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बुआ और चाची तो फिर भी दादाजी का लौड़ा ले लेती हैं, बेचारी कामिनी भाभी को लौड़ा चूसे और लिए हुए काफी वक़्त हो गया है, वो भी आज लौड़ा देख कर कल की चुदाई की तैयारी कर लेगी वर्ना इतने वक़्त से मेरी चूत चाट कर गुज़ारा कर रही हैं. संजना पूरी तरह से किरदार में घुसी हुई थी।अचानक गुप्ता जी चूचियों को चूसते हुए अपना हाथ संजना के पेंटी पर ले गए, संजू की पेंटी पूरी तरह से भीग चुकी थी, गुप्ता जी संजू की पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगे।चुत पर हाथ लगते ही संजना ‘ईस्स. पर अभी मेरा नहीं निकला था, तो मैंने फिर से उसे किस किया और किस करते करते उसकी एक पैर को कन्धे पर रखकर मेरे लंड को उसकी चूत में डाल दिया और फिर धक्के लगाने लगा.

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और निप्पल लालिमा लिए हुए थे।गुप्ता जी संजना के कान को चुभलाते हुए उसकी गर्दन पर किस करते हुए गर्दन से नीचे दोनों चूचों के बीच अपनी जीभ फिराने लगे और वे दोनों हाथों से उसकी चूचियों को मसल भी रहे थे।संजना ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… सी. फिर थोड़ी देर बाद विकास ने मुझे जाने को कहा पर मैंने फिर मना किया तो गौरव ने अपना फोन निकाल के तुमसे बात की- हाँ कविता! तुम आज मत आना आज रोहन बिजली बिल पे करने जा रहा है, और हम भी घर पर ही रहेंगे तुम उससे कल मिल लेना।फिर मुझसे कहा. सुबह उठा तो मेरे सर से वासना का भूत उतर चुका था, अब मुझे चाची के साथ किये गए बेशर्मी से मुझे शर्म महसूस हो रहा था, मैं उठ कर बाथरूम गया और तैयार होकर क्लिनिक चला गया.

तभी दिमाग में ख्याल आया क्यों ना इसे पटाने की कोशिश की जाये।थोड़ी देर तक यही सोचता रहा.

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सक्षम कुंवारा है और पुणे में जॉब करने के लिये आया है। लगभग उसको दो महीने हो गये थे उस रूम में रहते हुए और आसपास रहने वालों से उसकी दोस्ती हो गई थी और इसी तरह से उसके दिन व्यतीत हो रहे थे. अब बीवी का जो पैर जमीन पर था, वो दर्द कर रहा था, उसने बेड पर का पैर जमीन पर रखा और जो पैर जमीन पर था वो पैर उसने बेड पर रख दिया. और जब मेरा माल निकला तो उसने सारा अपने मुँह में लिया, माल गिरा भी बहुत, और शायद थोड़ा बहुत उसके गले में भी उतर गया, मगर उसने मेरा लंड तब तक अपने मुँह से नहीं निकाला जब तक मैं खाली न हो गया.

मुझे उस इन्सान का चहेरा साफ़ नहीं दिखाई दे रहा था तो मैं साइड से एक पेड़ के सहारे देखने लगी. मैं आंटी के पेट को चाट रहा था और धीरे धीरे उनकी झाँटों को चाटने लगा, आंटी मस्ती में आवाजे निकाल कर हिल रही थी. ह अह्ह… ऊऊओह्ह्ह… क्या चूत है तेरी… आह्ह्ह!आलोक भी- आह्ह सीई चाची वास्तव में बहुत मस्त है तेरी चूत… ओह क्या मजा आया आया अ आ रहा है.

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वो मैंने कभी सोचा तक नहीं था।तो बिना आप सब का वक्त गंवाए शुरू करता हूँ कि आखिर ऐसा क्या हुआ मेरे साथ और किस प्रकार मैंने एक रेगिस्तानी इलाके में एक अनजान लड़की के साथ एक रंगीन रात गुजारी।एक बार मैं और मेरा दोस्त विकास बाईक से किसी काम के सिलसिले में हमारे गांव से करीब 70 किलोमिटर दूर गए थे. तीसरे दिन मैंने ऋषि को फोन किया और बोला- ऋषि, फीस भरने की आख़िरी डेट आने वाली है, जल्दी कुछ नहीं किया तो बहुत बड़ी मुसीबत में फंस जाऊँगी. तभी उसने अपना शॉल उतार दिया!इतने मोटे और सख़्त मम्में देख कर मैं पागल हुए जा रहा था.

ऋषि ने मुझे हॉस्टल में जाने से पहले एक आई पिल दी ताकि मैं प्रेगनेंट ना हो जाऊँ.

अब मैं रीना पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगा, उसके जिस्म से एकदम करीब आकर बात करने लगा, वो भी कुछ कुछ सोच पड़ रही थी. एक दिन उसने मुझे बताया कि छुट्टियों में वो हमारे घर आ रही है, मैं खुश हो गया. अब 5 दिन बीत चुके थे और आज गुरुवार था और सोमवार को फीस भरने की आख़िरी तारीख थी.