गया पर मेरी जैसे साँसें रुक सी गयी. मुझे तो ऐसा लग रहा था … जैसे आज मुझे पहली बार कोई भाभी चोदने के लिए मिली हो. निधि ने कुछ दिन तो बर्दाश्त किया पर अंत में वो मुझे छोड़ कर अपने माता पिता के पास चली गई, बात तलाक तक पहुंच गई.

कोलकाता का बीएफ दिखाइए कुछ समय ऐसे चोदने के बाद वो मेरे ऊपर आ गयी और मेरे लण्ड को हाथ से पकड़ के अपनी चूत पर सेट किया और ऊपर नीचे होने लगी. वसुंधरा! यह यह … मैं! कैसे … क्यों …??” सेंटर-टेबल पर कॉफ़ी का करीब-करीब खाली कप रखते हुए मैं हकलाया.

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हनी की एक चूची मूंह में लेकर मैंने चूसना शुरू किया और दूसरी को सहलाने लगा. मैं आदी से बोली- क्या देख रहे हो?उसे ये बोल कर मैं आईने में अपने बाल संवारने लगी. राजन ने ममता से पूछकर सिगरेट जलाई और हँसते हुए उसकी ओर भी डिब्बी बढा दी तो ममता ने एक सिगरेट निकाल ली.

किंतु गांडू की जिन्दगी की उलझनों का सागर इतना गहरा है कि उसकी तलहटी में कोई झांकने की कोशिश भी करे तो घनघोर अंधेरे के अलावा कुछ दिखाई ही नहीं देगा. काफ़ी देर तक मैंने उसका लंड चूसा और फिर मैं उसके ऊपर आकर लेट गयी और उसके लंड को अपनी फुदी पर सैट करने लगी. फटाके pngथोड़ी देर में मेरा दर्द कम हो गया था और कहानी में नायक पोजीशन बदल कर चुदाई करने वाला था.

अंकल दीदी की चुत चुदाई के साथ उनकी दोनों चुचियों को मसलने में लग गए.

उस चुदाई के बाद से में मेरा जब भी मन होता या उनका मन होता, तो वो मुझे फोन करके बुला लेतीं. ज़ेबा रोनी सी सूरत बनाते हुए बोली- भाई … प्लीज़ आप आज कुछ मत कीजिएगा.

तभी पड़ोस वाले शर्मा अंकल को देखा जो कि हमारे ही घर की तरफ आ रहे थे. तब मैंने उनसे कहा- ठीक है, तो चलो सोते हैं।तो चाची बोली- तुम आगे चलो, मैं आई. जिस दिन मेरी छुट्टी होती थी तो उस दिन मैं भी चाची की मदद घर के कामों में करती थी.

और हां आज मैं सच में बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी, कपड़ों की वजह से नहीं, बल्कि अंतर्मन की खुशी की वजह से.

आशू के साथ उसके चार दोस्त बैठे थे।मुझे उनकी तरफ आता देख एक ने बोला- वो देख आ गयी आशू की रंडी!फिर सब हँसने लगे।आशू- क्यों री … कल बुलाया तो क्यों नहीं आई?देखो मैं ऐसा वैसा कुछ नहीं करने वाली अब, वैसे भी हमारा ब्रेकअप हो चुका है. लेखक की पिछली कहानी थीकुंवारी लड़की की चुदाई का सपनासेवक राम मनवानी हमारे मुहल्ले में रहते हैं. बॉस ने मुझे बैठने को बोला और फिर बताया- परसों तुम्हें एक एड शूट करने एक हफ्ते के लिए लुधियाना जाना है.

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कुछ पल बाद मैंने स्नेहा भाभी को पीठ के बल लेटा दिया और उनकी दोनों टांगों के बीच में आ गया. हमने संदीप को सोफे पर बिठाया और उसकी आरती उतारने के बाद बारी-बारी से मंगल टीका लगाया. उसके मुँह से चीख नहीं निकली बस मेरे मुँह में ‘गुउन गुउन’ ही करती रही.

मैं बेजान बुत बनी उनके निर्वस्त्र बदन को निहारे जा रही थी और दीदी को मेरे होने ना होने का कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था. आपको मेरी सेक्स कहानी अच्छी लगी या नहीं? ईमेल करके अपने विचार जरूर बताना. ऐसा लग रहा था जैसे कोई आसमान से परी उतर कर मेरे साथ उस कूपे में बैठ गई है।उसकी काली आंखें, तीखी नाक … मुस्कुराती थी तो ऐसा लग रहा था जैसे होंठों से फूल झड़ रहे हों.

वसुंधरा! यह यह … मैं! कैसे … क्यों …??” सेंटर-टेबल पर कॉफ़ी का करीब-करीब खाली कप रखते हुए मैं हकलाया. मैंने उसकी आँखों में देखा, तो वो फिर से मेरे हाथ से अपनी चूची सटाते हुए मुस्कुराने लगी. तो हुआ यूं कि जब मैं, नीरू और वन्दना सोलन से वापिस आ गए तो कोई हफ्ते दस दिन बाद मुझे वन्दना का व्हाट्सएप पर मैसेज आया ‘कॉल मी व्हेन यू फ्री’यानि जब तुम फ्री हो तो मुझसे बात करना!मैंने अंगूठे का निशान बना कर ओके लिख दिया.

भाभी- अच्छा … वो क्या नजरिया था?मैं- छोड़ो … मुझे ये दर्शन की बातें नहीं करनी. मैंने बाहर से उनको देखने का जुगाड़ बनाया और एक खिड़की की झिरी से अन्दर झांक कर देखा, तो मैं दंग रह गया.

आलिया- कैसा गया एक्जाम?मैं- हमेशा की तरह बेहतर … वैसे आज आप बहुत सुंदर लग रही हैं.

जब मैं वापिस आया, तो मैंने शर्ट उतार कर अपनी एक फोटो खींची और रात को रंजीत को सेंड कर दी. एमपी की सेक्सी पिक्चरउन्होंने मुझे बताया कि अब तो तुम मेरी धर्मपत्नी हो, अब मैं जब चाहूँ, तब तुम्हें प्यार करूंगी. सेक्सी वीडियो देहाती एचडीमैंने यहां पर बहुत सी सेक्स कहानियां पढ़ी हैं पर सबसे ज़्यादा मुझे देवर भाभी की सेक्स कहानियां ही पसंद हैं. भाभी मेरे दिल की बात समझ गई और उसने अपना मुँह खोलकर लंड चूसना शुरू किया.

दिन भर साईकिल पर बैठ कर हर जगह घूमा, पर कुछ भी उधारी वसूल नहीं हुई.

कुछ देर बाद मैं नीतू के मोम्मे चुसकने लगा, हम दोनों के जिस्म की आग को शावर से निकलते ठंडे पानी ने फिर से भड़का दिया. मेरी रीयल सेक्स स्टोरी उस वक्त घटित हुई जब मैं एक दूर के रिश्तेदार की शादी में गया हुआ था. उसके बाद उन्होंने सही निशाना लगा कर मेरी चूत में एकदम से लंड को घुसा दिया.

मैंने शैली को कहा- बेटा, चाय तो बहाना थी तुम्हें बुलाने का, मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी. मैंने पूछा- इसमें क्या मिला है?भाभी ने कहा- इसमें प्यार बढ़ाने वाली गोली मिलाई है. वैसे मैं आपकी जानकारी के लिए एक बार फिर से बता देता हूं कि मैं भी दिखने में स्मार्ट था और अभी भी मैंने अपनी स्मार्टनेस को बनाकर रखा हुआ है.

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वो दरवाजे से टिक कर किसी रंडी से जैसे खड़ी थी और उसके रसीले होंठों में रेड डार्क लिपस्टिक लगी थी, एड़ियों में ब्लैक कलर के हाई हील्स पहने हुए.

जिसमें मैंने कल्पना की है कि मैं शिखा मामी की चुदाई किस तरह से करूंगा.

तब तक वो दो बार झड़ चुकी थी।मैंने कहा- कहाँ निकलना है?उसने कहा- अपनी बीवी से कोई पूछता है कि कहाँ निकाले? अब अपने बच्चे की माँ नहीं बनाएगा क्या?वो ऐसे बोली तो मैं उसके बोलते बोलते झड़ गया … मेरा सारा माल उसकी प्यासी चूत के अंदर ही निकल गया. तो उन्होंने कहा- खाना रख दे!और वे बेड से उठ गये और बोले- लंड चूस!और अपने पजामे से लंड निकाल खड़े हो गये।मैंने कहा- नहीं, रोटी खायी है मैंने, अब नहीं होगा. मुस्लिम ब्लू पिक्चरफिर सर ने पूछा- रजनी, तुझे कैसा लगा?मैंने कहा- सर बहुत अच्छा!तो सर बोले- क्या तुम और ज्यादा मजा लेना चाहती हो?मैंने कहा- मैं कुछ समझी नहीं सर?तो सर ने कहा- यहां मेरे 2 कॉलेज के दोस्त आये हुये हैं और एक भानुप्रताप (मेरे भी रिश्तेदार वो अंकल जिनका जन्मदिन था) वो तीनों तुझे चोदना चाहते हैं.

अगर तू कुछ करना ही चाहता है तो हम किसी और दिन कर लेंगे या फिर 24 तारीख को शिल्पा दीदी के शादी के दिन ही तू भी कर लेना. मैं बोला- चलो मान लिया, उसने तुम्हारे साथ कुछ नहीं किया लेकिन तुम्हारी बुर बताती है कि इसकी चुदाई हुई है. जब मुझे भी मेरी गांड में जीभ चलने अहसास हुआ तो मैं चिहुंका, मेरे चिहुंकने से मेरी नजरो से बचती हुई सायरा फिर से मेरे लंड और अण्डों के साथ खेलने लगी.

जिस दोस्त ने ये बात कही थी, उसकी ये बात सुनकर मुझे कुछ अज़ीब सा लगा. चूंकि मैंने उनको पहले कभी बुरी नज़र से नहीं देखा था … इसलिए मुझे उनकी फिगर का सही सही अंदाजा अब तक नहीं था.

साले ये सारे अंकल मेरे बाप की उम्र के थे, पता नहीं क्या खाकर आये थे, सब के सब देर तक चोद रहे थे.

आलिया भी कामुक आवाजें करते हुए अपने भाई के लंड से चुदाई का आनन्द ले रही थी. आप जब नहाने गए थे, तब मैं घर ही आपको सरप्राइज देने के लिए छुप गई थी. जब भी मुझे छुट्टियों में फ्री रहना का मौका मिलता, तब या तो मैं वहां चला जाता या आलिया दिल्ली आ जाती थी.

हिंदी में चुदाई हिंदी में जब सफल नहीं हो पाती तो वो भी मेरे सुपारे को काट लेती और मुझे हारकर दांत रगड़ना बन्द करना पड़ता।काफी देर तक हम दोनों के बीच ऐसा चलता रहा. उन्होंने ये आईडिया अपनी सहेलियों को बताया, तो उनकी एक सहेली ने भी मुझे एक दुल्हन की तरह सजाया और फिर मुझसे चुदाई करवाई.

वो बोली- अच्छा, और वो तेरा यार आशीष? मैं जानती हूं कि तू ये सब उसी से सीख रही है. मेरी मां ने मुझे दूल्हे यानि कि मेरे मामा का कमरा सजाने के लिए काम दे दिया था. वे उधर अपने दोस्त के बेटे की शादी में जा रहे हैं … और कुछ बिजनेस की मीटिंग भी हैं … इसलिए हम मुंबई ही रहेंगे … मॉम-डेड के आने के बाद देखते हैं.

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विवेक ने मेरी नाइटी को अब और ऊपर किया और मैंने अपने हाथों को ऊपर की तरफ उठा लिया. अब आगे:जीजा जी ने मेरी आंखों की वासना को पढ़ते हुए कहा- मेरी बहन तो बाथरूम में है, लेकिन तुम अपनी दीदी के साथ दूसरा राउंड शुरू कर सकते हो. मेरे जीजा ने अपने काम निकलवाने के लिए मुझे उन सेठों से चुदवाया दिया था.

मैंने पूछा- क्यों भैया का तगड़ा नहीं है क्या?प्रिया- उसका तगड़ा होता, तो आपके लौड़े को मैं घास भी नहीं डालती. उसके मजे को और बढ़ाते हुए बीच-बीच में उसकी गांड के मुहाने पर अपनी जीभ चला देता या फिर उसके भगान्कुर को अपने मुंह के अन्दर लेकर आईसक्रीम की तरह चूस रहा था.

उसकी तरफ से कोई हरकत नहीं हुई, तो मैं उसके चूतड़ चूमने लगा, मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा.

उन मित्रों तथा पाठकों के स्नेह व गुरूजी के सहयोग के लिए हृदय हमेशा आभारी रहता है. फिर वो खुद ही अपनी चूत को मेरे लंड पर रख कर उसको मेरे लंड की तरफ धकेलने लगी. मैं बाहर गई और देखा तो पूरा घर खाली था केवल वह नौकर और हम तीन लड़कियां ही बची थी.

ऐसा अक्सर जब ही होता था, जब चाचा घर पर नहीं होते थे, कहीं काम से गए होते थे. हम दोनों को सेक्स करते करते आधा घंटा हो चुका था और वो अब तक तीन बार झड़ चुकी थीं. इस बार मुझे ज्यादा दर्द नहीं हुआ और अब मैं उस पर तेज तेज से उठने बैठने लगी.

लंच के कुछ देर बाद घंटी बजी और सभी लोग अपने अपने क्लास रूम में चली गईं.

कोलकाता का बीएफ दिखाइए: और जोर से चोद और जोर से!वो ऐसे बोल बोल कर मुझे उत्साहित कर रही थी- चोद चोद … आज प्यासी मत छोड़ना मेरी चूत को … बहुत दिन हो गए थे इसे हथियार के दीदार किये हुए. उसके बाद फिर मेरी क्लास का टाइम हो रहा था, वो मुझे छोड़ने के लिए भी आई.

कोई पांच मिनट की चुत चुसाई में वो बुरी तरह से अकड़कर झड़ गयी और उसकी चुत से नमकीन अमृत निकलने लगा. जैसे जैसे मेरे हाथ उसकी चूत की तरफ बढते थे तो उसकी जांघें अपने आप ही फैलने को हो जाती थीं. उसकी जीभ जैसे ही मेरे लंडमुंड से छुई, जैसे पूरे बदन में तरंगें दौड़ गयी, उसका गर्म मुँह और गीली जीभ मेरे लंड को बहुत सुहायी.

मैं इशारा समझ गई थी, मैंने भी दीदी की गीली चूत मुँह लगा दिया और अपने ही अंदाज में उनकी चूत चाटना शुरू कर दिया.

साले ये सारे अंकल मेरे बाप की उम्र के थे, पता नहीं क्या खाकर आये थे, सब के सब देर तक चोद रहे थे. थोड़ी देर बाद मैंने नीतू को सीधा किया और उसे शेल्फ पर बिठा दिया और उसकी थोंग उतारने लगा. फिर मैं खड़ा हो गया और उनको नीचे बिठाया और जोर जोर से धक्के मारने लगा और पूरा पानी उनके मुंह में ही छोड़ दिया.