ससुर पत्तों की बीएफ

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दीमा भी उसके चेहरे के सामने घुटनों पर ही खड़ा हुआ विश्वसुन्दरी की मुख चुदाई करने लग गया. देसी नया सेक्स वीडियोरिचा ने एक बार बताया था कि जब चूत पहली बार फटती है, तो बहुत दर्द होता है.

फिर मैंने उनकी चिकनी जांघों को चूसा और आगे बढ़ते हुए उनकी बिना बालों वाली गुलाबी चूत को देखा. आसामीस सेक्स वीडियोकुछ दिन बाद मैं भी परेशान हो गया कि इसकी जिद तो लम्बी होती जा रही है.

मैं अब अपने आप को रोक नहीं पाया और अपने दोनों हाथों से उनकी जांघों को फैलाकर सीधा ही अपने प्यासे होंठों को उनकी चूत रख दिया.ससुर पत्तों की बीएफ: उसके दिमाग में घुस गया और वो चहकने की स्माइली भेजी और लिखा- ठीक है.

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अब आगे की घटना पढ़ें:यह बात अगले दिन की है, जब मैं सुबह उठा, तो मैंने देखा दीदी और अरु नीचे चली गयी थीं.देख कम्मो, मुझे तुम्हारे घर चलने में कोई आपत्ति नहीं, लेकिन तुम्हारी आंटी, मेरी बहूरानी अदिति को ये बात अजीब लगेगी कि मैं तुम्हारे गांव क्यों जा रहा हूं.

इतना काम करने के बीच में हम दोनों ने एक दूसरे से एक भी शब्द नहीं बोला था. ससुर पत्तों की बीएफ मुझे होश सा आया तो मैंने देखा कि मेरा हाथ कम्मो के कुर्ते के अन्दर उसकी ब्रा के भीतर उसके नग्न स्तनों को मसल रहा था … गूंथ रहा था …मसल रहा था.

मैंने तब पूजा को फिर से पकड़कर ड्रेसिंग टेबल के सामने ले जा करके खड़ा कर दिया और बोला- देख न.

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साड़ी पहन कर जब वो चलती थी, तो पीछे से उनकी एकदम गोल गांड देखकर मेरा लंड मुझे बदतमीज बना देता था. मेरा एक हाथ उनके कूल्हे के नीचे पहुँच गया और दूसरा हाथ उनकी गर्दन के नीचे था. फिर यह सब्र का बांध टूट गया और मैं उसके गालों पर और उसके गर्दन पर लगातार चुम्बन करने लगा.

इतना कहने के बाद पूजा मुझे कसकर जकड़ लिया और बहुत जोरों के साथ कांप उठी और शांत हो गयी. सोनल बहुत ही उत्तेजित हो चुकी थी, वो मेरे सर को उसकी चुत पर दबाने लगी. तो मैंने उससे पूछा- पहले चूत और गांड किससे मरवाई थी?कविता ने घबरा कर मेरी तरफ देखा और बोली- आपके बड़े भाई से.

रेवती को आराम देने के मकसद से मैं अब रेवती के ऊपर लंड को उसकी चूत में डाले हुए ही लेट गया और उसके होंठों को चूमने लगा. ” चाची बोली और उन्होंने काली नाईटी उतार दी।अब वो बड़ी जबरदस्त माल दिख रही थी. अब मैं और कम्मो एक दूसरे का हाथ पकड़े चल रहे थे; किसी भी तरह की शर्म झिझक हमारे बीच नहीं रह गयी थी.

वह दोनों सीधे मेरे बेडरूम में पहुंच गई और नीरू ने मुझको अंदर बुलवा लिया. अंकल की देखा देखी मैंने भी अपनी कमर कुछ ऊपर की ओर जोर से उठाई और लंड पर चूत लग गई.

वह तुरंत बेड पर आ कर लेट गई और मुझको अपने ऊपर खींच कर बोली- राजा जी, पहले मेरी चूत के अंदर डालो, नीरू की चुदाई हम बाद में करेंगे.

साथ ही मैं पाठकों से यह भी जानना चाहता हूँ कि आपको मेरी यह पहली कहानी कैसी लगी.

इतने में एक अंकल मेरी गांड में बहुत सारा थूक लगा दिया और चूतड़ खोल कर गांड चाटने लगे, अन्दर जीभ डालने लगे. मैंने सोचा क्यों ना जो आग रेवती के सीने में जल रही है, उसे थोड़ा और भड़कने दिया जाए. वो मुझसे पूछने लगा कि मैं किससे बात करती हूँ?मैंने उसको कुछ नहीं बताया.

पर मुझे ज़रूरत थी किसी मूसल लंड की, जो मेरी फुद्दी की प्यास को अच्छे से बुझा सके. तब शुरू हुआ शादी का कार्यक्रम। सभी लड़कियाँ भाभियाँ सज-धज के तैयार घूम रहीं थीं और कुछ लोग ऊपर बने कमरों में तैयार हो रहे थे।फिर शुरू हुआ जयमाला का कार्यक्रम!एक तरफ डीजे बज रहा था और लोग नाच रहे थे, कुछ लोग स्टेज पर फोटो खिंचवा रहे थे. कहानी का पिछ्ला भाग:मेरी प्रेयसी और मैं: दो बदन एक जान-1ठीक है … तो फिर बचो मेरे हमलों से! और सुन लो तुम भी कि मैं भी सिर्फ ऊपर से ही सब करूँगा.

अगले ही पल मैंने वहां से बाथरूम में जाकर भाभी के नाम पर मुठ मार दी, जिससे मेरे अंडरवियर पर लंड का पानी लग गया.

मैं- धर्मेन्द्र जी मेरे बूब्स को दबा सकते हो आप?वह- हाँ मगर एक बार ही. मैं बोला- मेरे को कोई दिक्कत नहीं है, आप मेरे को इवनिंग में कॉल कर लेना. जिससे वो उसकी जांघों तक उतर गए और मुझे उसकी काले बालों से भरी हुई चुत व दूध सी सफेद गोरी चिकनी जांघों की झलक दिखने लगी.

महेश एक हाथ से मेरे दूध दबाते हुए मेरी नाक को चूमता हुआ बोला- तू क़यामत है रे साली कुतिया. मैं उनके पास जाकर खड़ा हो गया तो बोलीं- क्या हुआ निकालो ना?मैंने हाथ उनकी तरफ बढ़ा दिए. मेरा पूरा लंड नीरू की चूत में जाता हुआ देख पायल मस्त हो गई थी, उसकी आँखें नीरू की चूत पर टिकी हुई थी.

वो बिल्कुल टाइट थे, उन मम्मों के ऊपर हल्के भूरे गुलाबी रंग के निप्पल तने हुए थे.

मैंने पूछा- क्या हुआ?तो मोहिनी जी बोलीं- अभी मेरे पैर के ऊपर से रेंगते हुए कुछ गया. शाम को ऑफिस से छुट्टी होने के बाद वो मेरे पास आ कर बोली- मैं निकल रही हूँ तुम उसी होटल में 10 मिनट के बाद आ जाना, जहां उस दिन कॉफी पी थी.

ससुर पत्तों की बीएफ पूरे 20 मिनट चुदाई के बाद भाभी की चुत में अपना पानी निकाल कर उनको किस करने लगा और एक फुक्क की आवाज के साथ अपना लंड उनकी चुत से बाहर निकाला और भाभी के बगल में सो गया. मेरी सासू माँ के कड़े दूध मेरी छाती से टकराए, तो मैंने उन्हें कसके बांहों में भर लिया और उनके गालों पे किस करने लगा.

ससुर पत्तों की बीएफ समय बीतता गया मेरी पढ़ाई पूरी हो गयी और मुझे घर के पास ही जॉब मिल गई, जिसके कारण मैं घर पर रहने लगा. मैं ब्रीफ वाला फ्रेंची अंडरवियर पहनता हूँ तो उसमें वो अलग ही पता चल रहा था और शीतल बस उसे ही देख रही थी।फिर मैंने अपना अंडरवियर उतार कर अलग कर दिया और लिंग चूसने के लिए कहने लगा.

मैं समझ रहा था कि वो इमोशनल हो रही थी; चाहत का जो जज्बा, वर्जित फल खा लेने का वो पागलपन हम दोनों पर आज दिन में रेस्टोरेंट में सवार हुआ था वो घोर निराशा में बदला जा रहा था.

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मैंने अपना लंड उनके गले तक डाल दिया और लंड चुसवाने का मजा लेने लगा. ’ की आवाज मारी और हम दोनों ने लंड पेल कर धक्कों की गिनती करते हुए चोदना शुरू कर दिया. तभी पापा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे रोक दिया- नीतू बेटा, अच्छी बच्ची हो ना तुम, ऐसा कोई बोलता है अपनी मम्मा को, से सोरी टू हर, आगे से ऐसी गलती मत करना!पापा मुझे गले लगाते हुए शांति से बोले तो मेरा गुस्सा थोड़ा कम हुआ।सॉरी मम्मा सॉरी डैड, अब आगे से ऐसा नहीं होगा.

उसने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी योनि को छुआ, फिर नाक लगा कर सूंघने लगी. मैंने कहा- ठीक है, मेरी पत्नी को क्या प्रॉब्लम!उसके 3 दिन बाद नीरू पायल को लेकर दोपहर के समय हमारे घर पर आ गई. फिर उसने मेरे निप्पल चूसने शुरू किए और चूस चूस कर उनको खड़ा कर दिया.

उस वक्त मैंने ट्राउजर पहना था, फिर भी मेरा लंड पजामा फाड़ के बाहर आने को तैयार था.

उस दिन के बाद से मैं रवि की बहन को उसके सामने ही नंगा करके रोज़ चोद देता. ऐसे ही थोड़ी देर चूत में लंड लेकर उछलने के बाद वो झड़ गयी … मैं भी उसकी चूत में ही झड़ गया। हम दोनों की सिसकारियों से पूरा कमरा गूंज उठा।कुछ देर के बाद वो उठकर चली गयी बाथरूम की ओर … और मैं सुशीला की ओर चला गया. बस अगले ही पल मैं अपनी असल भाषा में चीख पड़ी- आररीए माई री माईए सी उउउ री माएई रे बाप रे … आअहह!मैंने अंकल की उंगली को बुर में मानो कस लिया और मेरा गर्म गर्म रज बुर में से अन्दर निकलने लगा.

अब तो मेरा सुपारा गुस्से‌ में आकर और भी जोरों से नसें सी फुलाने लगा‌. क्या शानदार नजारा था … मेरा सपना सच हो रहा था … ऐन इसी पोज़ की मैं हमेशा कल्पना करता रहता था. फिर मैंने दांतों से उसकी पैंटी को खींचकर उसके जिस्म से अलग किया और उसके पैरों के बीच में आ गया.

उसने जींस के अन्दर भी लाल कलर की ही पैंटी पहनी हुई थी, जोकि एक बहुत ही पतली सी थी. पता नहीं उसने किस तरह से अपनी ज़ुबान मेरी चूत में डाली कि मैं उसके सर को चूत पर दबाने लग गई ताकि वो बाहर ना निकले.

उफ्फ क्या कीमती नगीना है तेरा …”यह कह कर मैंने उसके लंड पर जीभ फेरी तो उसने मेरा सर दबा दिया. तभी विशाल सर मेरे पीछे आ गए और बोले- तुम बहुत अच्छी हॉकी खेलती हो गीता. तभी वे मेरी एक गाल में हाथ रखकर बोले- मेरी तरफ देखो, यह मेरा घर है, इसे तुम अपना समझो.

वो बोली- अपने आप पर तुमको इतना कॉन्फिडेंस है? तो चल मेरे साथ चलेगा?मैंने पूछा- कहाँ?वो बोली- यहीं कहीं घूमेंगे या पास में कोई होटल देख लेंगे.

देखते हैं, कल पढ़ेंगे!वो बोली- नहीं, तू किताब कॉपी निकाल, मैं अभी आती हूँ।भाभी बाथरूम की तरफ जाने लगी. जब मॉम डैड के मूतने वाली जगह को मुँह में ले रही थीं?मैंने कहा- वो सेक्स का ही हिस्सा होता है. नीरू बोली- जीजी, मुझे नहीं मालूम … लेकिन मैं तो मजे के मारे मरी जा रही हूं.

फिर लगभग तीन घंटे सोने के बाद, पता नहीं कब, कुछ लोग मेरे कमरे में आ गए और मेरे साथ लेट गए. वो भी गरम आवाजें निकाल कर चुद रही थीं और अपने पति को गाली भी दे रही थीं.

मेरे मुंह से लंड शब्द सुनकर धर्मेन्द्र मुस्कुरा दिया, बोला- तो पक्का इरादा करके निकली हो तुम. उसका लालकिला मेरे अधिकार में आ चुका था बस अब उसमें प्रवेश करके उसे भोगना, उस पर राज करना, उसकी प्राचीर की सवारी करना भर शेष रह गया था. ” की एक मीठी सीत्कार भरकर दोनों हाथों से मेरे सिर को जोरों से अपनी चुत पर दबा लिया.

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फिर मेरे पास आकर बैठते हुए पूछा- आपने डिनर किया या नहीं अभी तक?मैं- अभी तक तो नहीं, वैसे भी मैं रात को 10-30 बजे तक डिनर करता हूँ.

खिड़की के उस पार एक साया दिखाई दिया … वो साया मुझे किसी औरत के जैसा लगा. मेरा उठने का दिल‌ तो नहीं कर रहा था मगर सुलेखा भाभी के डर के कारण मैं भी अब उठकर अपने‌ कपड़े पहनने‌ लगा‌ और प्रिया‌ कमरे से बाहर चली गयी. मैं एक छोटे से गाँव के रहने वाली थी लेकिन पहले पढ़ाई और फिर नौकरी के लिए शहर में आ गयी.

मैं एकदम से शर्मा गयी क्योंकि माइक से मेरी ये पहली मुलाकात थी और सहज होने में थोड़ा तो समय लगता ही है. सुलेखा भाभी की साड़ी व पेटीकोट को मैंने पहले ही घुटनों के ऊपर कर दिया था और अब मेरे व सुलेखा भाभी के ऊपर नीचे होने के कारण वो बिल्कुल ऊपर तक हो गए थे. बीएफ पिक्चर भेजिए बीएफउफ्फ … क्या सौंदर्य की स्वामिनी लग रही थी मीता!पूर्णतः नग्न … सिर्फ पेंटी में अपना जोबन सँभाले मीता की मदभरी काया किसी भी मुर्दे में जान फूंकने की महारत रखती दिख रही थी.

रजत जिद करते हुए- अभी बताओं ना माँ… प्लीज!विक्रम- हाँ माँ… बताओ ना… मुझे भी जिज्ञासा हो रही है. मैंने दोनों पैर उसके कंधे पे रख दिए ताकि उसका लौड़ा मेरे बच्चेदानी को छू ले.

इतना कह कर अब राज अंकल ने अपनी हथेली से मेरे पेट को सहलाना शुरू किया और अपनी एक उंगली मेरी नाभि में बहुत हल्के हल्के से डालने लगे. मैं पूजा की चूत चार करारे धक्के मार कर बोला- रानी, एक बात बताओ? लगती तो तुम बहुत सेक्सी और चुदक्कड़ भी, लेकिन तुम कहती हो कि तुम्हारे पति देव एक गांडू इंसान हैं. उनकी नज़र मेरे पर पड़ी, तब उन्होंने एक नज़र अपने शरीर को देखा और मुझे घूरने लगीं, फिर चली गईं.

तो उसने भी उत्सुकतापूर्वक पूछा- क्यों नहीं बनाना है?तो मैंने कहा- आज मैंने डिनर बाहर से ऑर्डर कर दिया है, चल जब तक खाना नहीं आता, कुछ पढ़ लेते हैं. मैं बोली- अभी अभी थोड़ा केला वगैरह खा चुकी हूं, मैं चली जाऊं?तो मम्मी बोलीं- किसी को साथ ले ले. दोस्तो, मैं आपका अपना सरस एक बार अपनी कहानी के अगले भाग के साथ फिर से हाजिर हूं.

यह सुनते ही मुनीर ने मुझे छोड़ दिया और मेरी टांगें नीचे रख कर अलग खड़ी हो गयी.

उस दिन दर्द के मारे मैं इतना ज़ोर ज़ोर से रोई और चिल्लाई थी कि बता नहीं सकती हूं. मैं भी जैसे होश में आ गया; कुछ समय के लिए मैं भूल ही बैठा था कि हम लोग किसी होटल के फॅमिली केबिन में बैठे हैं.

मनीष- भाभी भैया की याद आ रही है क्या?भाभी- हां आ रही है, पर क्या करूँ चार दिन तो काटने ही हैं. मुझे अब यह भी नहीं होश रहा कि क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं, अपने आप कुछ भी अब बोलने लगी. मैंने मनीषा से उसके होम वर्क और कुछ इस तरह की बातें की ताकि वो मुझसे बात कर सके.

फिर भाभी पूछने लगीं कि अगर कोई और लड़की तुमसे ये सब करने को कहे तो क्या करोगे?मैंने कहा- पहले तो उसे जानने समझने की कोशिश करूँगा. जीजू ने पीछे से मुझे अपनी जफ्फी में लिया, तो उनका खड़ा लौड़ा मेरी गांड पर घिसने लगा. वह छह फुट लम्बा, सुन्दर नौजवान अंग्रेज लड़का था, जिसको मैंने तन्त्र योग के बारे में समझा रखा था.

ससुर पत्तों की बीएफ तब मैं बोला- कविता मुँह मेरी तरफ करो, देखूँगा तो मैं ही कि तू अच्छे से पिला रही है या नहीं. करीब तीन घंटे पूजा के बाद पंडित जी ने सोनू ने मंगलसूत्र पहनाने को कहा, तो शिवानी ने सोनू को मंगलसूत्र दे दिया और सोनू ने प्यार से मेरे गले में पहना दिया.

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एक दो दिन ऐसे ही निकल गए लेकिन भाभी को शक होने लगा कि घर में कुछ गड़बड़ है. तभी प्रिया ने मेरी तरफ देखा … प्रिया के देखते ही डर के मारे अपने आप ही मेरी नजरें नीची हो गईं और मैं अपनी बगल झांकने लगा. मैंने सोचा कि अगर ये कोट, स्वेटर वगैरह गर्म कपड़े पहन लेंगी तो फिर इनके जेवर, इनके कपड़े, इनके बूब्स इनकी जवानी कैसे दिखेगी सबको?मैंने तमाम सर्दियों के शादियाँ अटेंड की हैं और सभी में देखा है कि कितनी भी तेज सर्दी हो, ठंडी हवाएं चल रहीं हों पर ये महारानियां गर्म कपड़े कभी नहीं पहनेंगी चाहे बीमार पड़ जायें बाद में.

अब तक की मेरी चुत चोदन कहानी में आपने जाना था कि राज अंकल जमकर पूरी ताकत से मेरी गांड को चोदने लगे थे. करीब पन्द्रह मिनट बाद वो थोड़ा सा नार्मल हुई तो मुझे ऊपर से नीचे तक किस करने लगी. बाथरूम में कैसे नहाती हैमैंने उसके चेहरे की ओर देखा, उसकी आँखों में चरम सुख की तीव्र लालसा दिखी.

उनका मुझसे वो खुलकर बातें करना, हंसी मजाक करना … और बातों बातों में मुझे छेड़ना कुछ अलग सा ही था.

लेकिन वो मुझसे तेज़ थी, जब हाथ ऊपर कर रही थी तो उसने नीचे से मेरी टी शर्ट पकड़ ली. उनके जाने का सोच कर श्रीमती जी एकदम से बिस्तर से उठीं और मुझे आवाज देते और टटोलते हुए मेरे बिस्तर पर आ गई.

और उसके कुछ मिनट के बाद मैंने भी अपना पूरा पानी उसकी चूत के अंदर ही डाल दिया और फिर हम दोनों वहीं घास में लेट गये. थोड़ी देर मैं एकदम शांत पड़ा रहा, जब आंटी की तरफ से कोई हलचल नहीं हुई तो थोड़ी देर बाद मैंने फिर से अपना काम शुरू कर दिया. मेरी तो हर बात में हां है; अब जो सोचना जो करना है वो आप जानो; मैं तो हर जगह आपके संग हूं.

वो मजे लेती हुई बोलने लगी- अअअहह … उहह … उम्म … पेल देदे पूरा … मजा आ गया …करीब बीस मिनट तक मैंने किरण जी को ठोका … इस दौरान वो दो बार झड़ चुकी थीं.

रात के 10 बज चुके थे और आस पास के मकान भी इतनी पास नहीं थे, तो मैंने भी हां कर दी. तभी सुशीला ने एक जोर की सिसकारी छोड़ी जिसकी आवाज पास के दो तीन कमरों तक सुनाई दी होगी. लेकिन नताशा ने मुझसे पूछा- क्या मैं दीमा को अपने घर आने का न्योता दे सकती हूँ?मैंने सहर्ष सहमति प्रदान कर दी और नताशा ने अपने बचपन के सहपाठी को अपने घर आने का न्योता दे दिया.

चोदा चोदी वाला फिल्म वीडियोयह सुनते ही नीरू ने सविता की ब्रा और पेंटी शरीर से निकाल कर बेड से नीचे फेंक दी. हम लोग मिल के भी नहीं मिल सके इसका अफ़सोस तो हमेशा रहेगा मुझे!” मैंने अत्यंत भावुक होकर कहा.

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मैंने आंटी को अब उल्टा लिटा दिया और उनकी गांड को दोनों हाथ से फैला दिया. तो उसने वाशरूम जाने का बहाना बना दिया और बोली कि यहीं बाहर गार्डन में हूँ. पैंटी के ऊपर से ही उसकी बुर पर किस करने लगा और अपनी उंगली डालने लगा.

माइक तारा के पीछे आया और अपना लिंग तारा की योनि में प्रवेश करा दिया. सच कहूं मुझे बहुत दर्द हो रहा था, जब वो मेरी चूची दबा रहा था मगर उस दर्द से कहीं ज्यादा मज़ा भी आ रहा था. वो भी मेरे पीछे बैठ गयी और मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे कस कर पकड़ लिया.

मेरा काम तो तू ही करेगा!” कह कर उसने कंडोम का पैकेट मेरे हाथ में वापिस दे दिया और टाँगें मोड़ कर अपना खम्बा मेरे सामने खड़ा करके वही बैठ गया. माँ उस बैंगन को ऐसे प्यार कर रही थी जैसे कोई लंड हाथ में ले रखा हो. अब चलो मेरी बगल में अपने पैरों को फैलाकर लेट जाओ, मैं तुम्हारे ऊपर चढ़कर तुम्हें चोदता हूँ.

यह बात उस वक्त की है जब मैं पढ़ता था और एक बार अपने बड़े भाई के ससुराल में गया हुआ था. शाम को मीतू दी का मैसेज आया- गजल कैसी लगी?मैं- गजल तो अच्छी थी पर…मीतू- पर क्या?मैं- गजल से ज्यादा तो आपके फोन में वीडियो मस्त थीं.

माइक भी धक्के मार मार कर पसीने पसीने होने लगा था, पर मैं उसका साथ नहीं दे पा रही थी.

उसने शायद घाघरे के जैसा कुछ पहना हुआ था, जो कि काफी खुला हुआ भी था. एक्स एक्स एक्स एसएक्सईतू चोद दे आज मुझे!उसके इतना कहते ही मैंने उसका गाउन निकाल दिया, वो अब मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी, उसने पेंटी भी नहीं पहनी हुई थी. बीएफ ओपन वीडियोपर हिना भाभी को रोते देखने के बाद अगली सुबह मैं जानबूझ कर सोया रहा और भैया के जाने का इंतज़ार करने लगा. मैं सोच ही रहा था कि प्रिया तो लगभग तैयार ही है, बस मुझे ही कोई मौका ही नहीं मिल‌ रहा.

मैंने उसी टाइम सोच लिया था कि आज शादी में कैसे भी करके इसकी गांड जरूर मारूंगा.

इस समय हम दोनों को दुनिया से कोई मतलब नहीं था और बस एक दूसरे को कसकर पकड़ कर लंड और चूत से एक दूसरे के साथ लड़ाई कर रहे थे. उसके मुँह से ये सुनते ही मैंने फिर से उसे जकड़ लिया और उसकी गांड पर ऊपर से ही हल्के हल्के शॉट मारने लगा. मैं उम्मीद करता हूं कि मेरे सभी पाठक अपना लंड निकाल कर और सभी पठिकाएं अपनी चूत को पानी छोड़ने की इजाजत देने के साथ ही कहानी का लुत्फ़ उठाने के लिए तैयार होंगी.

एक पल को मेरा चेहरा निहारा जिस पर शायद उसे मन माफिक भाव न ही दिखे हों. थोड़ी देर बाद मैं उनके घर के सामने पहुँच गया, सच कहूँ तो दोस्तो … मेरे मन में बहुत से सवाल चल रहे थे उस समय … जैसे कि क्या ये उतनी सुंदर होंगी जैसी ये फोटो में दिखती हैं और क्या इन्होंने जो फोटो मुझे भेजा था, क्या वो सब असली थे या नहीं?मन में सवाल लिए हुए मैंने उनके घर के दरवाजे की घंटी बजाई. मगर जिस दिन उससे चुदवाने का दिन हो, उस दिन अपनी चूत को पूरी तरह से साफ़ करके रखना.

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मेरे ऊपर लेट कर पूजा थोड़ी देर और मेरे लंड और मेरे अंडों के साथ खेलती रही और फिर मुझसे बोली- राजा, अब तुम मेरी चूत को और मैं तुम्हारे लंड को अच्छी तरह से देख लूँगी और उसका स्वाद भी ले लूँगी. उसकी बड़ी सी गांड को दबाने में बहुत मज़ा आ रहा था।अब मैंने धीरे-धीरे उसके पजामे को थोड़ा नीचे कर दिया और उसकी छोटी सी चड्डी में से उसकी गांड बाहर झाँक रही थी। उसकी चड्डी की इलास्टिक में मैंने हाथ डाल दिया और उसकी चिकनी गांड को सहलाने लगा।मासूम सी लड़की आज मेरे हाथ में थी. वो औरत थी और वो हर मर्द की निगाह पहचान जाती थी पर मैं उसको कभी भी ऐसे नहीं देखता था कि उसको कुछ गलत सन्देश जाये उसके पति भी इंजीनियर थे और वो कुवैत में थे.

सामान्यत: मैं घूमने का शौकीन नहीं हूं, लेकिन मेरे पक्के पांच दोस्तों के बार बार जिद करने पर प्लान बनाना पड़ा.

उनकी अचानक से हुई इस हरकत से मैं थोड़ा घबरा गई और बोली- सर यह आप क्या कह रहे हैं?उन्होंने मुझे बांहों में कसते हुए कहा- गीता, तुझे देख पागल हो जाता हूँ.

पर आज तुमसे मिल कर लग रहा है कि मेरी सहेलियाँ शायद सच ही कहती होंगी मुझसे… सच में उनके पति 2-3 बार या काफी देर तक चोदते होंगे उन्हें … अगर मुझे आपके बारे में पहले पता होता तो फर्स्ट टाइम सेक्स भी मैं आपके साथ ही करती. इन दोनों वजहों से मुझे नहीं लगता कि इस स्तम्भन का रोहित की उत्तेजना पर कोई खास असर पड़ रहा था।शुरू में उसने धक्के धीरे-धीरे ही लगाये थे लेकिन बाद में उसकी गति तेज होती गयी थी और अंतिम धक्कों के वक्त तो सुपरफास्ट हो गया था।धक्के पूरे हो गये तो वह निकाल कर दीवार से टिक गया और हांफने लगा जबकि आरजू दोनों पैर फैला कर जमीन पर बैठ गयी।नशा ही उतर गया. अमेरिका के सेक्सी बीएफअंकल जी का लंड जब कभी मेरी चूत की गहराई में जोरदार धक्का लगाता, तो मेरे मुँह से एक लम्बी आह निकल जाती.

दूध सा गोरा बदन … और उसके बड़े बड़े मम्मों को देख तो मेरे मुँह में पानी आ गया. छोड़ … मुझे … मम्मी आ जाएंगी … छोओओड़ … मैंने बताया ना कि उस रात दीदी तुम्हारे साथ थीं, ये सब दीदी के साथ ही करना!” प्रिया ने अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा. नेहा को तड़पाने के लिए मैं उसकी चुत को ऊपर से नीचे तक तो चाट रहा था.

मन उनकी पीठ पर चढ़ कर उनके नीचे हाथ डाल कर चूचों को मसल मसल कर लंड के झटके दे रहा था. मैं कार लेकर आया तो पापा मुझे आवाज देने लगे- कहां जा रहे हो?मैंने कहा- पापा वो बेबी दीदी की तबियत ठीक नहीं है, इसलिए घर जा रहे हैं.

दिन गुजरते गए और हम दोनों एक दूसरे को और अधिक बेहतर तरीके से समझते गए.

तभी मैं उनके पास गया और पूछा तो उनकी गाड़ी की डिक्की लॉक नहीं हो पा रही थी. तारा मुझे पकड़ कर बिस्तर के पास ले गयी और उसने मुझे निर्वस्त्र करना चाहा. मैं उसका पेट, नाभि, स्तन सहलाता रहा और अपने लौड़े को धीरे-धीरे हिलाता हुए अंदर भी रहा। इस तरह मैंने पूरा लण्ड अपनी बहन की चूत में धकेल दिया.

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और अगर बापू को पता चला तो वो मेरी गांड में डंडा जरूर डाल देगा।मैंने कहा- अबे कुछ नहीं होगा. फिर वे अपने हाथ से मेरी चूत को सहलाने लगे, मेरी चूत बहुत चिपचिपा रही थी. फिर मम्मी मुझसे बोलीं- सोनू ये राज अंकल बहुत अच्छे हैं, ये लोग कहते हैं कि मानिकपुर में बहुत अच्छा बाजार है.

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परंतु उनके हाथ में जो भी जादू रहा हो, मेरा दर्द बिल्कुल गायब होने लगा. इडली, मसाला डोसा, सांभर, नारियल की चटनी, वड़ा सब कुछ सामने मेज पर सजा था और साथ में छुरी और कांटे भी. लेकिन वह काफी भारी था इसलिए पैंट को नीचे करने में बहुत दिक्कत हो रही थी.

सामान्यत: मैं घूमने का शौकीन नहीं हूं, लेकिन मेरे पक्के पांच दोस्तों के बार बार जिद करने पर प्लान बनाना पड़ा. लोगों की तो दो उंगलियां घी में होती हैं मगर मेरी तो तीन हो जाएंगी … प्रिया, नेहा और सुलेखा‌ भाभी!सुलेखा भाभी अभी दरवाजे पर ही पहुंची‌ थीं कि अब ये बात मेरे दिमाग में आते ही मैंने बिजली की सी फुर्ती से उठकर सुलेखा भाभी को दरवाजे पर ही पकड़ लिया.

मैंने एक उंगली बुर में घुसा दी, तभी वो हल्के स्वर में चीख़ मारते हुए उठकर बैठ गयी.

मैंने नीरू को बोला- अरे नीरू, यह क्या कर रही है?नीरू बोली- जीजू आप घबराओ मत, कल रात मैंने इसको ब्लू फिल्म दिखाई थी मोबाइल पर! उसको देखकर यह सब कुछ सीख गई है. अपनी सारी बातें तुम मुझे बता सकते हो, मैं तुम्हारी फ्रेंड जैसी ही हूँ. दोस्तो, पिछली मस्तराम कहानीगांव की रिश्ते की साली को चोदामें मैंने आपको अपनी 100% सच्ची कहानी सुनाई कि किस तरह से मैंने अपनी गांव के रिश्ते की साली नीरू की पहली बार चुदाई की और अपनी पत्नी के सहयोग से किस तरह उसकी सील को तोड़ने में कामयाब रहा.

मैंने उसे उठा कर अपने सीने से लगा कर लिटा सा लिया और धीरे धीरे उसके सर को सहलाने लगा. लालजी ने वन्द्या की सेक्सी सेक्सी फोटो दिखाई थी कुछ नहाते की और कपड़े बदलते की. खैर इसी तरह से कुछ दिन बीते और अब कॉलेज में पढ़ाई पूरी तरह से शुरू हो गई थी, जिसकी वजह से वो कम ही मिलती थी.

अब वो मम्मी के गाल पर किस करने लगीं और मम्मी की लाल रंग की पेन्टी को थोड़ा साइड में करके उनकी चूत में उंगली करने की कोशिश करने लगीं.

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फिर एक हाथ से भाभी की चूत को सहलाया और लपक कर चूत की फांकों पर जीभ लगा कर चाटने लगा. क्योंकि मुझे बायोलॉजी में बहुत ही कम मार्क्स मिले थे, जिसकी वजह से मेरे ओवरआल परसेंटेज ज्यादा नहीं आए थे. मैं चीख भी नहीं पाई क्योंकि माइक ने अपनी पूरी ताकत से मेरे मुँह से मुँह चिपका लिया था.

मैं कुछ समझ पाता कि उसने मेरा लंड मुँह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.

उनको देख कर ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई अप्सरा सफेद रंग के कपड़ों के बजाय लाल और काले रंग के कपड़े पहने खड़ी हो मेरे सामने!मैं अभी उनको ऊपर से नीचे देख ही रहा था कि उन्होंने खुद ही मुझसे पूछा- आप आर्यन हो ना?मैं स्वीकृति में सिर्फ़ अपना सर ही हिला सका. यह सच्ची कहानी है जिसमें मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी माँ को मेरी रंडी बनाया. मैं कुछ समझा नहीं क्योंकि वो लड़की दीदी के ससुराल पक्ष की सहेली थी, जो भइया की शादी में आयी थी.